मकान मालिक की मनमानी नहीं चलेगी! किरायेदार भी जान लें सिक्योरिटी डिपॉजिट के नियम

किराये पर घर लेते समय सिक्योरिटी डिपॉजिट को लेकर अक्सर मकान मालिक और किरायेदार में विवाद होता है। नए 'मॉडल टेनेंसी एक्ट' के तहत अब मकान मालिक अपनी मनमानी नहीं कर सकते।

भारत के बड़े शहरों में घर किराये पर लेकर रहना एक आम बात है, लेकिन अक्सर किरायेदार और मकान मालिक के बीच किसी न किसी बात को लेकर विवाद खड़ा हो जाता है। कभी मकान मालिक बिना बताए अचानक किराया बढ़ा देते हैं, तो कभी बिना किसी ठोस वजह के घर खाली करने का दबाव बनाने लगते हैं। सबसे ज्यादा विवाद तो घर खाली करते समय 'सिक्योरिटी डिपॉजिट' (Security Deposit) को वापस लेने को लेकर होता है, जहां मकान मालिक टूट-फूट या पेंटिंग के नाम पर मोटी रकम काट लेते हैं। ऐसे में देश के हर किरायेदार को अपने कानूनी अधिकारों की सही जानकारी होना बेहद जरूरी है। सरकार ने किरायेदारों को मकान मालिकों की मनमानी से बचाने और दोनों पक्षों के बीच पारदर्शिता लाने के लिए 'मॉडल टेनेंसी एक्ट' (Model Tenancy Act) जैसे कड़े नियम बनाए हैं। इन नियमों को समझकर आप न केवल मानसिक तनाव से बच सकते हैं, बल्कि अपने पैसों को भी सुरक्षित रख सकते हैं।

Tenant Vs Landlord Rules

रेंट अग्रीमेंट

किरायेदारी की शुरुआत में सबसे पहला और सबसे जरूरी नियम है एक लिखित रेंट एग्रीमेंट (Rent Agreement) का होना। अक्सर लोग मौखिक बातचीत या साधारण पर्चे पर लिखकर मकान तय कर लेते हैं, जो कानूनी रूप से बेहद खतरनाक है। मॉडल टेनेंसी एक्ट के तहत बिना लिखित समझौते के कोई भी प्रॉपर्टी किराये पर नहीं दी जा सकती। इस एग्रीमेंट में किराये की राशि, किराये की अवधि, हर साल होने वाली बढ़ोतरी और सिक्योरिटी डिपॉजिट का स्पष्ट रूप से जिक्र होना चाहिए। नियम के अनुसार, मकान मालिक अपनी मर्जी से जब चाहे तब किराया नहीं बढ़ा सकता। अगर वह किराया बढ़ाना चाहता है, तो उसे किरायेदार को कम से कम तीन महीने पहले लिखित में नोटिस देना होगा। यदि किरायेदार को वह बढ़ोतरी मंजूर नहीं है, तो वह तय समय के भीतर घर खाली करने का फैसला ले सकता है, लेकिन मकान मालिक जबरन बढ़ा हुआ किराया वसूल नहीं कर सकता।

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