SBI की बड़ी मांग: अब 45 लाख में नहीं आता सस्ता घर! जानें होम लोन लेने वाले को क्या होगा फायदा?

घरों की कीमतों में मौजूदा समय में आग लगी हुई है, अफोर्डेबल हाउसिंग की बात करें तो 50 लाख से नीचे कोई घर नहीं है। ऐसे में SBI का कहना है कि अफोर्डेबल हाउसिंग की लिमिट को तुरंत बढ़ाने की जरूरत है।

भारत में अपना घर खरीदना हर मिडिल क्लास परिवार का सबसे बड़ा सपना होता है। सरकार ने इस सपने को सच करने के लिए 'अफोर्डेबल हाउसिंग' (Affordable Housing) यानी किफायती आवास की एक श्रेणी बनाई है, जिसके तहत घर खरीदारों को विशेष छूट और टैक्स बेनिफिट्स मिलते हैं। वर्तमान नियमों के अनुसार, ₹45 लाख तक की कीमत वाले घर को 'किफायती' माना जाता है। लेकिन, हाल ही में देश के सबसे बड़े बैंक, भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने इस परिभाषा पर सवाल उठाए हैं। SBI का कहना है कि अब शहरों में ₹45 लाख में घर मिलना लगभग नामुमकिन हो गया है, इसलिए इस सीमा (Limit) को तुरंत बढ़ाने की जरूरत है।

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SBI ने क्यों उठाई यह मांग?

SBI की इस मांग के पीछे ठोस आंकड़े और बाजार की हकीकत है। बैंक ने गौर किया है कि पिछले कुछ वर्षों में जमीन की कीमतें, निर्माण सामग्री (ईंट, सीमेंट, लोहा) की लागत और लेबर चार्ज में भारी बढ़ोतरी हुई है। इसके कारण मेट्रो शहरों और उनके आसपास के इलाकों में ₹45 लाख के बजट में घर मिलना बहुत मुश्किल हो गया है। बैंक की रिपोर्ट बताती है कि अब औसत होम लोन का साइज भी काफी बढ़ गया है। जब लोन की रकम ही ₹45 लाख के आसपास पहुंच रही है, तो घर की कुल कीमत इस सीमा को आसानी से पार कर जाती है। ऐसे में एक बड़ा वर्ग उन सरकारी फायदों से वंचित रह जाता है, जो केवल किफायती घरों के लिए तय किए गए हैं।

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