ग्रामीण भारत में अमीर हो रहे हैं लोग, NABARD सर्वे में चौंकाने वाले आंकड़े आए सामने

Prosperity In Rural India: NABARD के रूरल इकॉनोमिक कंडीशन्स एंड सेंटिमेंट्स सर्वे (RECSS) सर्वे के आंकड़े स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं कि ग्रामीण भारत में पिछले एक साल में समग्र सुधार और समृद्धि आई है। बढ़ती आय, मजबूत खपत, बेहतर निवेश और संतोषजनक बुनियादी ढांचे ने ग्रामीण घरों की आर्थिक स्थिति को मजबूत किया है।

Prosperity In Rural India: ग्रामीण भारत की अर्थव्यवस्था में पिछले एक साल में मजबूत सुधार देखा गया है। ऐसा NABARD के रूरल इकॉनोमिक कंडीशन्स एंड सेंटिमेंट्स सर्वे (RECSS) के 8वें दौर से पता चलता है। सर्वे के अनुसार, ग्रामीण घरों की करीब 80 फीसदी आबादी ने पिछले वर्ष अपने खर्च में बढ़ोतरी की सूचना दी है, जो ग्रामीण भारत में बढ़ती समृद्धि का संकेत है। NABARD ने यह सर्वे सितंबर 2024 से हर दो महीने में किया है और अब यह एक साल का विस्तृत डेटा उपलब्ध कराता है, जिससे ग्रामीण आर्थिक बदलावों का वास्तविक आंकलन किया जा सकता है।

Growing prosperity in rural India

ग्रामीण भारत में बढ़ती समृद्धि: NABARD सर्वे में सकारात्मक संकेत (तस्वीर-istock)

ग्रामीण डिमांड में व्यापक वृद्धि

न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक सर्वे के आंकड़े दिखाते हैं कि ग्रामीण भारत में मांग, आय और घरेलू कल्याण में मजबूत सुधार हुआ है। ग्रामीण क्षेत्र में मजबूत खपत, बढ़ती आय, कम होती महंगाई और बेहतर वित्तीय व्यवहार के कारण अर्थव्यवस्था सकारात्मक दिशा में बढ़ रही है। सरकार की लगातार कल्याणकारी योजनाओं और सार्वजनिक निवेश ने इस गति को और मजबूत किया है। विशेष रूप से ग्रामीण उपभोग में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। सर्वे में पाया गया कि ग्रामीण घरों का 67.3 प्रतिशत मासिक आय अब केवल खपत पर खर्च हो रहा है। यह आंकड़ा सर्वे के इतिहास में सबसे अधिक है और इसका कारण GST दरों में समायोजन को बताया गया है। वित्त मंत्रालय ने कहा कि यह मजबूत और व्यापक मांग का संकेत है, जो केवल कुछ क्षेत्रों तक सीमित नहीं है।

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