देश के विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत करने और आर्थिक गतिविधियों को रफ्तार देने के लिए केंद्र सरकार ने बड़े कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। इस सिलसिले में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) सोमवार (13 जुलाई 2026) को सरकारी बैंकों (PSBs) और आईडीबीआई (IDBI) बैंक समेत प्रमुख वित्तीय संस्थानों के प्रमुखों के साथ एक अहम बैठक की अध्यक्षता करेंगी। इस उच्च स्तरीय बैठक का मुख्य उद्देश्य विदेशी मुद्रा जमा (फॉरेन करेंसी डिपॉजिट) जुटाने के लिए बैंकों द्वारा चलाए जा रहे अभियानों की प्रगति की समीक्षा करना है।
वित्त मंत्री सार्वजनिक बैंकों के प्रमुखों के साथ करेंगी बैठक
विदेशी मुद्रा और उधारी से जुड़े मुद्दों पर होगी चर्चा
न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा ने सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार बताया कि इस बैठक (PSB meeting) में मुख्य रूप से तीन बड़े मुद्दों पर चर्चा होगी। इनमें विदेशी मुद्रा प्रवासी (बैंक) जमा यानी FCNR(B), विदेशी मुद्रा बॉन्ड और बाहरी वाणिज्यिक उधारी (ECB) के जरिए विदेशी फंड जुटाने की रणनीतियां शामिल हैं। सरकार का पूरा ध्यान इस बात पर है कि कैसे विदेशी बाजारों से ज्यादा से ज्यादा डॉलर और अन्य प्रमुख विदेशी मुद्राएं देश में लाई जा सकें।
RBI ने हटाई ब्याज दरों की सीमा
यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने हाल ही में विदेशी फंड को आकर्षित करने के लिए कई ढील दी हैं। आरबीआई ने अनिवासी भारतीयों (NRI), भारतीय मूल के विदेशी नागरिकों (OCI) और भारतीय मूल के लोगों (PIO) को लुभाने के लिए 3 से 5 साल की अवधि वाली नई FCNR(B) जमाओं पर लगी ब्याज दर की ऊपरी सीमा (इंटरेस्ट रेट कैप) को 30 सितंबर तक के लिए हटा दिया है।
विदेशी मुद्रा प्रवाह में गिरावट को रोकने की कोशिश
रिजर्व बैंक और सरकार को यह सख्त कदम इसलिए उठाना पड़ा क्योंकि पिछले कुछ समय में FCNR(B) जमा के जरिए भारत आने वाले पैसे में भारी कमी दर्ज की गई है। आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में इसका शुद्ध प्रवाह (नेट इनफ्लो) घटकर केवल 94.6 करोड़ डॉलर रह गया, जबकि इससे पिछले वित्त वर्ष 2024-25 में यह आंकड़ा 7.1 अरब डॉलर के ऊंचे स्तर पर था। सरकार इस बड़ी गिरावट को रोकने और प्रवाह को वापस पटरी पर लाने के लिए बैंकों को सक्रिय करना चाहती है।
बैंकों और सरकारी कंपनियों को मिलेगी बड़ी छूट
विदेशी मुद्रा के जोखिम से बैंकों को बचाने के लिए आरबीआई नई व्यवस्था के तहत 3 से 5 साल की FCNR(B) जमाओं पर रियायती विदेशी मुद्रा विनिमय सुविधा (कन्सेशनल स्वैप विंडो) दे रहा है। इससे बैंकों के लिए विदेशी मुद्रा जोखिम से बचाव (हेजिंग) की लागत काफी कम हो जाएगी। इसके साथ ही, आरबीआई ने 30 सितंबर, 2026 तक केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (CPSEs) को भी बाहरी वाणिज्यिक उधारी (ECB) जुटाने के लिए इस रियायती स्वैप सुविधा का लाभ देने की घोषणा की है।
लागत में 3% की बचत, कंपनियों को होगा फायदा
आमतौर पर भारत की सरकारी कंपनियां (CPSEs) हर साल ईसीबी (ECB) के जरिए अंतरराष्ट्रीय बाजारों से लगभग 10 से 12 अरब डॉलर का कर्ज जुटाती हैं। जानकारों का मानना है कि आरबीआई की इस नई रियायती सुविधा से कंपनियों को करीब 3 प्रतिशत तक की लागत का सीधा फायदा (कॉस्ट एडवांटेज) मिलेगा। इस बड़े लाभ को देखते हुए कई सरकारी कंपनियां अपनी उधारी योजनाओं को समय से पहले ही पूरा कर सकती हैं।
एसबीआई रिसर्च का अनुमान: पलटेगा गिरावट का रुख
भारतीय स्टेट बैंक (SBI) रिसर्च की एक हालिया रिपोर्ट में भी इस कदम की सराहना की गई है। रिपोर्ट के अनुसार, इस रियायती सुविधा से सरकारी कंपनियों को विदेशी बाजारों से प्रतिस्पर्धी और सस्ती दरों पर फंड जुटाने में मदद मिलेगी। इससे बाहरी वाणिज्यिक उधारी (ECB) और विदेशी मुद्रा परिवर्तनीय बांड (FCCB) के कुल प्रवाह में आई गिरावट को पलटने में मदद मिल सकती है। गौरतलब है कि वित्त वर्ष 2025-26 में यह कुल प्रवाह करीब 30 प्रतिशत घटकर 42.9 अरब डॉलर रह गया था, जो वित्त वर्ष 2024-25 में 61.2 अरब डॉलर था।
उत्पादक क्षेत्रों में लोन बढ़ाने पर भी रहेगा जोर
बैठक के एजेंडे में केवल विदेशी मुद्रा ही नहीं, बल्कि देश की आंतरिक अर्थव्यवस्था को गति देना भी शामिल है। सूत्रों का कहना है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण इस बैठक में बैंक प्रमुखों से देश के उत्पादक क्षेत्रों जैसे बुनियादी ढांचे, विनिर्माण और कृषि से जुड़े उद्योगों में लोन के प्रवाह को तेज करने का आग्रह भी कर सकती हैं, ताकि देश की विकास दर को और मजबूत किया जा सके।
