Partner के साथ मिलकर घर खरीदने की तैयारी, रजिस्ट्री से पहले समझ लें किसका कितना होगा हक?

को-ओनरशिप में प्रॉपर्टी खरीदने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि आसानी से बड़ी रकम का होम लोन मिल जाता है। लेकिन इस सुविधा के पीछे कानूनी और आर्थिक पेचीदगियों का एक जाल भी होता है।

घर की कीमतें तेजी से बढ़ी है। इसके चलते अब लोग ज्वाइंट होम लोन लेकर घर खरीद रहे हैं। ज्वाइंट होम लोन में लोन की रकम बढ़ जाती है क्योंकि बैंक दोनों की कमाई के आधार पर लोन देते हैं। अगर आप भी ज्वाइंट होम लोन पर घर खरीदने की योजना बना रहे हैं तो आपके लिए को-ओनरशिप का नियम समझना बहुत ही जरूरी है। को-ओनरशिप (साझा मालिकाना हक) का सीधा सा मतलब है कि दो या दो से ज्यादा लोगों का कानूनी तौर पर एक ही अचल संपत्ति (इमूवेबल प्रॉपर्टी) का मालिक होना, चाहे बराबर हिस्से में हो या तय हिस्सों में।

Co-ownership property

जॉइंट होम ओनरशिप

को-ओनरशिप में इन शर्तें को नजरअंदाज नहीं करें

अगर आप ज्वाइंट में प्रॉपर्टी खरीद रहे हैं तो सबसे जरूरी चीज होती है डॉक्यूमेंटेशन। प्रॉपर्टी के पेपर में मालिकाना हक का प्रतिशत, आर्थिक योगदान और अलग होने के बाद लोन की देनदारियों जैसी अहम बातें साफ-साफ लिखी होनी चाहिए। एक्जिट (बाहर निकलने) और बायआउट (हिस्सा खरीदने) की शर्तें भी उतनी ही जरूरी हैं। अगर आप बाहर निकलना चाहते हैं और दूसरे व्यक्ति का हिस्सा खरीदना चाहते हैं, तो इन शर्तों को उस दस्तावेज़ में शामिल करना बहुत जरूरी है।

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