दिल्ली-NCR में नेशनल डेवलपर्स का बढ़ा दबदबा, समझें खरीदारों का लोकल बिल्डर से क्यों डगमगाया भरोसा?

NCR तेजी से बढ़ते रियल्टी मार्केट में से एक बना हुआ है। लग्जरी हाउसिंग सेगमेंट का प्रदर्शन लगातार अच्छा रहा है। द्वारका एक्सप्रेसवे, नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट और रीजनल ट्रांजिट नेटवर्क जैसे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट नए मौके पैदा कर रहे हैं।

दशकों तक, नेशनल कैपिटल रीजन (NCR) के हाउसिंग मार्केट पर मुख्य रूप से उन लोकल बिल्डर का दबदबा रहा, जिनके पास स्थानीय स्तर पर गहरी जानकारी और पहले से मौजूद लैंड बैंक थे। आज, इस स्थिति में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। देश के बड़े (मुंबई, बेंगलुरु, पुणे, हैदराबाद और अहमदाबाद में काम करने वाले) डेवलपर्स का दबदबा दिल्ली-NCR में अब तेजी से बढ़ रहा है। यह रेजिडेंशियल रियल एस्टेट सेक्टर में एक बड़े बदलाव को दर्शाता है।

real estate (Godrej)

रियल एस्टेट

ANAROCK रिसर्च केके अनुसार, पिछले चार वर्षों में NCR में नेशनल डेवलपर्स की नई रेजिडेंशियल सप्लाई की हिस्सेदारी चार गुना बढ़ गई है। 2022 में इस क्षेत्र की कुल नई रेजिडेंशियल सप्लाई में उनकी हिस्सेदारी 3% थी, जो 2025 के अंत तक बढ़कर 13% से अधिक हो गई। इन डेवलपर्स में गोदरेज प्रॉपर्टीज लिमिटेड, प्रेस्टीज एस्टेट्स, टाटा हाउसिंग, महिंद्रा लाइफस्पेस, अडानी रियल्टी, शोभा लिमिटेड, शापूरजी पल्लोनजी ग्रुप और बिड़ला एस्टेट्स शामिल हैं। इस मार्केट में अभी भी लोकल प्लेयर्स का दबदबा है, लेकिन NCR के बाहर के बड़े और लिस्टेड डेवलपर्स भी अब यहां के हाउसिंग मार्केट में अपनी पकड़ तेजी से मजबूत कर रहे हैं।

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