Startups to Unicorn with Angel Investor Venture Capital : आपने ऐसी सक्सेस स्टोरीज पढ़ी होंगी कि दो दोस्तों के दिमाग में आया एक छोटा-सा आइडिया और कुछ ही सालों में वे हजारों करोड़ रुपये की कंपनी के मालिक बन गए। कभी ऑनलाइन टैक्सी बुक करने का आइडिया, कभी 10 मिनट में किराना पहुंचाने का वादा और कभी घर बैठे खाने की डिलीवरी जैसी सेवाएं शुरुआत में सिर्फ एक सोच थीं। लेकिन, इन सपनों को हकीकत में बदलने के लिए सिर्फ आइडिया और मेहनत काफी नहीं होती। इसके लिए चाहिए होता है पैसा, सही मार्गदर्शन और बड़े निवेशकों का भरोसा।
एंजल इन्वेस्टर और वेंचर कैपिटल से बड़े बनते हैं स्टार्टअप
यहीं से स्टार्टअप की दुनिया में दो सबसे अहम नाम सामने आते हैं। इन्हें कहा जाता है Angel Investor (एंजेल इन्वेस्टर) और Venture Capital (वेंचर कैपिटल या VC)। इन दोनों का काम स्टार्टअप में निवेश करना है। लेकिन दोनों के निवेश का तरीका, समय और उद्देश्य अलग होता है। आइए इसे आसान भाषा में समझते हैं कि ये कौन होते हैं और कैसे किसी छोटे आइडिया को यूनिकॉर्न कंपनी बनने की राह पर ले जाते हैं।
एंजेल इन्वेस्टर : जब सिर्फ आइडिया पर लगता है दांव
एंजेल इन्वेस्टर ऐसे लोग होते हैं, जो अपने निजी पैसे से किसी नए स्टार्टअप में शुरुआती दौर में निवेश करते हैं। इन्हें अक्सर स्टार्टअप का पहला बड़ा सहारा माना जाता है। आमतौर पर ये सफल उद्यमी, उद्योगपति, टेक एक्सपर्ट या अनुभवी बिजनेस लीडर होते हैं, जिन्होंने खुद बिजनेस में सफलता हासिल की होती है। एंजेल इन्वेस्टर केवल पैसा ही नहीं देते, बल्कि अपने अनुभव, नेटवर्क और बिजनेस सलाह के जरिए भी स्टार्टअप की मदद करते हैं। इसके बदले उन्हें कंपनी में हिस्सेदारी (Equity) मिलती है। शुरुआती निवेश कुछ लाख रुपये से लेकर कई करोड़ रुपये तक हो सकता है।
वेंचर कैपिटल: जब स्टार्टअप को चाहिए तेज रफ्तार
अगर किसी स्टार्टअप का प्रोडक्ट बाजार में पसंद किया जाने लगे और कंपनी तेजी से विस्तार करना चाहे, तब उसकी जरूरत बदल जाती है। यही वह समय होता है जब Venture Capital यानी VC की एंट्री होती है। VC आमतौर पर Seed Funding के बाद Series A, Series B, Series C और उसके बाद के निवेश दौर में पैसा लगाते हैं। इनका निवेश कई करोड़ से लेकर सैकड़ों या हजारों करोड़ रुपये तक हो सकता है। बड़े निवेश के साथ कई VC कंपनियां कंपनी के बोर्ड में प्रतिनिधित्व, रणनीतिक फैसलों में भागीदारी और बेहतर कॉर्पोरेट गवर्नेंस सुनिश्चित करने की कोशिश करती हैं। हालांकि हर निवेश में बोर्ड सीट लेना जरूरी नहीं होता।
Angel Investor और Venture Capital में क्या अंतर है?
| आधार | Angel Investor (एंजेल इन्वेस्टर) | Venture Capital (वेंचर कैपिटल / VC) |
|---|---|---|
| पैसा किसका होता है? | अपना निजी पैसा निवेश करते हैं | निवेशकों, संस्थानों, पेंशन फंड, फैमिली ऑफिस आदि से जुटाए गए फंड का निवेश करते हैं |
| निवेश कब होता है? | स्टार्टअप की शुरुआती Seed या Ideation Stage में | जब स्टार्टअप बढ़ने लगता है और Growth/Scaling Stage में पहुंचता है |
| निवेश की रकम | आमतौर पर ₹10 लाख से ₹5 करोड़ | आमतौर पर ₹10 करोड़ से लेकर सैकड़ों या हजारों करोड़ रुपये तक |
| जोखिम | बहुत अधिक, क्योंकि स्टार्टअप शुरुआती दौर में होता है | अपेक्षाकृत कम, क्योंकि कंपनी का बिजनेस मॉडल कुछ हद तक साबित हो चुका होता है |
| भूमिका | पैसा देने के साथ मेंटरशिप, सलाह और नेटवर्क उपलब्ध कराते हैं | बड़े निवेश के साथ बिजनेस विस्तार, रणनीति, कॉर्पोरेट गवर्नेंस और आगे की फंडिंग में मदद करते हैं |
| कंपनी में हिस्सेदारी | आमतौर पर छोटी हिस्सेदारी लेते हैं | निवेश के आकार के अनुसार बड़ी हिस्सेदारी ले सकते हैं |
| बोर्ड में भागीदारी | आमतौर पर सीमित | कई मामलों में बोर्ड सीट या विशेष अधिकार लेते हैं (हर निवेश में जरूरी नहीं) |
| मुख्य उद्देश्य | अच्छे आइडिया को शुरुआत में आगे बढ़ाना | सफल स्टार्टअप को तेजी से बड़ा बनाना और वैल्यूएशन बढ़ाना |
| एग्जिट का तरीका | IPO, अगले फंडिंग राउंड या हिस्सेदारी | IPO, अगले फंडिंग राउंड या हिस्सेदारी |
यूनिकॉर्न क्या होता है?
जब किसी निजी स्टार्टअप की वैल्यूएशन 1 अरब डॉलर यानी लगभग 8,000 करोड़ रुपये से अधिक हो जाती है, तो उसे Unicorn Startup कहा जाता है। भारत में कई स्टार्टअप इस मुकाम तक पहुंच चुके हैं। हालांकि किसी कंपनी के यूनिकॉर्न बनने के पीछे सिर्फ निवेश ही जिम्मेदार नहीं होता। मजबूत प्रोडक्ट, सही टीम, ग्राहकों का भरोसा, बेहतर बिजनेस मॉडल और लगातार बढ़ती मांग भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है। निवेश उस विकास को गति देने का काम करता है।
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