म्यूचुअल फंड में SIP (Systematic Investment Plan) के जरिए निवेश करने वाले लोगों के लिए बाजार में गिरावट या शुरुआती कम रिटर्न चिंता का कारण बन बन जाता है। कई निवेशक पहले एक-दो साल में अपने SIP निवेश पर अच्छा रिटर्न नहीं देखते हैं तो SIP बंद करने या पैसा निकालने के बारे में सोचने लगते हैं।
SIP का शुरुआती प्रदर्शन क्यों न देखें (AI Generated Image)
SIP के अंतिम नतीजे हो सकते हैं अलग
हालांकि, आंकड़े बताते हैं कि शुरुआती प्रदर्शन हमेशा SIP के अंतिम नतीजे को तय नहीं करता। 5 साल का एसआईपी निवेश 10 प्रतिशत से ज्यादा का सालाना औसत रिटर्न दे सकता है। भले ही बाजार शुरुआती वर्षों में कमजोर रहे।
Rupee Cost Averaging का मिलेगा फायदा
शुरुआती नुकसान या कमजोर रिटर्न के बावजूद निवेश को कुछ और साल जारी रखने से स्थिति में बड़ा सुधार देखने को मिल सकता है। इसका एक कारण Rupee Cost Averaging भी है। SIP में बाजार ऊपर हो या नीचे, निवेशक एक तय रकम नियमित रूप से निवेश करता रहता है। बाजार गिरने पर उसी रकम में ज्यादा यूनिट मिलती हैं। बाद में बाजार में सुधार आने पर इन यूनिट्स का फायदा मिल सकता है। यही प्रक्रिया लंबे समय में औसत खरीद लागत को संतुलित करने में मदद करती है।
अगर निवेश की अवधि 7 या 10 साल तक बढ़ाई गई तो ऐतिहासिक आंकड़ों में पूंजी गंवाने का जोखिम शून्य देखा गया है। 10 साल की SIP में करीब 90% मौकों पर दो अंकों का वार्षिक रिटर्न मिला।
SIP में शुरुआती 2 साल का प्रदर्शन न देखें
इसलिए इक्विटी म्यूचुअल फंड की SIP को केवल दो साल के प्रदर्शन के आधार पर जज करना सही नहीं है। SIP को लंबे समय के लिए बनाया गया निवेश माना जाता है। इसका उद्देश्य नियमित निवेश, कंपाउंडिंग और समय के साथ वेल्थ क्रिएशन करना है। इसका मतलब यह नहीं है कि लंबे समय तक निवेश करने से जोखिम पूरी तरह खत्म हो जाता है, लेकिन निवेश की अवधि बढ़ने पर बाजार की छोटी अवधि की उठापटक का असर कम हो सकता है।
इसलिए अगर आपकी SIP ने शुरुआती एक-दो साल में उम्मीद के मुताबिक रिटर्न नहीं दिया है, तो केवल इसी वजह से घबराकर उसे बंद करने के बजाय अपने निवेश के लक्ष्य, फंड की गुणवत्ता और जोखिम को समझना जरूरी है। SIP में धैर्य और निरंतरता लंबे समय में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
