अप्रैल 2026 में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने भारतीय Debt Market से अब तक $1.23 अरब से ज्यादा की बिकवाली कर दी है। यह ट्रेंड जारी रहा तो यह अप्रैल 2025 के बाद सबसे बड़ी मासिक बिकवाली साबित हो सकती है। तुलना करें तो मार्च में FIIs ने करीब $977 मिलियन की निकासी की थी, जिससे साफ है कि आउटफ्लो की रफ्तार तेज हुई है।
कर्ज बाजार से भाग रहे FII
यील्ड गैप बना बड़ा कारण
विदेशी निवेशकों की तरफ से इस बिकवाली के पीछे भारत और US के बॉन्ड यील्ड के बीच अंतर तेजी से घटना है। पहले यह अंतर 300–400 बेसिस प्वाइंट के आसपास था, जो अब घटकर 200–250 बेसिस प्वाइंट रह गया है। इसका सीधा असर यह हुआ है कि विदेशी निवेशकों के लिए भारतीय डेट में अतिरिक्त रिटर्न का आकर्षण कम हो गया है।
रुपया और करेंसी रिस्क ने बढ़ाई चिंता
विदेशी निवेशक सिर्फ यील्ड नहीं, बल्कि करेंसी रिस्क भी देखते हैं। इस साल रुपये में उतार-चढ़ाव और ग्लोबल ट्रेड अनिश्चितता ने निवेश का माहौल प्रभावित किया है। अगर रुपया कमजोर होता है, तो निवेशकों का वास्तविक रिटर्न घट जाता है, जिससे वे भारतीय बाजार से दूरी बनाने लगते हैं।
महंगा क्रूड और बढ़ता CAD बना दबाव
क्रूड ऑयल की कीमतें $80–90 प्रति बैरल के ऊपर बनी हुई हैं, जो भारत जैसे आयातक देश के लिए चिंता का विषय है। ऊंचा क्रूड प्राइस चालू खाता घाटा (CAD) बढ़ा सकता है और रुपये पर दबाव डाल सकता है। इससे विदेशी निवेशकों के रिटर्न और घट सकते हैं।
हेजिंग कॉस्ट ने खत्म किया यील्ड का फायदा
विदेशी निवेशक जब करेंसी रिस्क को हेज करते हैं, तो इसकी लागत काफी बढ़ गई है। हेजिंग कॉस्ट जोड़ने के बाद भारत और US बॉन्ड के बीच यील्ड का अंतर लगभग खत्म हो जाता है, जिससे भारतीय डेट की आकर्षण शक्ति कमजोर पड़ जाती है।
डोमेस्टिक फैक्टर्स भी नहीं दे रहे सपोर्ट
RBI पहले ही संकेत दे चुका है कि महंगाई पर ऊपर की तरफ जोखिम बना हुआ है, खासकर क्रूड और मौसम से जुड़े कारणों की वजह से। इसके अलावा, सरकार और राज्यों की ओर से बड़े पैमाने पर बॉन्ड इश्यू हो रहे हैं, जिससे सप्लाई बढ़ी है और यील्ड पर दबाव बना हुआ है।
कब लौटेंगे FIIs
विशेषज्ञों का मानना है कि FIIs की वापसी दो चीजों पर निर्भर करेगी, पहला, India-US यील्ड गैप का फिर से बढ़ना और दूसरा, रुपये में स्थिरता आना। फिलहाल US में रेट कट की संभावना कम है और भारत में भी दरें बढ़ने की उम्मीद नहीं है, ऐसे में निकट भविष्य में बड़ा बदलाव मुश्किल दिख रहा है।
