मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध और भारी तनाव के बीच वैश्विक तेल बाजार से एक राहत भरी खबर आई है। पिछले कुछ दिनों से लगातार बढ़ रही कच्चे तेल की कीमतों पर अचानक ब्रेक लग गया है। शुक्रवार को एशियाई बाजारों के खुलते ही कच्चे तेल (Crude Oil) के दामों में 2 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई। यह गिरावट उन निवेशकों और देशों के लिए बड़ी राहत है, जो तेल की आसमान छूती कीमतों के कारण महंगाई बढ़ने की आशंका से डरे हुए थे।
80 डॉलर के नीचे आई कीमतें
बाजार के आंकड़ों पर नजर डालें तो अमेरिकी बेंचमार्क वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) में 2.09 प्रतिशत की बड़ी कमी आई है, जिससे इसकी कीमत गिरकर 79.32 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई है। गौरतलब है कि गुरुवार को इसी तेल की कीमत में 8.5 प्रतिशत का जबरदस्त उछाल देखा गया था और यह 81.01 डॉलर के स्तर तक पहुंच गया था। वहीं, ब्रेंट नॉर्थ सी क्रूड (Brent Crude), जो गुरुवार को 4.9 प्रतिशत बढ़ा था, एशियाई कारोबार के शुरुआती घंटों में अभी स्थिर बना हुआ है।
विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले कुछ दिनों में हुई 'ओवरबाइंग' (जरूरत से ज्यादा खरीदारी) के बाद अब मार्केट थोड़ा ठंडा पड़ रहा है। हालांकि मिडिल ईस्ट का संघर्ष अभी खत्म नहीं हुआ है, लेकिन सप्लाई चेन के पूरी तरह बाधित न होने की उम्मीद ने कीमतों को नीचे धकेला है। तेल की कीमतों में आई यह कमी भारत जैसे बड़े तेल आयातक देशों के लिए काफी अहम है। यदि कच्चे तेल के दाम इसी तरह 80 डॉलर के नीचे बने रहते हैं, तो आने वाले समय में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में स्थिरता आ सकती है।
