Rajesh Exports Scam : भारतीय शेयर बाजार में लिस्टेड कंपनी राजेश एक्सपोर्ट के शेयर में गुरुवार को कारोबार शुरू होते ही लोअर सर्किट लग गया। असल में कंपनी के प्रमोटर राजेश मेहता पर बाजार नियामक सेबी ने 158 अरब डॉलर करीब 15 लाख करोड़ रुपये के फंड्स की संभावित हेराफेरी का आरोप लगाया है। इसके साथ ही सेबी ने कंपनी के प्रमोटर राजेश मेहता को बाजार में ट्रेडिंग करने से बैन कर दिया है।
कंपनी के प्रमोटर्स ने फंड में की हेराफेरी
बड़ी संस्थागत हिस्सेदारी
राजेश एक्सपोर्ट में LIC जैसे बड़े संस्थागत निवेशक (DII) की 10.80 फीसदी हिस्सेदारी है। इसके अलावा विदेशी संंस्थागत व पोर्टफोलियो निवेशकों की भी करीब 14 फीसदी हिस्सेदारी है। आमतौर पर माना जाता है कि संस्थागत निवेशक जिन कंपनियों में निवेश करते हैं, वे उनकी तह तक जांच करते हैं। ऐसे में कंपनी के प्रमोटर्स पर 158 अरब डॉलर के फंड्स के दुरपयोग पर का आरोप गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
सेबी ने क्या कहा?
SEBI ने राजेश एक्सपोर्ट्स लिमिटेड और उसके प्रमोटर और एग्जीक्यूटिव चेयरमैन राजेश मेहता के खिलाफ SEBI एक्ट और PFUTP रेगुलेशंस के उल्लंघन के मामले में एक अंतरिम ऑर्डर जारी किया है। सेबी के मुताबिक इन्वेस्टर्स को राजेश एक्सपोर्ट्स लिमिटेड के शेयर खरीदने को उकसाने के लिए कंसोलिडेटेड रेवेन्यू, फर्जी स्टैंडअलोन ट्रांजैक्शन, गलत कंसोलिडेशन को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया गया। इसके साथ ही सेबी ने बताया कि मेहता को पर्सनल अकाउंट्स के जरिए फंड के गलत इस्तेमाल से जुड़े उल्लंघन भी किए हैं। इसके अलावा प्रमोटर्स और कंपनी ने जांच और फोरेंसिक ऑडिटर के साथ सहयोग नहीं किया है। इसकी वजह से प्रमोटर को राजेश एक्सपोर्ट्स लिमिटेड के शेयरों में डील करने से रोकने के लिए निर्देश दिए गए हैं।
कंपनी ने क्या कहा?
इस मामले में कंपनी की तरफ से अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। SEBI के आदेश के बाद शेयर में लोअर सर्किट लगा है। इसे लेकर NSE ने भी कंपनी से सफाई मांगी है। NSE ने अपनी वेबसाइट पर कहा है कि एक्सचेंज ने राजेश एक्सपोर्ट्स लिमिटेड से हाल ही में आई खबर 'SEBI के आदेश के बाद राजेश एक्सपोर्ट्स के शेयर 5% गिरने की खबरों पर कंपनी से सफाई मांगी गई है। फिलहाल कंपनी के जवाब का इंतजार है।
सेबी को किस बात से आपत्ति?
SEBI के मुताबिक कंपनी का लगभग 97-99 फीसदी कंसोलिडेटेड रेवेन्यू विदेशी सब्सिडियरी कंपनियों, खासकर वैलकैम्बी SA से आया। हालांकि, वैलकैम्बी के ऑडिटेड स्टैंडअलोन फाइनेंशियल स्टेटमेंट में ग्रुप लेवल पर रिपोर्ट किए गए रेवेन्यू का केवल एक छोटा सा हिस्सा दिखाया गया। SEBI का कहना है कि कंपनी ने केवल रिफाइनिंग या प्रोसेसिंग इनकम के बजाय ग्रॉस गोल्ड ट्रांजैक्शन वैल्यू को पहचाना, बिना पर्याप्त सपोर्टिंग रिकॉर्ड, कस्टमर डिटेल्स, इनवॉइस या अकाउंटिंग जस्टिफिकेशन दिए।
एक साल में 40% गिरा स्टॉक फिर भी LIC ने नहीं घटाई हिस्सेदारी
LIC की इस कंपनी में 10 फीसदी हिस्सेदारी की कीमत करीब 347 करोड़ रुपये है। वहीं, FII की 14% होल्डिंग की कीमत करीब 456 करोड़ रुपये है। पिछले एक साल में राजेश एक्सपोर्ट के शेयर मे करीब 40 फीसदी तक की गिरावट आ चुकी है। लेकिन, इसके बाद भी LIC ने कंपनी में करीब 10 फीसदी की हिस्सेदारी बरकरार रखी है।
पहले से ही जांच के दायरे में शेयर
यह शेयर पहले से नियामकीय जांच के दायरे है। 2023 में NSE ने राजेश एक्सपोर्ट्स से वित्त वर्ष 2023-24 के लिए अपने कैश-फ्लो स्टेटमेंट का खुलासा नहीं करने पर सफाई मांगी थाी। उस समय की मीडिया रिपोर्टों में सामने आया था कि कंपनी ने सितंबर 2023 को समाप्त होने वाली अवधि के लिए तिमाही नतीजों के साथ कैश-फ्लो स्टेटमेंट और ऑडिट रिपोर्ट पेश ही नहीं की थी।
