Banking Fraud: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने डिजिटल लेनदेन में ग्राहकों की सुरक्षा और जवाबदेही को मजबूत करने के लिए नए संशोधित दिशानिर्देशों का मसौदा शुक्रवार को जारी किया। इसका मुख्य उद्देश्य डिजिटल बैंकिंग धोखाधड़ी के मामलों में उपभोक्ताओं को बेहतर सुरक्षा देना और उनकी शिकायतों का जल्दी समाधान करना है। आरबीआई ने बताया कि डिजिटल भुगतान और बैंकिंग की दुनिया में हाल के वर्षों में काफी बदलाव आए हैं, इसलिए 2017 में लागू पुराने नियमों की समीक्षा की गई।
आरबीआई ने डिजिटल बैंकिंग धोखाधड़ी में ग्राहकों के लिए मजबूत सुरक्षा उपायों का प्रस्ताव रखा (तस्वीर-istock)
अनधिकृत लेनदेन और धोखाधड़ी मामलों का दायरा बढ़ाया जाएगा
मसौदे में यह प्रस्ताव रखा गया है कि अनधिकृत इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग लेनदेन की परिभाषा को और विस्तृत किया जाए। इसका मतलब है कि अब नई तरह की धोखाधड़ी के मामले भी इस सुरक्षा कवरेज में शामिल होंगे। आरबीआई का कहना है कि इससे ग्राहकों को धोखाधड़ी की अलग-अलग परिस्थितियों में मदद मिलेगी। बैंकिंग और भुगतान क्षेत्र में तेजी से हो रहे बदलावों को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया गया है।
जनता और हितधारकों से सुझाव आमंत्रित
न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक आरबीआई ने कहा है कि मसौदे पर आम जनता और हितधारक 6 अप्रैल, 2026 तक अपनी राय या सुझाव दे सकते हैं। इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि नियम वास्तविक परिस्थितियों और ग्राहकों की जरूरतों के अनुरूप हों। केंद्रीय बैंक का उद्देश्य है कि सभी पक्षों की राय लेकर नियमों को और मजबूत बनाया जाए।
शिकायतों का त्वरित निपटान
नए मसौदे में बैंकों को निर्देश दिया गया है कि वे ग्राहकों की शिकायतों के निपटारे में लगने वाले समय को कम करें। इससे ग्राहक लंबा इंतजार किए बिना अपने मामलों का समाधान पा सकेंगे। आरबीआई का मानना है कि समय पर कार्रवाई करने से उपभोक्ताओं का भरोसा डिजिटल बैंकिंग पर बना रहेगा और धोखाधड़ी के मामलों में शीघ्र राहत मिलेगी।
छोटे मूल्य वाले धोखाधड़ी वाले लेनदेन के लिए मुआवजा
मसौदे में यह भी सुझाव दिया गया है कि छोटे मूल्य वाले धोखाधड़ी वाले लेनदेन के लिए मुआवजा प्रणाली शुरू की जाए। इसका फायदा यह होगा कि प्रभावित ग्राहकों को जल्दी राहत मिले और उन्हें ज्यादा नुकसान न उठाना पड़े। आरबीआई ने कहा कि यह मुआवजा व्यवस्था दिशानिर्देश लागू होने के एक साल तक चलेगी। इस दौरान इसके अनुभवों का अध्ययन किया जाएगा और भविष्य में बैंकों की हिस्सेदारी बढ़ाकर आरबीआई की भूमिका धीरे-धीरे कम करने पर विचार किया जाएगा।
इस कदम से डिजिटल बैंकिंग के उपयोगकर्ताओं को अधिक सुरक्षा और सुविधा मिलेगी। बैंकों और केंद्रीय बैंक दोनों मिलकर यह सुनिश्चित करेंगे कि धोखाधड़ी के मामले जल्द और प्रभावी तरीके से सुलझें। डिजिटल लेनदेन बढ़ रहे हैं और इस तरह के उपाय ग्राहकों का विश्वास बनाए रखने में मदद करेंगे।
