LIC OFS Subscription Status : एक तरफ शेयर बाजार में LIC के शेयरों में 9% से ज्यादा की गिरावट देखने को मिली, वहीं दूसरी तरफ सरकार की तरफ से ऑफर फॉर सेल (OFS) को संस्थागत निवेशकों का जबरदस्त समर्थन मिला। सरकार के मुताबिक, गैर-खुदरा (Non-Retail) निवेशकों के लिए खुला LIC का OFS अपने बेस इश्यू साइज के मुकाबले 3.32 गुना सब्सक्राइब हुआ है।
OFS को मिला बंपर सपोर्ट
यह सरकार के विनिवेश कार्यक्रम के लिए बड़ी सफलता मानी जा रही है और इससे साफ संकेत मिलता है कि लंबी अवधि के निवेशकों का LIC पर भरोसा बरकरार है। मजबूत मांग को देखते हुए सरकार ने ग्रीन शू ऑप्शन का इस्तेमाल करने का फैसला भी किया है।
OFS को क्यों मिला इतना अच्छा रिस्पॉन्स?
DIPAM (डिपार्टमेंट ऑफ इन्वेस्टमेंट एंड पब्लिक एसेट मैनेजमेंट) के सचिव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बताया कि LIC के OFS को संस्थागत निवेशकों से शानदार प्रतिक्रिया मिली है। सरकार ने कहा कि यह भारत के पूंजी बाजार की गहराई और निवेशकों के मजबूत भरोसे को दर्शाता है। DIPAM के मुताबिक शेयरों की जबरदस्त मांग के कारण सरकार ने ग्रीन शू ऑप्शन लागू करने का फैसला लिया है। अब खुदरा निवेशकों (Retail Investors) के पास भी इस ऑफर में हिस्सा लेने का मौका है।
सरकार कितनी हिस्सेदारी बेच रही है?
सरकार ने LIC में अपनी 2.5% हिस्सेदारी बेचने के लिए OFS लॉन्च किया है। इसके अलावा, मजबूत मांग मिलने पर अतिरिक्त 4% हिस्सेदारी बेचने का विकल्प भी रखा गया है। यानी कुल मिलाकर सरकार 6.5% तक हिस्सेदारी बेच सकती है। फिलहाल, इस OFS का फ्लोर प्राइस 382 रुपये प्रति शेयर तय किया गया है।
फिर LIC के शेयर क्यों टूटे?
OFS खुलने के बाद गुरुवार के शुरुआती कारोबार में LIC का शेयर 9% से अधिक गिर गया। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इसकी सबसे बड़ी वजह 382 रुपये का डिस्काउंटेड फ्लोर प्राइस है। जब सरकार बाजार भाव से कम कीमत पर बड़ी मात्रा में शेयर बेचती है, तो निवेशकों को बाजार में शेयरों की आपूर्ति बढ़ने की आशंका होती है। यही कारण है कि शेयर पर अल्पकालिक दबाव देखने को मिला। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि यह गिरावट मुख्य रूप से OFS से जुड़ी तकनीकी प्रतिक्रिया है और इसे कंपनी के कारोबार या वित्तीय स्थिति में किसी कमजोरी के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
ग्रीन शू ऑप्शन क्या होता है?
ग्रीन शू ऑप्शन ऐसा प्रावधान होता है, जिसके तहत यदि किसी OFS या शेयर बिक्री को उम्मीद से ज्यादा मांग मिलती है, तो विक्रेता (इस मामले में सरकार) पहले से तय सीमा तक अतिरिक्त शेयर भी बेच सकता है। इससे सरकार को अधिक पूंजी जुटाने का अवसर मिलता है और निवेशकों की मजबूत मांग का फायदा उठाया जा सकता है।
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