Bank License Cancelled : भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने कर्नाटक के गोकाक में स्थित श्री महालक्ष्मी अर्बन को-ऑपरेटिव क्रेडिट बैंक (Shri Mahalakshmi Urban Co operative Credit Bank) का बैंकिंग लाइसेंस रद्द कर दिया है। केंद्रीय बैंक ने यह कदम बैंक की लगातार खराब होती वित्तीय स्थिति और नियमों के पालन में कमी को देखते हुए उठाया है। आरबीआई के अनुसार, बैंक के पास पर्याप्त पूंजी नहीं बची है और भविष्य में आय अर्जित करने की संभावनाएं भी बेहद कमजोर हैं। ऐसे में बैंक का संचालन जारी रखना जमाकर्ताओं के हित में नहीं माना गया।
आरबीआई ने कर्नाटक के श्री महालक्ष्मी अर्बन को-ऑपरेटिव क्रेडिट बैंक का लाइसेंस निरस्त किया
बैंकिंग कारोबार पर तत्काल रोक
न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक आरबीआई ने स्पष्ट किया है कि लाइसेंस रद्द होने के बाद बैंक को तत्काल प्रभाव से सभी बैंकिंग गतिविधियां बंद करनी होंगी। इसका मतलब है कि बैंक अब नए जमा स्वीकार नहीं कर सकेगा और न ही ग्राहकों को उनकी जमा राशि वापस कर पाएगा। यह आदेश बृहस्पतिवार से लागू हो गया है। केंद्रीय बैंक ने कहा कि बैंक की मौजूदा वित्तीय हालत ऐसी नहीं है कि वह अपने ग्राहकों के धन की पूरी सुरक्षा सुनिश्चित कर सके।
नियमों का पालन नहीं कर रहा था बैंक
रिजर्व बैंक ने बताया कि श्री महालक्ष्मी अर्बन को-ऑपरेटिव क्रेडिट बैंक बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 के कई महत्वपूर्ण प्रावधानों का पालन नहीं कर रहा था। बैंक के पास पर्याप्त पूंजी नहीं थी और उसकी कमाई की स्थिति भी कमजोर थी। इसके अलावा बैंक की वित्तीय स्थिति लगातार बिगड़ रही थी, जिससे ग्राहकों की जमा राशि पर जोखिम बढ़ता जा रहा था। आरबीआई का मानना है कि यदि बैंक को आगे भी काम करने दिया जाता, तो इससे जमाकर्ताओं के हितों को नुकसान पहुंच सकता था।
परिसमापन की प्रक्रिया शुरू होगी
लाइसेंस रद्द करने के साथ ही आरबीआई ने कर्नाटक के सहकारी समितियों के पंजीयक (रजिस्ट्रार ऑफ को-ऑपरेटिव सोसाइटीज) से बैंक को बंद करने की प्रक्रिया शुरू करने का अनुरोध किया है। साथ ही बैंक के लिए एक परिसमापक (लिक्विडेटर) नियुक्त करने को भी कहा गया है। परिसमापक बैंक की संपत्तियों और देनदारियों का आकलन करेगा तथा नियमानुसार आगे की प्रक्रिया पूरी करेगा।
जमाकर्ताओं के लिए राहत की खबर
हालांकि बैंक का लाइसेंस रद्द होने से ग्राहकों में चिंता बढ़ सकती है, लेकिन आरबीआई ने जमाकर्ताओं को राहत देने वाली जानकारी भी दी है। केंद्रीय बैंक के अनुसार, बैंक के लगभग 97.9 प्रतिशत जमाकर्ताओं को उनकी पूरी जमा राशि वापस मिल जाएगी। यह भुगतान जमा बीमा एवं ऋण गारंटी निगम (डीआईसीजीसी) के माध्यम से किया जाएगा।
डीआईसीजीसी भारत में बैंक जमाओं का बीमा करने वाली संस्था है। इसके तहत प्रत्येक पात्र जमाकर्ता को अधिकतम पांच लाख रुपये तक की जमा राशि की सुरक्षा मिलती है। यदि कोई बैंक वित्तीय संकट में फंस जाता है या उसका लाइसेंस रद्द हो जाता है, तो डीआईसीजीसी बीमा नियमों के तहत जमाकर्ताओं को भुगतान करती है।
ग्राहकों के हितों की सुरक्षा प्राथमिकता
आरबीआई ने कहा कि बैंक की मौजूदा स्थिति में उसका संचालन जारी रखना ग्राहकों और जमाकर्ताओं के हितों के खिलाफ होता। इसलिए यह फैसला जमाकर्ताओं के धन की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। केंद्रीय बैंक लगातार सहकारी बैंकों की वित्तीय स्थिति की निगरानी करता है और जहां आवश्यक हो, वहां समय पर कार्रवाई करता है ताकि बैंकिंग व्यवस्था में लोगों का भरोसा बना रहे।
श्री महालक्ष्मी अर्बन को-ऑपरेटिव क्रेडिट बैंक का लाइसेंस रद्द होना सहकारी बैंकिंग क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। हालांकि अधिकांश जमाकर्ताओं को उनकी जमा राशि वापस मिलने की उम्मीद है, लेकिन यह मामला बैंकिंग संस्थानों में मजबूत वित्तीय प्रबंधन और नियामकीय अनुपालन की आवश्यकता को भी रेखांकित करता है।
