UPI Tap and Pay Payments : डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने और लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी को आसान बनाने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने एक बड़ा कदम उठाया है। अब अगर आपके फोन में इंटरनेट का रिचार्ज खत्म हो गया है या नेटवर्क नहीं आ रहा है, तब भी आप दुकान पर भुगतान कर सकेंगे। इसके लिए RBI ने 'UPI टैप एंड पे' (UPI Tap and Pay) नाम की एक नई सुविधा की शुरुआत की है। इस फीचर के तहत उपभोक्ता अपने स्मार्टफोन को सिर्फ अनलॉक करके दुकान की POS मशीन पर टैप करेंगे और पेमेंट पूरा हो जाएगा। RBI के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने 10 सितंबर को डिजिटल भुगतान प्रणाली को अधिक सुरक्षित, तेज और सुविधाजनक बनाने के उद्देश्य से दो प्रमुख नई सुविधाओं का ऐलान किया। इनमें पहला 'UPI टैप एंड पे' है और दूसरा AI आधारित ग्राहक सहायता प्लेटफॉर्म 'MyUPI' है। ये दोनों ही बदलाव भारत में कैशलेस लेनदेन के तरीके को और भी सरल बनाने वाले हैं।
अब बिना इंटरनेट और UPI ऐप के भी हो सकेगा पेमेंट, जानिए RBI का नया 'टैप एंड पे' फीचर कैसे काम करेगा (तस्वीर-AI)
कैसे काम करेगा 'UPI टैप एंड पे' फीचर?
'UPI टैप एंड पे' की कार्यप्रणाली काफी हद तक संपर्क रहित डेबिट या क्रेडिट कार्ड (Contactless Card) से भुगतान करने जैसी ही है। अगर आपके पास NFC (नियर फील्ड कम्युनिकेशन) तकनीक वाला स्मार्टफोन है, तो आपको पेमेंट करने के लिए कोई अलग से UPI ऐप खोलने की जरूरत नहीं पड़ेगी। खरीदारी के समय आपको बस अपने फोन को अनलॉक करना होगा और उसे मर्चेंट की NFC-सक्षम POS (पॉइंट ऑफ सेल) मशीन के पास ले जाकर टैप करना होगा। यहां ध्यान देने योग्य बात यह है कि इस पूरी प्रक्रिया में आपके स्मार्टफोन में इंटरनेट डेटा होना जरूरी नहीं है। यह भुगतान POS मशीन के इंटरनेट कनेक्शन और नेटवर्क का उपयोग करके संपन्न होगा। यह सुविधा विभिन्न प्रकार के UPI-लिंक खातों का समर्थन करती है। इसके जरिये यूजर्स अपने बैंक खातों के अलावा UPI से जुड़े RuPay क्रेडिट कार्ड से भी आसानी से भुगतान कर पाएंगे। यह नया फीचर उन परिस्थितियों में बेहद मददगार साबित होगा जहां खराब नेटवर्क की वजह से ऑनलाइन पेमेंट अटक जाते हैं।
बिना PIN डाले कितने रुपये का हो सकेगा भुगतान?
RBI ने छोटे लेनदेन को अधिक त्वरित और निर्बाध बनाने के लिए सीमाएं तय की हैं। अगर आपका भुगतान 5,000 रुपये या उससे कम का है, तो आपको कोई UPI PIN दर्ज करने की जरुरत नहीं होगी। केवल फोन टैप करते ही राशि तुरंत ट्रांसफर हो जाएगी। हालांकि, सुरक्षा के लिहाज से 5,000 रुपये से अधिक की राशि के लेनदेन के लिए उपभोक्ता को POS मशीन में अपना UPI PIN डालना अनिवार्य होगा। इससे धोखाधड़ी की आशंका कम होगी और बड़े भुगतान सुरक्षित रहेंगे। यह सुविधा खास तौर पर पेट्रोल पंप, सुपरमार्केट और रिटेल स्टोर्स पर लगने वाली लंबी कतारों से राहत दिलाएगी।
MyUPI क्या है और यह ग्राहकों को कैसे सुरक्षा देगा?
'टैप एंड पे' के साथ-साथ भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) ने 'MyUPI' नाम का एक AI-संचालित ग्राहक सेवा प्लेटफॉर्म भी लॉन्च किया है। MyUPI को NPCI के 'FiMI स्मॉल लैंग्वेज मॉडल' पर तैयार किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य यूजर्स के सभी UPI लेनदेन, ऑटोपे (AutoPay) जनादेशों और बैंकिंग डिटेल को विभिन्न बैंकों व UPI ऐप्स से एकत्रित करके एक ही स्थान पर उपलब्ध कराना है। यह प्लेटफॉर्म सिर्फ शिकायत दर्ज करने का जरिया नहीं है, बल्कि यह यूजर्स को अपने खातों पर अधिक नियंत्रण और सुरक्षा प्रदान करता है। इसमें कई आधुनिक सुरक्षा तंत्र शामिल किए गए हैं:-
- सेफ्टी स्विच (Safety Switch):- यदि उपभोक्ता को यह अंदेशा होता है कि उसका UPI खाता हैक हो गया है या कोई संदिग्ध गतिविधि हो रही है, तो वह तुरंत सेफ्टी स्विच का उपयोग करके अपने खाते से होने वाले सभी UPI डेबिट लेनदेन को रोक सकता है।
- UPI नंबर डिलिंक (UPI Number Delink):- इसके जरिए यूजर्स जब चाहें अपने मोबाइल नंबर पर आने वाले UPI भुगतानों को रोक सकते हैं।
- पारदर्शिता और चार्जबैक:- MyUPI भुगतान पूरा होने से पहले प्राप्तकर्ता (Beneficiary) की अतिरिक्त जानकारी प्रदान करेगा। साथ ही, पात्र लेनदेन के लिए यह स्वचालित चार्जबैक की सुविधा भी देगा।
- ट्रांजेक्शन रिप्ले (Transaction Replay):- इस विकल्प की मदद से यूजर पुराने किसी भी लेनदेन को याद रखकर उसे किसी भी UPI ऐप के माध्यम से दोबारा तुरंत दोहरा सकते हैं।
डिजिटल इंडिया के लिए क्यों महत्वपूर्ण हैं ये बदलाव?
भारत में डिजिटल लेनदेन की बात करें तो UPI का एकाधिकार जैसा प्रभाव है। NPCI के आंकड़ों के अनुसार, देश के कुल डिजिटल लेनदेन में UPI की हिस्सेदारी 89 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। ऐसे में अब प्राथमिकता सिर्फ पेमेंट करने का विकल्प देना नहीं, बल्कि प्रक्रिया को और अधिक भरोसेमंद और सुरक्षित बनाना है।
NPCI का कहना है कि MyUPI एक 'ट्रस्ट एंड कंट्रोल लेयर' के रूप में काम करेगा। यह चौबीसों घंटे बहुभाषी सहायता प्रदान करेगा, जिससे लोग अपनी भाषा में किसी भी समस्या का समाधान पा सकेंगे। बिना मोबाइल इंटरनेट के पेमेंट की सुविधा और सुरक्षित एआई सपोर्ट भारत के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को एक नए आयाम पर ले जाएगा।
