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Explained: प्रधानमंत्री सामाजिक सहायता योजना क्या है, किसे मिलेगा लाभ, कैसे करें आवेदन?

Pradhan Mantri Samajik Sahayata Yojana Explained: प्रधानमंत्री सामाजिक सहायता योजना के तहत बुजुर्गों, विधवा महिलाओं, दिव्यांगजनों और जरूरतमंद परिवारों को आर्थिक मदद मिलेगी। दिव्यांग पेंशन की पात्रता बढ़ी है और सहायता राशि में भी बढ़ोतरी हुई है।

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बुजुर्गों से दिव्यांगों तक… किसे मिलेगी सरकारी मदद? समझें नई सामाजिक सहायता योजना (तस्वीर-AI)
Authored by: रामानुज सिंह
Updated Oct 24, 2026, 14:54 IST
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Pradhan Mantri Samajik Sahayata Yojana Explained : केंद्र सरकार ने गरीब और जरूरतमंद लोगों को आर्थिक सहायता देने वाली राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (National Social Assistance Programme यानी NSAP) को जारी रखने और उसका नाम बदलकर प्रधानमंत्री सामाजिक सहायता योजना करने की मंजूरी दी है। इसके साथ ही दिव्यांगजनों को मिलने वाली पेंशन के नियमों में भी बदलाव किए गए हैं। इन बदलावों का मकसद ज्यादा जरूरतमंद लोगों को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाना और उन्हें आर्थिक मदद देना है। इस योजना के तहत बुजुर्गों, विधवा महिलाओं, दिव्यांगजनों और ऐसे परिवारों को सहायता दी जाती है, जो परिवार के मुख्य कमाने वाले सदस्य की मौत के कारण आर्थिक संकट का सामना करते हैं। सरकार ने वर्ष 2026 से 2031 तक 5 साल के लिए इस कार्यक्रम के तहत 53,428 करोड़ रुपये का बजट मंजूर किया है। इससे करीब 3.20 करोड़ लाभार्थियों को सहायता देने का लक्ष्य है। आइए समझते हैं कि प्रधानमंत्री सामाजिक सहायता योजना क्या है, किसे इसका लाभ मिल सकता है और दिव्यांग पेंशन में क्या बदलाव हुए हैं।

क्या है प्रधानमंत्री सामाजिक सहायता योजना?

प्रधानमंत्री सामाजिक सहायता योजना की शुरुआत मूल रूप से राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम के नाम से 15 अगस्त 1995 को हुई थी। इसका उद्देश्य गरीबी रेखा से नीचे (BPL) रहने वाले जरूरतमंद परिवारों को आर्थिक सहायता देना है। कई परिवारों के लिए बुढ़ापे में खर्च चलाना, पति की मौत के बाद घर संभालना या दिव्यांगता के कारण होने वाली आर्थिक परेशानियों से निपटना मुश्किल होता है। ऐसे लोगों को आर्थिक सहारा देने के लिए यह कार्यक्रम चलाया जाता है। इस योजना के तहत पात्र लोगों को पेंशन या दूसरी तरह की वित्तीय सहायता दी जाती है। इससे उन्हें भोजन, दवाइयों और रोजमर्रा की जरूरी चीजों पर होने वाले खर्च को पूरा करने में मदद मिल सकती है। योजना का उद्देश्य जरूरतमंद लोगों को आर्थिक रूप से सहारा देना है, ताकि वे पूरी तरह दूसरों पर निर्भर न रहें।

संविधान के किस अनुच्छेद से जुड़ी है योजना?

प्रधानमंत्री सामाजिक सहायता योजना का संबंध भारतीय संविधान के अनुच्छेद 41 से है। यह अनुच्छेद राज्य के नीति-निर्देशक तत्वों (Directive Principles of State Policy) का हिस्सा है। अनुच्छेद 41 के अनुसार, राज्य को अपनी आर्थिक क्षमता और विकास के स्तर को ध्यान में रखते हुए बेरोजगारी, बुढ़ापे, बीमारी और दिव्यांगता जैसी स्थितियों में लोगों को सार्वजनिक सहायता देने की दिशा में काम करना चाहिए। आसान शब्दों में कहें तो इसका उद्देश्य यह है कि आर्थिक या शारीरिक परेशानी के कारण मुश्किल में फंसे लोगों को जरुरत के समय सहायता मिल सके। प्रधानमंत्री सामाजिक सहायता योजना इसी सोच के तहत सामाजिक सुरक्षा प्रदान करती है।

योजना का बजट कितना है और इसे कौन चलाता है?

इस कार्यक्रम को केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय के तहत लागू किया जाता है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, केंद्र सरकार ने वर्ष 2026 से 2031 तक पांच साल के लिए 53,428 करोड़ रुपये के बजट को मंजूरी दी है। इसका लक्ष्य देश के सभी 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में करीब 3.20 करोड़ लाभार्थियों तक सहायता पहुंचाना है। योजना को लागू करने की जिम्मेदारी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की होती है। ग्रामीण इलाकों में ग्राम पंचायतें और शहरी क्षेत्रों में नगर निकाय पात्र लाभार्थियों की पहचान और आवेदन प्रक्रिया में मदद कर सकते हैं। पेंशन की रकम आम तौर पर प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के जरिए लाभार्थियों के बैंक खाते में भेजी जाती है। इससे सरकारी सहायता सीधे खाते में पहुंचती है और भुगतान की प्रक्रिया आसान बनती है।

योजना के तहत किस तरह की सहायता मिलती है?

इस कार्यक्रम में तीन मासिक पेंशन योजनाएं और एकमुश्त पारिवारिक सहायता योजना शामिल हैं। इनका उद्देश्य अलग-अलग परिस्थितियों में जरूरतमंद लोगों की मदद करना है।

  • वृद्धावस्था पेंशन:- इसके तहत पात्र बुजुर्गों को हर महीने आर्थिक सहायता दी जाती है। इससे उन्हें बुढ़ापे में अपनी बुनियादी जरूरतें पूरी करने में मदद मिल सकती है।
  • विधवा पेंशन:- पति की मौत के बाद आर्थिक परेशानी का सामना कर रही पात्र महिलाओं को इस योजना के तहत सहायता दी जाती है। इससे उन्हें घर के जरूरी खर्चों को संभालने में मदद मिल सकती है।
  • दिव्यांगजन पेंशन:- पात्र दिव्यांग व्यक्तियों को हर महीने आर्थिक सहायता दी जाती है। अब इस योजना में दिव्यांगता के प्रतिशत और उम्र से जुड़ी पात्रता की शर्तों में बदलाव किए गए हैं।
  • पारिवारिक लाभ योजना:- परिवार के मुख्य कमाने वाले सदस्य की मौत होने पर पात्र परिवार को एकमुश्त आर्थिक सहायता दी जाती है। इससे परिवार को अचानक पैदा हुए आर्थिक संकट से निपटने में मदद मिल सकती है।

इन सभी योजनाओं के लिए पात्रता की शर्तें अलग-अलग हो सकती हैं। इसलिए आवेदन करने से पहले संबंधित योजना के नियमों की जानकारी लेना जरूरी है।

पेंशन से लेकर दिव्यांगों की मदद तक (तस्वीर - AI)

पेंशन से लेकर दिव्यांगों की मदद तक (तस्वीर - AI)

दिव्यांगजन पेंशन योजना में क्या बदलाव हुए?

दिव्यांगजनों को मिलने वाली पेंशन में बदलाव इस कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। पहले यह योजना इंदिरा गांधी राष्ट्रीय दिव्यांगता पेंशन योजना के नाम से जानी जाती थी। इसकी शुरुआत फरवरी 2009 में हुई थी। पहले इस योजना का लाभ लेने के लिए व्यक्ति का गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले परिवार से होना, कम से कम 18 वर्ष की उम्र का होना और कम से कम 80 प्रतिशत दिव्यांगता होना जरूरी था। अब इन शर्तों में बदलाव किया गया है।

  • दिव्यांगता की सीमा 80 से घटाकर 40 प्रतिशत:- अब कम से कम 40 प्रतिशत दिव्यांगता वाले पात्र लोगों को भी योजना के दायरे में लाने का प्रावधान किया गया है। इससे ऐसे लोगों को भी सहायता पाने का अवसर मिल सकता है, जो पहले 80 प्रतिशत की शर्त पूरी नहीं कर पाते थे।
  • न्यूनतम उम्र की शर्त खत्म:- पहले इस पेंशन के लिए कम से कम 18 वर्ष का होना जरूरी था। अब न्यूनतम उम्र की शर्त हटा दी गई है। इससे अन्य पात्रता शर्तें पूरी करने वाले दिव्यांग बच्चों को भी सहायता मिल सकती है।
  • पेंशन में 25 प्रतिशत की बढ़ोतरी:- दिव्यांगजन पेंशन के तहत केंद्र सरकार की ओर से मिलने वाली मासिक सहायता में 25 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। 80 वर्ष से कम उम्र के पात्र लाभार्थियों के लिए केंद्रीय सहायता 300 रुपये से बढ़ाकर 375 रुपये प्रति माह कर दी गई है। वहीं, 80 वर्ष और उससे अधिक उम्र के पात्र लाभार्थियों के लिए यह राशि 500 रुपये से बढ़ाकर 625 रुपये प्रति माह कर दी गई है।

ध्यान देने वाली बात यह है कि ये केंद्र सरकार की ओर से दी जाने वाली सहायता की रकम हैं। राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त पेंशन मिलने पर लाभार्थियों को कुल राशि इससे अधिक मिल सकती है।

कितने दिव्यांगजनों को मिलेगा लाभ?

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, दिव्यांगजन पेंशन योजना के लाभार्थियों की संख्या 8.33 लाख से बढ़ाकर 27.48 लाख करने का लक्ष्य रखा गया है। इस बदलाव से ज्यादा दिव्यांगजनों को आर्थिक सहायता के दायरे में लाने में मदद मिल सकती है। दिव्यांगता की सीमा कम होने से उन लोगों को भी पात्र बनने का मौका मिल सकता है, जिन्हें पहले निर्धारित सीमा के कारण पेंशन नहीं मिल पाती थी। उम्र की न्यूनतम सीमा हटाने से पात्र दिव्यांग बच्चों को भी सहायता देने का रास्ता खुलता है। हालांकि, लाभ पाने के लिए संबंधित योजना की दूसरी शर्तें पूरी करना और जरूरी प्रमाणपत्र प्रस्तुत करना आवश्यक होगा।

दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 से क्या है संबंध?

दिव्यांगजन पेंशन में किए गए बदलाव दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के अनुरूप हैं। इस कानून का उद्देश्य दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकारों की रक्षा करना और उन्हें समाज में समान अवसर उपलब्ध कराना है। यह दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकारों पर संयुक्त राष्ट्र के कन्वेंशन (UNCRPD) से भी जुड़ा है। इस कानून की धारा 2(r) में निर्धारित दिव्यांगता (benchmark disability) से संबंधित परिभाषा दी गई है। इसके तहत किसी निर्दिष्ट दिव्यांगता का कम से कम 40 प्रतिशत होना और सक्षम प्राधिकारी से उसका प्रमाणित होना महत्वपूर्ण है। पेंशन के नियमों में 40 प्रतिशत की सीमा लागू करने से अधिक दिव्यांगजनों को सामाजिक सुरक्षा देने में मदद मिल सकती है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि दिव्यांगता के कारण आर्थिक कठिनाई झेल रहे पात्र लोगों को जरूरी सहायता मिल सके।

प्रधानमंत्री सामाजिक सहायता योजना के लिए आवेदन कैसे करें?

योजना का लाभ लेने के इच्छुक लोग अपने राज्य या केंद्र शासित प्रदेश में संबंधित पेंशन योजना की आवेदन प्रक्रिया के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। इसके लिए ग्राम पंचायत, नगर निकाय, संबंधित सरकारी कार्यालय या राज्य के आधिकारिक पोर्टल से संपर्क किया जा सकता है। आवेदन के दौरान आम तौर पर पहचान पत्र, बैंक खाते की जानकारी, गरीबी रेखा से नीचे होने से जुड़े दस्तावेज और संबंधित योजना के अनुसार दूसरे प्रमाण मांगे जा सकते हैं। दिव्यांगजन पेंशन के लिए सक्षम प्राधिकारी की ओर से जारी दिव्यांगता प्रमाणपत्र भी जरूरी हो सकता है। हालांकि, जरूरी दस्तावेजों और आवेदन की प्रक्रिया के नियम राज्य तथा संबंधित योजना के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं। इसलिए आवेदन करने से पहले स्थानीय सरकारी कार्यालय या आधिकारिक पोर्टल से पात्रता की पुष्टि कर लेना बेहतर है। आवेदन जमा होने के बाद संबंधित विभाग दस्तावेजों और पात्रता की जांच करता है। पात्र पाए जाने पर नियमानुसार सहायता दी जाती है। आवेदन की स्थिति और पेंशन भुगतान से जुड़ी जानकारी संबंधित विभाग से प्राप्त की जा सकती है।

जरूरतमंद परिवारों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है योजना?

प्रधानमंत्री सामाजिक सहायता योजना का उद्देश्य उन लोगों को आर्थिक सुरक्षा देना है, जिनके लिए अपनी बुनियादी जरूरतें पूरी करना मुश्किल हो सकता है। बुजुर्गों, विधवा महिलाओं, दिव्यांगजनों और परिवार के मुख्य कमाने वाले सदस्य को खो चुके परिवारों के लिए सरकारी सहायता महत्वपूर्ण सहारा बन सकती है। दिव्यांगजन पेंशन में किए गए बदलावों से पात्रता का दायरा बढ़ाने, बच्चों को सहायता उपलब्ध कराने और केंद्रीय पेंशन राशि बढ़ाने का प्रयास किया गया है। इससे अधिक लोगों को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाने में मदद मिल सकती है। कुल मिलाकर, यह कार्यक्रम आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को सहायता देने और उन्हें कठिन परिस्थितियों में सहारा प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण है। हालांकि, वास्तविक लाभ पाने के लिए संबंधित योजना की पात्रता, आवेदन प्रक्रिया और राज्य सरकार की ओर से दी जाने वाली अतिरिक्त सहायता की जानकारी जरूर लेनी चाहिए।

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