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चांदी ₹1.88 लाख सस्ती, सोना भी धड़ाम! एक्सपर्ट बोले- अभी पिक्चर बाकी है... मार्च तक ये होगा भाव

Gold-Silver Price Crash: सोने और चांदी में गिरावट जारी है। आम लोगों के लिए यह अच्छी खबर है। हालांकि, एक्सपर्ट का कहना है कि अभी दोनों कीमती धातु में और बड़ी गिरावट आ सकती है। इसके पीछे कई कारण हैं। आइए जानते हैं कि क्यों सोने और चांदी की कीमत में आएगी और गिरावट? इसके पीछे की क्या है वजह? कहां तक टूट सकता है भाव?

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सोना और चांदी सस्ती होगी
Updated Feb 17, 2026, 12:12 IST

सोने-चांदी की कीमतों (Gold-Silver Price) में गिरावट थमने का नाम नहीं ले रही है। चांदी की कीमत ऑल टाइम हाई से करीब 78% सस्ती हो चुकी है। चांदी ₹4,20,000 प्रति किलोग्राम के ऑल-टाइम हाई पर पहुंची थी। मंगलवार को चांदी 7,244.00 (3.02%) टूटकर 2,31,800 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई है। इस तरह सिल्वर की कीमत में 1.88 लाख रुपये की कमी आ चुकी है। गोल्ड भी अपने रिकॉर्ड हाई से करीब 40,000 रुपये से अधिक सस्ता (Gold Cheaper) हो गया है। हालांकि, कमोडिटी मार्केट एक्सपर्ट और केडिया एडवाइजरी के फाउंडर व डायरेक्टर, अजय केडिया का कहना है कि यह गिरावट यही थमने वाली नहीं है। अभी पिक्चर बाकी है...सोने और चांदी में अभी और बड़ी गिरावट आ सकती है। आइए जानते हैं कि कहां तक टूट सकता है सोना और चांदी?

सोने और चांदी में इन कारणों के चलते बुल रन खत्म

1. एक्सचेंज पर बढ़े मार्जिन: हाल के दिनों में रिकॉर्ड तेजी के बाद एक्सचेंज (जैसे CME या MCX) रिस्क कम करने के लिए 'मार्जिन' बढ़ा दिए हैं।

असर: मार्जिन बढ़ने का मतलब है कि अब निवेशक को एक लॉट खरीदने या होल्ड करने के लिए ज्यादा पैसा जमा करना होगा। जिन निवेशकों के पास अतिरिक्त फंड नहीं होता, उन्हें मजबूरन अपनी पोजीशन बेचनी पड़ती है। इसे 'फोर्स्ड लिक्विडेशन' कहते हैं, जिससे बाजार में अचानक भारी बिकवाली आती है।

2. निवेशक 'लॉन्ग' पोजीशन कम कर रहे हैं: यूएस एक्सचेंज (COMEX) पर निवेशक अपनी 'लॉन्ग' (खरीदारी) की पोजीशन काटकर मुनाफा वसूल रहे हैं।

असर: जब बड़े फंड्स और ट्रेडर्स अपनी पोजीशन कम करते हैं, तो बाजार का सेंटिमेंट 'बुलिश' से 'बेयरिश' हो जाता है। यह इस बात का संकेत है कि अब तेजी का दौर फिलहाल थम गया है।

3. ब्लूमबर्ग कमोडिटी इंडेक्स ने वेटेज बदला: ब्लूमबर्ग इंडेक्स ने सोने-चांदी से वेटेज घटाकर 'बेस मेटल्स' (जैसे कॉपर, एल्युमीनियम) पर बढ़ा दिया है।

असर: इंडेक्स को ट्रैक करने वाले ईटीएफ (ETFs) और पैसिव फंड्स को अब अपनी होल्डिंग से सोना और चांदी बेचना होगा और बेस मेटल खरीदना होगा। यह तकनीकी बिकवाली कीमतों को और नीचे दबाती है।

4. भू-राजनीतिक तनाव में कमी: सोना-चांदी 'सुरक्षित निवेश'माने जाते हैं। जब युद्ध का डर होता है, तो ये बढ़ते हैं। रूस-यूक्रेन और यूएस-ईरान में सुलह के संकेत मिल रहे हैं

असर: इन मोर्चों पर बातचीत की उम्मीद और युद्ध की आशंका कम होने से सोने और चांदी की मांग कम होगी। इससे कीमत में कमी होगी।

5. ट्रेड डील्स और टैरिफ में नरमी: भारत-यूएस ट्रेड डील होने से अनिश्चितता खत्म हुई है। ट्रंप द्वारा कनाडा पर लगाए गए टैरिफ को जब घरेलू सांसदों का समर्थन नहीं मिला। इससे संकेत मिला कि भविष्य में 'ट्रेड वॉर' उतना उग्र नहीं होगा जितना डर था। ग्रीनलैंड पर भी ट्रंप का रुख नरम पड़ा है।

असर: ट्रेड वॉर कम होने और ट्रंप के रुख में नरमी से सोने और चांदी की मांग कम होगी। यह दोनों कीमती धातु पर दबाब बनाएगा, जिससे कीमतें कम होंगी।

6. गोल्ड-सिल्वर रेश्यो: गोल्ड-सिल्वर रेश्यो यह बताता है कि 1 ग्राम सोना खरीदने के लिए कितने ग्राम चांदी लगेगी।

असर: वर्तमान में यह 65 पर है। अगर यह बढ़कर 75 की ओर जाता है, तो इसका सीधा मतलब है कि चांदी, सोने की तुलना में ज्यादा तेजी से गिरेगी। चांदी एक इंडस्ट्रियल मेटल भी है, इसलिए जब ग्लोबल स्लोडाउन या रिबैलेंसिंग होती है, तो चांदी में सोने के मुकाबले ज्यादा 'पैनिक' सेल आता है।

चांदी में अभी कितनी गिरावट की संभावना?

अजय केडिया के अनुसार, अभी इंटरनेशन मार्केट कॉमेक्स (COMEX) पर चांदी की कीमत 70 डॉलर प्रति औंस के आसपास है। यह टूटकर 55 डॉलर तक आ सकती है। अगर ऐसा हुआ तो मार्च महीने तक भारतीय बाजार में चांदी की कीमत टूटकर 1.80 लाख प्रति किलोग्राम तक आ सकती है।

सोना भी होगा सस्ता, मगर कितना...

अगर सोने की बात करें तो सोने में भी गिरावट जारी रह सकती है। इंटरनेशन मार्केट में सोना अभी 4400 डॉलर के आसपास ट्रेड कर रहा है। वैश्विक हालात जिस तरह से बन रहे हैं, वो सोने की रैली को सपोर्ट नहीं करेंगे। सोने में 3500 डॉलर से रैली देखने को मिली थी। सोना टूटकर वहीं आ सकता है। ऐसी स्थिति में मार्च महीने तक भारत में सोने की कीमत 1.05 से 1.10 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम हो सकती है।

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