घर की कीमतें तेजी से बढ़ी है। इसके चलते अब लोग ज्वाइंट होम लोन लेकर घर खरीद रहे हैं। ज्वाइंट होम लोन में लोन की रकम बढ़ जाती है क्योंकि बैंक दोनों की कमाई के आधार पर लोन देते हैं। अगर आप भी ज्वाइंट होम लोन पर घर खरीदने की योजना बना रहे हैं तो आपके लिए को-ओनरशिप का नियम समझना बहुत ही जरूरी है। को-ओनरशिप (साझा मालिकाना हक) का सीधा सा मतलब है कि दो या दो से ज्यादा लोगों का कानूनी तौर पर एक ही अचल संपत्ति (इमूवेबल प्रॉपर्टी) का मालिक होना, चाहे बराबर हिस्से में हो या तय हिस्सों में।
जॉइंट होम ओनरशिप
को-ओनरशिप में इन शर्तें को नजरअंदाज नहीं करें
अगर आप ज्वाइंट में प्रॉपर्टी खरीद रहे हैं तो सबसे जरूरी चीज होती है डॉक्यूमेंटेशन। प्रॉपर्टी के पेपर में मालिकाना हक का प्रतिशत, आर्थिक योगदान और अलग होने के बाद लोन की देनदारियों जैसी अहम बातें साफ-साफ लिखी होनी चाहिए। एक्जिट (बाहर निकलने) और बायआउट (हिस्सा खरीदने) की शर्तें भी उतनी ही जरूरी हैं। अगर आप बाहर निकलना चाहते हैं और दूसरे व्यक्ति का हिस्सा खरीदना चाहते हैं, तो इन शर्तों को उस दस्तावेज़ में शामिल करना बहुत जरूरी है।
प्रॉपर्टी का वारिस कौन होता है?
को-ओनरशिप (साझा मालिकाना हक) को लेकर सबसे बड़ी गलतफहमियों में से एक है विरासत का मामला। जानकारों का कहना है कि भले ही दो लोग मिलकर घर के मालिक हों, लेकिन मरने वाले को-ओनर का हिस्सा कानूनी वारिसों को जा सकता है, न कि जीवित को-ओनर को जब तक कि एग्रीमेंट में कोई खास 'सर्वाइवरशिप क्लॉज' (जीवित रहने वाले को अधिकार मिलने की शर्त) शामिल न हो।
क्या प्रॉपर्टी बेचने के लिए मजबूर कर सकते हैं?
प्रॉपर्टी बेचने को लेकर असहमति सबसे आम विवादों में से एक है। कानूनी तौर पर, एक को-ओनर दूसरे को पूरी प्रॉपर्टी बेचने के लिए मजबूर नहीं कर सकता। कोई एक व्यक्ति 'ट्रांसफर ऑफ प्रॉपर्टी एक्ट, 1882' के प्रावधानों के तहत अपना हिस्सा बेच या गिरवी रख सकता है। अगर विवाद बढ़ जाते हैं, तो कानूनी रास्ता ही बचता है। एक को-ओनर कोर्ट जा सकता है और 'कोड ऑफ सिविल प्रोसीजर, 1908' के तहत बंटवारे का केस (पार्टीशन सूट) दायर कर सकता है, जिससे आखिरकार प्रॉपर्टी का बंटवारा या बिक्री हो सकती है।
सबसे ज्यादा होने वाले विवाद
भारत में को-ओनरशिप से जुड़े विवाद अक्सर एक जैसे ही होते हैं: बिक्री पर असहमति, पैसे का असमान योगदान, किराए से होने वाली कमाई का बंटवारा और यहां तक कि साझा जगह पर गैर-कानूनी कब्जा। ओनरशिप के बंटवारे से लेकर विरासत तक, एग्जिट क्लॉज़ से लेकर विवाद सुलझाने तक, ये सभी बातें खरीदारों की उम्मीद से कहीं ज्यादा अहम होती हैं। क्योंकि प्रॉपर्टी के मामले में, जैसा कि इस जानकारी से साफ होता है, जो बात आज लिखित रूप में दर्ज नहीं होती, वही अक्सर भविष्य में विवाद की वजह बन जाती है।
