पैसों की है जरूरत? जानिए ओवरड्राफ्ट और पर्सनल लोन में अंतर और आपके लिए कौन सा है बेस्ट

कई बार लोग पर्सनल लोन और ओवरड्राफ्ट को एक ही चीज मान लेते हैं, लेकिन ऐसा बिलकुल नहीं है। दोनों के काम करने का तरीका और शर्तें एक-दूसरे से काफी अलग हैं। आइए इन दोनों के बीच के इस बड़े फर्क को समझते हैं...

हर किसी की जिंदगी में अचानक ऐसे मौके आ जाते हैं जब पैसों की सख्त जरूरत पड़ जाती है। ऐसे समय में हमारा पूरा बजट बिगड़ जाता है और मजबूरी में कर्ज या लोन का सहारा लेना पड़ता है। आज के समय में बैंकों के पास मदद के लिए कई तरह के लोन मौजूद हैं, जिन्हें आप अपनी जरूरत और सुविधा के हिसाब से चुन सकते हैं। जब तुरंत पैसों का इंतजाम करना हो, तो इस मामले में 'पर्सनल लोन' (Personal Loan) और 'ओवरड्राफ्ट' (Overdraft) के विकल्प लोगों के बीच सबसे ज्यादा पसंद किए जाते हैं। मान लीजिए आपने ₹5 लाख का पर्सनल लोन लिया, तो अगले ही दिन से आपको उस पूरे ₹5 लाख पर तय ब्याज देना होगा, भले ही आपने उसमें से ₹1 भी खर्च न किया हो।

Personal Loan Vs Overdraft

इसके उलट, ओवरड्राफ्ट (OD) एक क्रेडिट लिमिट की तरह काम करता है, जो आपके मौजूदा बैंक खाते (Current या Savings Account) पर मिलती है। मान लीजिए बैंक ने आपको ₹5 लाख की ओवरड्राफ्ट लिमिट दी है, तो इसका मतलब यह नहीं है कि आपके सिर पर कर्ज चढ़ गया। आप जब और जितनी रकम इस लिमिट से बाहर निकालेंगे, ब्याज सिर्फ उतने ही पैसों पर और केवल उतने ही दिनों के लिए लगेगा जितने दिन वह पैसा खाते से बाहर रहेगा। अगर आपने ₹5 लाख की लिमिट में से सिर्फ ₹50,000 निकाले हैं, तो ब्याज बाकी के ₹4.5 लाख पर नहीं, बल्कि सिर्फ उसी ₹50,000 पर लगेगा।

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