अगर आप बिना जोखिम के अपनी बचत पर तय रिटर्न चाहते हैं तो फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) एक अच्छा विकल्प साबित हो सकता है। देश का सबसे बड़ा पब्लिक सेक्टर बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) अपने ग्राहकों को अलग-अलग अवधि की एफडी पर आकर्षक ब्याज दरें ऑफर कर रहा है। खास बात यह है कि बैंक वरिष्ठ नागरिकों (Senior Citizens) को सामान्य ग्राहकों की तुलना में अधिक ब्याज ऑफर कर रहा है, जिससे उन्हें निवेश पर बेहतर रिटर्न मिल सकता है।
एसबीआई की 5 साल की एफडी पर कितना मिल रहा ब्याज (AI Generated Image)
5 साल की SBI FD पर कितना ब्याज मिल रहा है?
वर्तमान ब्याज दरों के अनुसार, SBI अपनी 5 साल की एफडी पर सामान्य ग्राहकों को 6.05% सालाना ब्याज दे रहा है। वहीं, सीनियर सिटिजन ग्राहकों के लिए यही ब्याज दर 7.05% सालाना है। अगर कोई निवेशक लंबी अवधि के लिए सुरक्षित निवेश की योजना बना रहा है तो यह विकल्प उसके लिए काम का साबित हो सकता है।5 लाख रुपये की एफडी पर कितना मिलेगा?
अगर कोई सामान्य ग्राहक SBI की 5 साल की एफडी में 5 लाख रुपये का निवेश करता है तो मौजूदा ब्याज दर के अनुसार मैच्योरिटी पर उसे लगभग 6,75,088 रुपये मिल सकते हैं। यानी करीब 1,75,088 रुपये ब्याज के रूप में प्राप्त हो सकते हैं।
वहीं, अगर कोई सीनियर सिटिजन 5 लाख रुपये की एफडी करवाता है तो 7.05% की ब्याज दर के हिसाब से मैच्योरिटी पर उसे लगभग 7,09,129 रुपये मिल सकते हैं। इस स्थिति में कुल ब्याज करीब 2,09,129 रुपये होगा।
| विवरण | सामान्य ग्राहक | सीनियर सिटिजन |
|---|---|---|
| निवेश राशि | ₹5,00,000 | ₹5,00,000 |
| एफडी अवधि | 5 वर्ष | 5 वर्ष |
| ब्याज दर | 6.05% | 7.05% |
| मैच्योरिटी राशि (लगभग) | ₹6,75,088 | ₹7,09,129 |
वरिष्ठ नागरिकों को मिलता है अतिरिक्त फायदा
बैंक आमतौर पर वरिष्ठ नागरिकों को सामान्य ग्राहकों की तुलना में अतिरिक्त ब्याज दर का लाभ देते हैं। इसका उद्देश्य रिटायरमेंट के बाद नियमित और बेहतर आय सुनिश्चित करना है। अगर किसी वरिष्ठ नागरिक के पास एकमुश्त राशि उपलब्ध है तो एफडी उसके लिए स्थिर आय का एक अच्छा माध्यम बन सकती है।
क्या FD के ब्याज पर TDS
हालांकि, इस बात का भी ध्यान रखें कि एफडी पर मिलने वाला ब्याज पूरी तरह टैक्स-फ्री नहीं होता। अगर एक वित्तीय वर्ष में किसी बैंक से मिलने वाला कुल ब्याज आयकर विभाग द्वारा तय सीमा से अधिक हो जाता है, तो बैंक उस पर TDS (Tax Deducted at Source) काट सकता है। हालांकि, TDS कटने का मतलब यह नहीं है कि वही आपका अंतिम टैक्स है। अगर आपकी कुल आय टैक्स योग्य सीमा से कम है, तो आप आयकर रिटर्न (ITR) दाखिल कर कटा हुआ टीडीएस वापस भी प्राप्त कर सकते हैं। वहीं, अगर आपकी कुल आय पर अधिक टैक्स बनता है, तो आपको नियमानुसार अतिरिक्त टैक्स का भुगतान करना पड़ सकता है। सामान्य नागरिकों के लिए यह सीमा एक वित्त वर्ष में 50 हजार रुपये और सीनियर सिटिजन के लिए 1 लाख रुपये है।
