अगर आप हर महीने छोटी रकम निवेश करके लंबे समय में बड़ा फंड तैयार करना चाहते हैं, तो SIP (Systematic Investment Plan) एक विकल्प हो सकता है। इसमें निवेशक हर महीने एक तय रकम म्यूचुअल फंड में लगाता है। समय के साथ कंपाउंडिंग का फायदा मिलने से छोटी-छोटी रकम भी बड़ा कॉर्पस बना सकती है। हाल ही में सामने आए आंकड़ों के अनुसार, एक इक्विटी म्यूचुअल फंड ने 10 साल की SIP अवधि में 25 प्रतिशत से ज्यादा रिटर्न दिया है।
1000 रुपये की मंथली एसआईपी (Photo: iStock)
किस म्यूचुअल फंड ने दिया कितना रिटर्न
Value Research के आंकड़ों के मुताबिक, 25 सितंबर 2026 तक Direct Plans के आधार पर Quant Small Cap Fund ने 10 साल की SIP अवधि में 25.64 प्रतिशत रिटर्न दिया। इसके बाद Nippon India Small Cap Fund का 22.12 प्रतिशत , Invesco India Mid Cap Fund का 21.28 प्रतिशत , Quant ELSS Tax Saver Fund का 21.21 प्रतिशत और Union Small Cap Fund का 20.78 प्रतिशत 10 साल का SIP रिटर्न रहा। इन आंकड़ों में Small Cap और Mid Cap कैटेगरी के फंड प्रमुख रूप से नजर आते हैं।
| म्यूचुअल फंड | 10 साल का SIP रिटर्न |
|---|---|
| Quant Small Cap Fund | 25.64% |
| Nippon India Small Cap Fund | 22.12% |
| Invesco India Mid Cap Fund | 21.28% |
| Quant ELSS Tax Saver Fund | 21.21% |
| Union Small Cap Fund | 20.78% |
1 हजार की एसआईपी कितना बड़ा फंड बनाती
अब अगर 1,000 की मासिक SIP का उदाहरण लें, तो 10 साल में निवेशक कुल 120 किस्तें जमा करता है। यानी इस दौरान उसकी कुल निवेश राशि 1.20 लाख होगी। Quant Small Cap Fund के बताए गए 25.64 प्रतिशत 10 साल के SIP रिटर्न के आधार पर यह रकम करीब 4.67 लाख हो गई होती। इसमें 1.20 लाख निवेश की गई मूल राशि है, जबकि करीब 3.47 लाख का हिस्सा रिटर्न या लाभ होता। इस तरह निवेश की गई रकम करीब चार गुना के स्तर तक पहुंच जाती।
SIP से मिलने वाला रिटर्न पहले से तय नहीं होता
हालांकि, यहां यह समझना जरूरी है कि SIP में मिलने वाला रिटर्न पहले से तय नहीं होता। म्यूचुअल फंड का प्रदर्शन बाजार की चाल, फंड के पोर्टफोलियो और निवेश की अवधि पर निर्भर करता है। हर महीने निवेश करने से अलग-अलग समय पर अलग NAV पर यूनिट खरीदी जाती हैं, इसलिए वास्तविक रिटर्न बाजार की गतिविधियों के अनुसार बदल सकता है।
रिटर्न देखकर न लें निवेश का फैसला
सिर्फ पिछले रिटर्न को देखकर किसी म्यूचुअल फंड में निवेश का फैसला नहीं करना चाहिए। फंड की निवेश रणनीति, पोर्टफोलियो, जोखिम, प्रदर्शन की निरंतरता और अपने वित्तीय लक्ष्य व निवेश अवधि को भी ध्यान में रखना जरूरी है। खासतौर पर Small Cap और Mid Cap फंड में बाजार उतार-चढ़ाव का असर ज्यादा हो सकता है। इसलिए निवेश से पहले फंड की पूरी जानकारी समझना जरूरी है।
