भारतीय निवेशकों के लिए अब अमेरिकी शेयर बाजार में निवेश करना पहले से कहीं आसान हो गया है। NSE International Exchange ने GIFT City से ‘Global Access’ प्लेटफॉर्म लॉन्च किया है, जिसके जरिए रिटेल निवेशक सीधे अमेरिकी लिस्टेड कंपनियों में ट्रेड कर सकेंगे। पहले चरण में US बाजार को लाइव कर दिया गया है और अगले तीन से छह महीनों में 30 से ज्यादा वैश्विक बाजारों तक पहुंच देने की योजना है।
NSE ने लॉन्च किया नया इंडेक्स (इमेज क्रेडिट NSE)
LRS फ्रेमवर्क के तहत निवेश
यह पूरी व्यवस्था Reserve Bank of India के Liberalised Remittance Scheme के तहत संचालित होगी। LRS नियमों के अनुसार, कोई भी भारतीय निवासी एक वित्त वर्ष में अधिकतम 2,50,000 अमेरिकी डॉलर तक विदेश में निवेश कर सकता है। प्लेटफॉर्म को इस तरह डिजाइन किया गया है कि ऑनबोर्डिंग से लेकर ट्रेडिंग तक पूरी प्रक्रिया नियामकीय ढांचे के अनुरूप रहे।
Apple और Google जैसे शेयरों में फ्रैक्शनल खरीद
इस प्लेटफॉर्म की अहम खासियत फ्रैक्शनल इनवेस्टिंग है। निवेशक Apple Inc. या Alphabet Inc. जैसे महंगे अमेरिकी शेयरों का पूरा एक शेयर खरीदने के बजाय छोटे हिस्से में निवेश कर सकेंगे। उदाहरण के तौर पर यदि किसी शेयर की कीमत 200 या 300 डॉलर है, तो निवेशक 5 या 10 डॉलर के हिस्से में भी निवेश कर सकता है। इससे छोटे टिकट साइज वाले निवेशकों के लिए वैश्विक टेक कंपनियों में एंट्री आसान होगी।
डॉलर में होगा पूरा लेनदेन
इस प्लेटफॉर्म पर सभी निवेश अमेरिकी डॉलर में डिनॉमिनेटेड होंगे। भारत से भेजी गई राशि पहले विदेशी रेमिटेंस के जरिए डॉलर में बदली जाएगी और फिर उसी आधार पर ट्रेडिंग लिमिट तय होगी। डिजिटल KYC की प्रक्रिया आधार, PAN और DigiLocker के जरिए कुछ ही मिनटों में पूरी की जा सकेगी। फंड GIFT City स्थित निर्दिष्ट बैंक खाते में पहुंचते ही निवेशक को ट्रेडिंग पावर मिल जाएगी।
सिर्फ इक्विटी और ETF की अनुमति
फिलहाल प्लेटफॉर्म पर केवल इक्विटी और ETF में निवेश की सुविधा होगी। डेरिवेटिव्स, क्रिप्टो या डिजिटल एसेट्स को शामिल नहीं किया गया है, क्योंकि LRS फ्रेमवर्क के तहत इन उत्पादों की अनुमति नहीं है।
रणनीतिक विस्तार की दिशा में कदम
NSE International Exchange के प्रबंधन के अनुसार, यह पहल भारत को इनबाउंड और आउटबाउंड निवेश के लिए एक वैश्विक फाइनेंशियल गेटवे बनाने की रणनीति का हिस्सा है। GIFT City के जरिये भारतीय निवेशकों को घरेलू बाजार से बाहर निकलकर पोर्टफोलियो डाइवर्सिफिकेशन का नया विकल्प मिलेगा, वह भी नियामकीय निगरानी और पारदर्शी ढांचे के भीतर।
