Dollar Vs Rupee: अमेरिका-ईरान युद्ध का असर शेयर बाजार के साथ भारतीय करेंसी रुपये पर भी जबरदस्त देखने को मिल रहा है। डॉलर के मुकाबले बुधवार को रुपया टूटकर नए निचले स्तर पर आ गया। शुरुआती कारोबार में रुपया 71 पैसे गिरकर US डॉलर के मुकाबले 92.18 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गया। 21 जनवरी के बाद यह सबसे ज्यादा गिरावट थी। एशियाई करेंसी में यह सबसे खराब परफॉर्म करने वाली रही। डॉलर इंडेक्स, जो कई बड़ी करेंसी के मुकाबले डॉलर को ट्रैक करता है, 0.3% बढ़कर 99.33 पर पहुंच गया। युद्ध के चलते निवेशक, भारत जैसे उभरते बाजारों से पैसा निकलकर सोने और US ट्रेजरी बॉन्ड में सुरक्षित रूप से लगा रहे हैं। इससे रुपये में बड़ी गिरावट है।
डॉलर के मुकाबले रुपया टूटा
कच्चे तेल ने बाजार का मूड खराब किया
पिछले हफ्ते ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से इंटरनेशनल तेल की कीमतें ऊंची बनी हुई हैं। कच्चे तेल की ऊंची कीमतें भारत के लिए एक बड़ी नेगेटिव बात हैं, जो अपनी लगभग 90% डिमांड इम्पोर्ट करता है। सरकार ने कमी के डर को शांत करने के लिए बिना रुकावट तेल सप्लाई का भरोसा दिया है और मिडिल ईस्ट से फ्लो में रुकावट आने पर रूस से कच्चा तेल इम्पोर्ट करने पर विचार किया है। रुपये पर और दबाव लगातार विदेशी फंड के निकलने से आ रहा है। सोमवार को, विदेशी पोर्टफोलियो इन्वेस्टर्स ने 3,300 करोड़ रुपये की घरेलू इक्विटी बेचीं, जिससे इस साल अब तक उनकी बिकवाली 19,000 करोड़ रुपये या 2.1 अरब डॉलर हो गई।
85% कच्चा तेल आयात करता है भारत
मिडिल ईस्ट में बढ़ते विवाद से भारत पर कई बाहरी तरीकों से असर पड़ने का खतरा है। देश अपनी ज़रूरत का 85% से ज्यादा कच्चा तेल इंपोर्ट करता है, जिससे रुपया तेल की कीमतों में होने वाले झटकों के प्रति बहुत ज्यादा सेंसिटिव हो जाता है, जिससे इंपोर्ट बिल बढ़ता है, करेंट अकाउंट डेफिसिट बढ़ता है और महंगाई तेज़ी से बढ़ती है। साथ ही, ज़्यादा रिस्क से बचने की आदत से भारतीय इक्विटी से विदेशी पोर्टफोलियो का पैसा निकल सकता है, जबकि मिडिल ईस्ट में आर्थिक गतिविधियों में कोई भी रुकावट इस इलाके में काम करने वाले भारतीयों से आने वाले पैसे पर असर डाल सकती है।
करेंसी एक्सपर्ट का कहना है कि अगर ईरान-अमेरिका में जारी लड़ाई लंबी चली तो मिडिल ईस्ट से आने वाले पैसे और कैपिटल फ्लो पर असर पड़ सकता है। भारत का मैक्रोइकोनॉमिक आउटलुक करंट अकाउंट डेफिसिट बढ़ने, महंगाई बढ़ने, रुपये में तेज गिरावट और GDP ग्रोथ कम होने से कमजोर होने की उम्मीद है।
