रूसी तेल की जगह लेना आसान नहीं, भारत के सामने सप्लाई और लागत की दोहरी चुनौती: केप्लर

केप्लर के अनुसार, भारतीय रिफाइनरी कंपनियों का मुनाफा केवल सस्ते कच्चे तेल पर निर्भर नहीं करता। माल ढुलाई लागत, तेल की गुणवत्ता, प्रसंस्करण क्षमता और तैयार पेट्रोलियम उत्पादों की अंतरराष्ट्रीय कीमतें भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

रूस से कच्चे तेल का आयात अचानक बंद होने से भारतीय तेल रिफाइनरी कंपनियों के सामने आपूर्ति संबंधी चुनौती पैदा हो सकती है। इससे वैकल्पिक स्रोतों से तेल खरीदने की होड़ बढ़ने के साथ माल ढुलाई और खरीद लागत पर दबाव पड़ सकता है। वहीं, वेनेजुएला में कच्चे तेल का उत्पादन बढ़ाने की सीमित गुंजाइश के कारण भारतीय कंपनियों के लिए सस्ता भारी कच्चा तेल हासिल करना मुश्किल हो सकता है। केप्लर ने अपनी रिपोर्ट में ये बातें कही हैं।

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भारत का तेल आयात

कच्चे तेल, प्राकृतिक गैस, कोयला और अन्य जिंसों से जुड़ा डेटा और विश्लेषण उपलब्ध करने वाली कंपनी केप्लर के वरिष्ठ प्रबंधक सुमित रितोलिया के अनुसार, रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद भारत के कच्चे तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी बढ़ी थी। हालांकि, माल ढुलाई की ऊंची लागत के कारण रूस से मिलने वाले तेल का मूल्य लाभ पहले के मुकाबले कम हो गया है। उन्होंने कहा कि इस वजह से भारतीय तेल शोधन कंपनियां पश्चिम एशिया के तेल की ओर अधिक रुख कर रही हैं। वहां से कम दूरी पर माल ढुलाई और प्रतिस्पर्धी लागत के कारण तेल की आपूर्ति एक विकल्प बन रही है।

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