RBI Repo Rate Hike : भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) आने वाले समय में नीतिगत ब्याज दरों यानी रेपो रेट को लेकर एक बार फिर कड़ा कदम उठा सकता है। कोटक महिंद्रा बैंक के संस्थापक और गैर-कार्यकारी निदेशक उदय कोटक ने गुरुवार को एक बड़ा दावा करते हुए कहा है कि आरबीआई मौजूदा ब्याज दर वृद्धि चक्र के दौरान रेपो रेट में 0.50 प्रतिशत से लेकर 0.75 प्रतिशत तक की और बढ़ोतरी कर सकता है। इस अनुमान के बाद वित्तीय बाजार में एक बार फिर ब्याज दरों में संभावित बढ़ोतरी को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
आरबीआई के ब्याज दरों पर बड़े संकेत!
रेपो रेट पर उदय कोटक का बड़ा अनुमान
न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक समूह की ब्रोकिंग इकाई द्वारा जारी किए गए एक विशेष वीडियो संदेश में अपनी बात रखते हुए उदय कोटक ने कहा कि हमने केंद्रीय बैंक की तरफ से पहले ही दरों में बढ़ोतरी का दौर देख लिया है, लेकिन स्थिति को देखते हुए यह सिलसिला यहीं नहीं रुकेगा। उन्होंने स्पष्ट रूप से संकेत दिया कि आने वाले महीनों में आरबीआई की ओर से रेपो रेट में 0.50 से 0.75 प्रतिशत तक की अतिरिक्त वृद्धि देखने को मिल सकती है। जानकारों का मानना है कि यदि महंगाई और वैश्विक आर्थिक हालात ऐसे ही बने रहे, तो केंद्रीय बैंक लिक्विडिटी को नियंत्रित करने के लिए दरों में बढ़ोतरी का यह रुख जारी रख सकता है।
एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) और वैश्विक निवेश का ट्रेंड
कृत्रिम मेधा यानी एआई के बढ़ते दौर और वैश्विक स्तर पर इसके प्रभाव पर चर्चा करते हुए उदय कोटक ने बताया कि पिछले साल भारत को एआई के मामले में निवेश के लिहाज से एक कम आकर्षक बाजार माना जा रहा था। उस दौरान भारतीय कंपनियों के ऊंचे मूल्यांकन और विदेशों में एआई से जुड़े सुनहरे अवसरों के कारण विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजारों से पैसा निकालकर बाहर के बाजारों में निवेश करना बेहतर समझा था। हालांकि, अब हालात बदलते नजर आ रहे हैं। वैश्विक स्तर पर बड़ी कंपनियां अपनी एआई से जुड़ी महत्वाकांक्षाओं और परियोजनाओं को पूरा करने के लिए भारी-भरकम कर्ज ले रही हैं, जिसके कारण कई मामलों में विदेशी कंपनियों और एआई स्टार्टअप्स का मूल्यांकन बहुत ज्यादा बढ़ गया है।
भारत के लिए कैसे पलटेगा निवेश का रुख?
उदय कोटक का मानना है कि अगर वैश्विक निवेशकों को अमेरिका और अन्य पश्चिमी देशों की एआई आधारित कंपनियों का मूल्यांकन अत्यधिक या उनकी वास्तविक क्षमता से ज्यादा लगने लगता है, तो वैश्विक इक्विटी निवेश का यह प्रवाह अचानक उलट सकता है। ऐसी स्थिति में निवेशकों का यह पैसा वापस लौटकर भारत जैसे उभरते हुए और मजबूत बाजारों की ओर रुख कर सकता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत भी अब तेजी से अपनी खुद की एआई क्षमता और तकनीकी बुनियादी ढांचा विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। अगर निवेश का यह रुख बदलता है, तो इसका सीधा और बड़ा फायदा भारतीय अर्थव्यवस्था को मिलने की पूरी उम्मीद है।
विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (FPI) के स्थिर होने की उम्मीद
अन्य प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं और देशों की तुलना में भारत में लिस्टेड कंपनियों का मूल्यांकन अभी भी संतुलित और आकर्षक दायरे में है। इसके अलावा, देश के भीतर आर्थिक विकास (Economic Growth) की मजबूत संभावनाएं विदेशी निवेशकों को लगातार आकर्षित कर रही हैं। उदय कोटक ने यह भी कहा कि वैश्विक स्तर पर एआई सेक्टर में जरूरत से ज्यादा निवेश के कारण जो दबाव या करेक्शन की स्थिति बन रही है, उसके कम होने की पूरी उम्मीद है। इस दबाव के छटते ही भारत में विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (FPI) के आंकड़े और अधिक स्थिर हो जाएंगे, जिससे भारतीय शेयर बाजार और वित्तीय तंत्र को एक नई स्थिरता और मजबूती मिलेगी।
