Power of Attorney Vs Sale Deed : प्रॉपर्टी को खरीदने और बेचने पर लगने वाले भारी भरकम टैक्स और रजिस्ट्री व दूसरी फीस के चलते कई बार लोग प्रॉपर्टी को ट्रांसफर करने की जगह पावर ऑफ अटॉर्नी के जरिये संपत्ति को खरीद लेते हैं। लेकिन, बड़ा सवाल यह है कि क्या प्रॉपर्टी खरीदने का यह तरीका वैध है और इससे भी ज्यादा जरूरी यह कितना सेफ है?
वैध सेल डीड के बिना नहीं मिलता मालिकाना हक
कानून के जानकारों का कहना है कि प्रॉपर्टी खरीदने के लिए सिर्फ पावर ऑफ अटॉर्नी (POA) होना पर्याप्त नहीं है। भले ही खरीदार ने पूरी रकम चुका दी हो और मकान पर कब्जा भी ले लिया हो, लेकिन इससे वह अपने आप कानूनी मालिक नहीं बन जाता। प्रॉपर्टी का मालिकाना हक ट्रांसफर करने के लिए वैध रजिस्टर्ड सेल डीड (Sale Deed) जरूरी होती है।
POA और Sale Deed में क्या है अंतर?
पावर ऑफ अटॉर्नी एक ऐसा दस्तावेज है, जिसके जरिए प्रॉपर्टी का मालिक किसी दूसरे व्यक्ति को अपनी ओर से काम करने का अधिकार देता है। इसमें प्रॉपर्टी मैनेज करना, किराया वसूलना या प्रॉपर्टी बेचना जैसे अधिकार शामिल हो सकते हैं। इसके उलट, रजिस्टर्ड सेल डीड वह दस्तावेज है, जो विक्रेता से खरीदार को मालिकाना हक ट्रांसफर करता है। यानी POA असली मालिक की जगह प्रॉपर्टी को मैनेज करने का अधिकार देता है, मालिकाना हक नहीं देता।
सुप्रीम कोर्ट ने भी किया साफ
इस तरह के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने भी साफ किया है कि किसी संपत्ति का पावर ऑफ अटॉर्नी होना उस संपत्ति का मालिकाना हक नहीं देता है।Suraj Lamp & Industries Pvt. Ltd. v. State of Haryana के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया था कि केवल POA, Agreement to Sell या Will के आधार पर प्रॉपर्टी का मालिकाना हक अपने आप ट्रांसफर नहीं होता।
रकम चुकाने के बाद भी नहीं मालिक नहीं?
नियम यह साफ कहते हैं कि भले ही किसी व्यक्ति ने एक संपत्ति के लिए कीमत चुका दी और उसका कब्जा भी ले लिया। लेकिन, उसके नाम पर रजिस्टर्ड सेल डीड नहीं है, तो उसे संपत्ति का कानूनी मालिक नहीं माना जा सकता है। हालांकि, ऐसी स्थिति में खरीदार के पास कुछ कॉन्ट्रैक्चुअल या कब्जे से जुड़े अधिकार हो सकते हैं, लेकिन इन्हें मालिकाना हक नहीं माना जा सकता।
POA के आधार पर प्रॉपर्टी खरीदने में क्या हैं खतरे?
अगर प्रॉपर्टी केवल POA के आधार पर खरीदी गई है, तो भविष्य में मूल मालिक के कानूनी वारिस दावा कर सकते हैं। प्रॉपर्टी किसी दूसरे व्यक्ति को बेचे जाने पर भी विवाद पैदा हो सकता है। इसके अलावा, साफ मालिकाना हक के दस्तावेज न होने पर बैंक लोन देने से हिचक सकते हैं। प्रॉपर्टी को दोबारा बेचना, गिरवी रखना या विरासत में देना भी मुश्किल हो सकता है।
प्रॉपर्टी खरीदने से पहले किन दस्तावेजों की जांच करें?
पावर ऑफ अटॉर्नी के जरिये प्रॉपर्टी खरीदने से यह जांच जरूर करें कि पावर ऑफ अटॉर्नी असली और वैध है या नहीं। इसके अलावा प्रॉपर्टी का वास्तविक मालिक कौन है और उसके पास संपत्ति के वैध टाटाइल डॉक्यूमेंट हैं या नहीं हैं। पावर ऑफ अटॉर्नी में प्रॉपर्टी बेचने और सेल डीड रजिस्टर्ड कराने का स्पष्ट अधिकार दिया गया है या नहीं। कहीं, पावर ऑफ अटॉर्नी को रद्द तो नहीं कर दिया गया है।
Section 53A से क्या मिलती है सुरक्षा?
Transfer of Property Act, 1882 के Section 53A के तहत कुछ परिस्थितियों में वैध लिखित अनुबंध के आंशिक पालन और कब्जे से संबंधित सीमित सुरक्षा मिल सकती है। हालांकि, यह सुरक्षा अपने आप मालिकाना हक नहीं देती और न ही सेल डीड की जगह लेती है।
