भारतीय शेयर बाजार के इतिहास में एक नया पन्ना दर्ज होने जा रहा है। देश के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) ने आखिरकार बाजार नियामक सेबी (SEBI) के पास अपना ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रोस्पेक्टस (DRHP) दाखिल कर दिया है। पिछले करीब एक दशक से निवेशक और बाजार के जानकार इस आईपीओ (IPO) का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। बाजार के अनुमानों के मुताबिक, इस मेगा पब्लिक इश्यू का साइज लगभग 30,000 करोड़ होने की उम्मीद है। अगर ऐसा होता है, तो यह हुंडई मोटर इंडिया (Hyundai Motor India) के 27,859 करोड़ के आईपीओ के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ते हुए भारत के इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ बन जाएगा। इस महा-इश्यू के आते ही प्राइमरी मार्केट में हलचल तेज हो गई है। आइए पैसे लगाने से पहले आपको बताते हैं इस आईपीओ की 10 बड़ी बातें।
1. देश का सबसे बड़ा पब्लिक इश्यू (Biggest IPO in India)
मार्केट रिपोर्ट्स और ड्राफ्ट पेपर्स के अनुसार, एनएसई का यह आईपीओ ₹30,000 करोड़ का होने का अनुमान है। यह भारत के पूंजी बाजार (Capital Market) के इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा सार्वजनिक निर्गम होगा, जो एलआईसी (LIC) और हुंडई (Hyundai) जैसी दिग्गज कंपनियों के पिछले सभी रिकॉर्ड्स को ध्वस्त कर देगा।
2. 5 लाख करोड़ से ज्यादा का वैल्यूएशन (Mega Valuation)
अनलिस्टेड (ग्रे) मार्केट में एनएसई के शेयर्स की मौजूदा कीमतों के आधार पर, इस आईपीओ के जरिए एक्सचेंज का कुल वैल्यूएशन 5 लाख करोड़ (5 ट्रिलियन रुपये) से अधिक आंका जा रहा है। यह वैल्यूएशन इसे भारत की सबसे मूल्यवान वित्तीय कंपनियों की कतार में खड़ा करता है।
3. पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल (100% Offer for Sale)
यह आईपीओ पूरी तरह से एक 'ऑफर फॉर सेल' (OFS) होगा। इसके तहत एनएसई के मौजूदा संस्थागत शेयरधारक (Institutional Shareholders) अपनी करीब 6% हिस्सेदारी यानी कुल 14.89 करोड़ शेयर नए निवेशकों को बेचेंगे। इसका मतलब है कि कंपनी कोई नया शेयर जारी नहीं कर रही है और आईपीओ से मिलने वाला सारा पैसा सीधे हिस्सेदारी बेचने वाले शेयरधारकों के पास जाएगा, न कि एनएसई के पास।
4. एसबीआई और बैंक ऑफ बड़ौदा जैसे बड़े सरकारी बैंक हैं विक्रेता
इस आईपीओ में देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) सबसे बड़े बिकवाल के रूप में सामने आए हैं, जो अपने 2.48 करोड़ शेयर्स बेचेंगे। उनके अलावा बैंक ऑफ बड़ौदा (BoB), स्टॉक होल्डिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (SHCIL), कनाडा पेंशन प्लान इन्वेस्टमेंट बोर्ड (CPPIB) और न्यू इंडिया एश्योरेंस जैसी सरकारी बीमा कंपनियां भी अपनी हिस्सेदारी का एक हिस्सा बाजार में बेच रही हैं।
5. एलआईसी नहीं बेचेगी अपनी हिस्सेदारी (LIC to Retain Stake)
दिलचस्प बात यह है कि लाइफ इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (LIC), जो 10.72% हिस्सेदारी के साथ एनएसई में सबसे बड़ी सिंगल शेयरहोल्डर है, इस आईपीओ में अपनी एक भी हिस्सेदारी नहीं बेच रही है। एलआईसी के अलावा विप्रो के अजीम प्रेमजी (Premji Invest) और दिग्गज निवेशक राधाकिशन दमानी भी अपने शेयर्स को बरकरार रखेंगे।
6. अपने प्लेटफॉर्म पर नहीं, बल्कि BSE पर होगी लिस्टिंग
भारतीय प्रतिभूति कानूनों और सेबी (SEBI) के नियमों के अनुसार, कोई भी स्टॉक एक्सचेंज खुद के ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म पर अपने शेयर्स को लिस्ट नहीं कर सकता। हितों के टकराव (Conflict of Interest) से बचने के लिए, एनएसई अपने शेयर्स की लिस्टिंग प्रतिद्वंद्वी एक्सचेंज यानी बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर कराएगा।
7. शुरुआती निवेशकों को मिलेगा छप्परफाड़ रिटर्न
इस आईपीओ के ड्राफ्ट पेपर से एक बेहद हैरान करने वाला सच सामने आया है। न्यू इंडिया एश्योरेंस और नेशनल इंश्योरेंस जैसी कंपनियों ने 1990 के दशक में एनएसई के शेयर्स महज 32 पैसे प्रति शेयर की औसत कीमत पर खरीदे थे। वहीं, एसबीआई ने इन्हें 80 पैसे प्रति शेयर पर लिया था। आज अनलिस्टेड मार्केट में इसकी कीमत 2,000 से ऊपर चल रही है, जिसका मतलब है कि इन शुरुआती सरकारी निवेशकों को अपने निवेश पर हजारों गुना (Multibagger) का मुनाफा होने जा रहा है।
8. मजबूत वित्तीय स्थिति (Strong Financials)
एनएसई भारत के शेयर बाजार में एक मजबूत और लगभग एकाधिकार जैसी स्थिति रखता है। वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) में एक्सचेंज ने 16,601 करोड़ का शानदार रेवेन्यू और 10,302 करोड़ का शुद्ध लाभ (Net Profit) दर्ज किया है। इसके अलावा, एनएसई लगातार अपने शेयरधारकों को प्रति शेयर 35 का तगड़ा डिविडेंड भी देता आ रहा है।
9. दुनिया का सबसे बड़ा डेरिवेटिव्स एक्सचेंज
वर्ल्ड फेडरेशन ऑफ एक्सचेंजों (WFE) के आंकड़ों के मुताबिक, एनएसई साल 2026 में भी सौदों की संख्या के मामले में दुनिया का सबसे बड़ा इक्विटी डेरिवेटिव्स एक्सचेंज बना हुआ है। इसके तकनीकी ढांचे (Tech Infra) का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यह हर दिन औसतन 12 से 14 अरब (Billions) मैसेजेस और ऑर्डर्स को बिना किसी रुकावट के प्रोसेस करता है।
10. एक दशक का लंबा इंतजार हुआ खत्म
एनएसई ने पहली बार साल 2016 में आईपीओ के लिए आवेदन किया था। लेकिन उसके बाद यह एक्सचेंज बहुचर्चित 'को-लोकेशन स्कैंडल' (Co-Location Case) और डार्क फाइबर विवादों में घिर गया, जिसकी वजह से सेबी ने इस पर रोक लगा दी थी। हाल ही में, जून 2025 से जनवरी 2026 के बीच नए मैनेजमेंट के तहत एनएसई ने सेबी के साथ करीब 1,300 करोड़ से अधिक का भारी सेटलमेंट (जुर्माना) देकर इन पुराने मामलों को पूरी तरह सुलझा लिया है, जिसके बाद ही इस मेगा आईपीओ का रास्ता साफ हुआ है। सेबी की अंतिम मंजूरी मिलने के बाद, यह आईपीओ साल 2026 के अंत तक (संभावित रूप से दिसंबर तक) आम निवेशकों के लिए खुल सकता है।
