PoP Rules : पेंशन फंड नियामक और विकास प्राधिकरण (PFRDA) ने नेशनल पेन्शन सिस्टम (NPS) में पॉइंट्स ऑफ प्रेजेंस (PoP) से जुड़े नियमों में बड़े बदलावों का प्रस्ताव रखा है। PoP वे संस्थाएं होती हैं जो आम जनता को NPS में शामिल करने और उनकी पेंशन से जुड़ी सेवाएं देने का काम करती हैं। PFRDA के इन नए प्रस्तावों का मुख्य उद्देश्य देश के दूर-दराज और ग्रामीण इलाकों तक पेंशन सेवाओं की पहुंच बढ़ाना, नई संस्थाओं को जोड़ना और ग्राहकों (सब्सक्राइबर्स) के लिए खाता खोलने तथा समस्याओं के समाधान की प्रक्रिया को बहुत आसान बनाना है। नियामक ने इस पूरे ड्राफ्ट पर आम जनता और एक्सपर्ट्स से 2 अक्टूबर 2026 तक सुझाव और राय मांगी है।
पेंशन सेक्टर में बड़ा धमाका! PFRDA बदलेगा NPS के नियम
दो नए तरीकों से मिलेंगी NPS सेवाएं
PFRDA ने सेवाओं को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए PoP वितरण को दो प्रमुख श्रेणियों, फिजिकल और डिजिटल मोड में बांटने का सुझाव दिया है। जो संस्थाएं डिजिटल मोड का चयन करेंगी, वे ग्राहकों को केवल ऑनलाइन या डिजिटल माध्यम से ही ऑनबोर्ड करेंगी और सेवाएं देंगी। इससे घर बैठे NPS खाता खोलना और संचालित करना काफी सुविधाजनक हो जाएगा।
अधिक संस्थाओं को मिलेगी PoP बनने की छूट
फिलहाल केवल बैंक, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां (NBFCs) या रजिस्टर्ड कंपनियां ही PoP बन सकती थीं। नए प्रस्ताव में इस दायरे को बढ़ाकर अन्य कानूनी संस्थाओं जैसे लिमिटेड लायबिलिटी पार्टनरशिप (LLP), सोसायटियों, ट्रस्टों और सहकारिता समितियों को भी शामिल करने की योजना है। इससे ज्यादा से ज्यादा वित्तीय संस्थाएं पेंशन सेवाओं से जुड़ सकेंगी।
आवेदन प्रक्रिया और फीस में बदलाव
फिजिकल और डिजिटल माध्यमों के लिए आवेदन प्रक्रिया को पूरी तरह अलग किया जाएगा। फिजिकल मोड के लिए आवेदन शुल्क 10,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये करने का प्रस्ताव है, जबकि डिजिटल मोड में पंजीकरण को बढ़ावा देने के लिए आवेदन शुल्क शून्य (मुफ्त) रखा गया है। साथ ही आवेदनों के जल्द निपटारे के लिए निश्चित समय-सीमा भी तय की जाएगी।
पात्रता नियमों का नया ढांचा
शाखाओं और वित्तीय स्थिति के आधार पर योग्यता नियमों को सुधारा गया है। अगर कोई संस्था फिजिकल मोड में सेवाएं देना चाहती है, तो उसके पास न्यूनतम 5 शाखाएं या कार्यालय होने अनिवार्य होंगे। इसके अलावा तकनीकी और वित्तीय मापदंडों का पालन करना होगा ताकि ग्राहकों का अनुभव बेहतर रहे।
रिन्यूअल की जगह अब लगेगा सालाना शुल्क
मौजूदा व्यवस्था में PoP को हर 5 साल में अपने पंजीकरण का नवीनीकरण (रिन्यूअल) कराना पड़ता था। अब इस 5 साल वाली व्यवस्था को समाप्त करके सालाना शुल्क का नियम बनाने का प्रस्ताव है। नए नियम के तहत, PoPs द्वारा कमाई गई फीस का 1% या न्यूनतम 3,000 रुपये सालाना शुल्क के रूप में देना होगा।
छूट के नियमों में ढील
प्रस्तावित संशोधनों में उन शर्तों का दायरा भी बढ़ाया गया है, जिनके तहत कुछ संस्थाओं को नियमों में छूट दी जाती है। अब केवल सामान्य नियमों में ही नहीं, बल्कि शाखाओं की न्यूनतम संख्या और नेटवर्थ (कुल संपत्ति) से जुड़ी शर्तों में भी पात्र संस्थाओं को छूट दी जा सकेगी।
डिजिटल भुगतान के लिए अलग खाता
ग्राहकों के पैसे की पूरी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए डिजिटल मोड से सेवा देने वाले PoPs को हर पेंशन स्कीम के लिए एक अलग 'डिजिटल कलेक्शन अकाउंट' खोलना होगा। इससे ग्राहकों द्वारा जमा किया गया पैसा सीधा और सुरक्षित रूप से पेंशन स्कीम तक पहुंचेगा।
'पेंशन एजेंट' अब कहलाएंगे 'NPS मित्र'
PFRDA ने पेंशन एजेंटों के नाम में बदलाव का प्रस्ताव रखा है। अब इन्हें 'पेन्शन एजेंट' के बजाय 'NPS मित्र' के नाम से जाना जाएगा। इसके अलावा NPS मित्रों को नियुक्त करने के लिए कंपनियों को बोर्ड से मंजूरी लेने के बजाय अपने स्तर पर एक आंतरिक नीति बनानी होगी।
जरूरी बदलावों की रिपोर्ट 7 दिनों में देना अनिवार्य
अगर किसी PoP की जानकारी, मालिकाना हक या कामकाज में कोई ऐसा बड़ा बदलाव होता है जिससे उसके रजिस्ट्रेशन पर असर पड़ सकता है, तो उसे 7 दिनों के भीतर PFRDA को इसकी सूचना देनी होगी। इससे नियामक की निगरानी मजबूत होगी।
जांच और ऑडिट फीस प्रक्रिया का सरलीकरण
निरीक्षण और ऑडिट शुल्क से जुड़े नियमों को आसान बनाने का सुझाव दिया गया है। फीस का तरीका और भुगतान प्रक्रिया क्या होगी, इसे अब कड़े नियमों में बांधने के बजाय सर्कुलर या दिशानिर्देशों के जरिए समय-समय पर आसानी से जारी किया जाएगा।
