सैलरी वही, खर्च ज्यादा? 50-30-20 नहीं, अपनाएं भारतीय परिवार का यह बजट फॉर्मूला

Indian Family Budget: बढ़ती महंगाई में 50-30-20 बजट फॉर्मूला हर परिवार पर फिट नहीं बैठता। भारतीय परिस्थितियों के लिए भारतीय मॉडल जरूरी खर्च, बचत, इमरजेंसी और जीवनशैली को संतुलित करता है।

Indian Family Budget : आज के समय में ज्यादातर लोगों की एक ही शिकायत है। सैलरी तो उतनी ही है, लेकिन खर्च लगातार बढ़ते जा रहे हैं। किराया, राशन, बच्चों की पढ़ाई, ट्रांसपोर्ट और मेडिकल खर्च ने आम परिवारों का बजट पूरी तरह हिला दिया है। कई लोग 50-30-20 जैसे विदेशी बजट फॉर्मूलों को अपनाने की कोशिश करते हैं, लेकिन भारतीय परिवारों की जरुरतें और खर्च करने का तरीका (money management) अलग होने के कारण यह तरीका हमेशा कारगर साबित नहीं होता।

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बढ़ती महंगाई में बिगड़ता घर का बजट (तस्वीर-istock)

क्यों 50-30-20 फॉर्मूला हर किसी पर फिट नहीं बैठता

50-30-20 बजट नियम में आमतौर पर 50% जरुरतों पर, 30% इच्छाओं पर और 20% बचत पर खर्च करने की सलाह दी जाती है। लेकिन भारत जैसे देश में जहां परिवार संयुक्त भी होते हैं और जिम्मेदारियां ज्यादा होती हैं, वहां यह संतुलन बनाए रखना मुश्किल हो जाता है। कई बार जरूरी खर्च ही 60-70% तक पहुंच जाते हैं, जिससे बचत करीब नामुमकिन हो जाती है।

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