होटल या रेस्टोरेंट नहीं, इन लोगों को पहले मिलेगा नीला वाला कमर्शियल सिलेंडर

मिडिल-ईस्ट में बढ़ते युद्ध और 'स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज' में पैदा हुई बाधाओं के बीच भारत सरकार ने एलपीजी सप्लाई को लेकर एक बड़ा फैसला लिया है। अब नीले रंग के कमर्शियल सिलेंडर की प्राथमिकता बदल दी गई है, जिसमें होटल और रेस्टोरेंट के बजाय स्कूलों और अस्पतालों जैसे जरूरी संस्थानों को पहले गैस दी जाएगी।

मिडिल-ईस्ट में ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में खलबली मचा दी है। 'स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज' (Strait of Hormuz) जैसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते के बाधित होने की खबरों के बीच भारत सरकार ने एक बेहद कड़ा और रणनीतिक फैसला लिया है। घरेलू रसोई गैस की उपलब्धता सुनिश्चित करने और आवश्यक सेवाओं को सुचारू रखने के लिए सरकार ने नीले वाले यानी कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की सप्लाई को लेकर नई प्राथमिकता सूची जारी की है। इस फैसले का सबसे बड़ा असर होटल, रेस्टोरेंट और ढाबा मालिकों पर पड़ने वाला है, क्योंकि अब उन्हें कमर्शियल गैस की सप्लाई में दूसरी कतार में रखा जाएगा। सरकार का पूरा ध्यान फिलहाल उन जगहों पर है, जहां सेवा रुकने से समाज के संवेदनशील वर्गों पर सीधा असर पड़ सकता है।

Commercial LPG supply Priority

सबसे पहले किसे मिलेगा सिलेंडर?

ताजा आदेश के अनुसार, अब कमर्शियल गैस की सीमित सप्लाई को सबसे पहले स्कूलों और अस्पतालों के लिए आरक्षित (Reserved) किया गया है। स्कूलों में मिड-डे मील जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं और अस्पतालों में मरीजों के लिए भोजन और अन्य जरूरी कामों को देखते हुए सरकार ने इन्हें 'प्रायोरिटी सेक्टर' में रखा है। युद्ध के कारण सप्लाई चेन में आई रुकावट को देखते हुए यह कदम उठाया गया है ताकि आपातकालीन स्थिति में भी बच्चों और मरीजों को किसी परेशानी का सामना न करना पड़े। सरकार का मानना है कि होटल और रेस्टोरेंट जैसे व्यावसायिक प्रतिष्ठान वैकल्पिक स्रोतों या सीमित आपूर्ति के साथ कुछ समय के लिए एडजस्ट कर सकते हैं, लेकिन स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी सेवाओं में कोई रुकावट बर्दाश्त नहीं की जा सकती।

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