India economy GDP Growth: भारतीय अर्थव्यवस्था चालू वित्त वर्ष 2025-26 में 7.5 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि दर्ज कर सकती है। यह अनुमान भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की हाल ही में जारी रिपोर्ट में सामने आया है। यह दर राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) द्वारा पहले जारी किए गए 7.4 प्रतिशत के अनुमान से थोड़ा अधिक है। इस वर्ष की आर्थिक वृद्धि पिछले वित्त वर्ष की 6.5 प्रतिशत दर की तुलना में काफी बेहतर रहने की संभावना है।
भारतीय अर्थव्यवस्था 7.5% की मजबूत वृद्धि के रास्ते पर (तस्वीर-istock)
एनएसओ और आरबीआई के अनुमान
न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक एनएसओ ने बुधवार को वित्त वर्ष 2025-26 के लिए प्रथम अग्रिम अनुमान जारी किया था। इसमें जीडीपी वृद्धि दर 7.4 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया था। इससे पहले, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) ने इसी वित्त वर्ष के लिए 7.3 प्रतिशत वृद्धि दर का अनुमान जताया था। एसबीआई की रिपोर्ट के अनुसार, ऐतिहासिक तौर पर आरबीआई और एनएसओ के अनुमानों में 0.20 से 0.30 प्रतिशत अंक का अंतर होता है। इसलिए, 7.4 प्रतिशत का अनुमान अपेक्षित और तर्कसंगत माना जा सकता है।
एसबीआई की रिपोर्ट कहती है कि वित्त वर्ष 2025-26 में जीडीपी वृद्धि दर लगभग 7.5 प्रतिशत रह सकती है और इसमें ऊपर जाने की संभावना भी बनी हुई है। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि द्वितीय अग्रिम अनुमान, जिसमें और अधिक डेटा और संशोधन शामिल होंगे, 27 फरवरी 2026 को जारी किए जाएंगे। साथ ही, 2022-23 को आधार वर्ष के रूप में संशोधित किए जाने के बाद ये सभी आंकड़े बदल सकते हैं।
राजकोषीय घाटा और बजट स्थिति
एसबीआई की रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि नवंबर 2025 के अंत तक भारत का राजकोषीय घाटा 9.8 लाख करोड़ रुपये था, जो बजट अनुमान का 62.3 प्रतिशत है। रिपोर्ट में कहा गया है कि कर राजस्व बजट अनुमान से थोड़ा कम रह सकता है, लेकिन गैर-कर राजस्व में बढ़ोतरी होने की संभावना है। इससे कुल प्राप्तियों पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा।
कुल व्यय अपेक्षाकृत कम रहने के कारण, वित्त वर्ष के अंत तक राजकोषीय घाटा 15.85 लाख करोड़ रुपये तक रह सकता है। यह बजट में अनुमानित 15.69 लाख करोड़ रुपये के करीब है। नए जीडीपी आंकड़ों के आने के बाद भी देश का राजकोषीय घाटा जीडीपी के प्रतिशत के रूप में 4.4 प्रतिशत पर स्थिर रहने की संभावना है।
आर्थिक सुधार और भविष्य की राह
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत वृद्धि के रास्ते पर है। बढ़ती खपत, निवेश और निर्यात में सुधार के कारण जीडीपी वृद्धि दर में सुधार दिखाई दे रहा है। हालांकि, वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों और तेल की कीमतों जैसी बाहरी चुनौतियों का असर भी भारत की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
एसबीआई की रिपोर्ट के अनुसार, अगर कर राजस्व में थोड़ी कमी भी आती है, तो गैर-कर राजस्व में वृद्धि और खर्चों में नियंत्रण के कारण सरकार के वित्तीय लक्ष्य पर बड़ा असर नहीं पड़ेगा। यह संकेत है कि भारत का राजकोषीय संतुलन फिलहाल सुरक्षित है और वित्तीय प्रबंधन में सुधार की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं।
कुल मिलाकर, भारतीय अर्थव्यवस्था इस वित्त वर्ष में 7.5 प्रतिशत के करीब वृद्धि दर दर्ज कर सकती है। यह वृद्धि पिछले साल की तुलना में अधिक है और यह संकेत देती है कि भारत की आर्थिक गति मजबूत बनी हुई है। वित्तीय विशेषज्ञों और सरकारी रिपोर्टों के अनुसार, देश के राजकोषीय घाटे और व्यय नियंत्रण के कारण आर्थिक स्थिति स्थिर रहने की संभावना है। आने वाले द्वितीय अग्रिम आंकड़ों के साथ ही आर्थिक नीति निर्माताओं को और सटीक दिशा मिल सकेगी।
