Nandini Milk Price Hike : कर्नाटक के लोगों को जल्द ही दूध की कीमतों में बड़ा झटका लग सकता है। राज्य सरकार के मशहूर ब्रांड 'नंदिनी' (Nandini) के दूध की कीमतों में 8 से 10 रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी हो सकती है। कर्नाटक कैबिनेट ने इस मूल्य वृद्धि के प्रस्ताव का समर्थन किया है। हालांकि, चुनाव आचार संहिता लागू होने के कारण इस पर अंतिम मुहर विधान परिषद चुनाव के नतीजे आने के बाद ही लगेगी।
कर्नाटक में नंदिनी दूध का 'जोर का झटका': 8 से 10 रुपये प्रति लीटर बढ़ेंगे दाम
केएमएफ (KMF) ने मांगी थी 10 रुपये की बढ़ोतरी
कर्नाटक मिल्क फेडरेशन (KMF), जो नंदिनी ब्रांड नाम से दूध और डेयरी उत्पाद बेचता है, ने सरकार से दूध के दाम में 10 रुपये प्रति लीटर का इजाफा करने की मांग की थी। केएमएफ का कहना है कि दूध के उत्पादन और रखरखाव की लागत लगातार बढ़ रही है, जिससे डेयरी उद्योग पर दबाव बढ़ रहा है। सरकार इस मांग पर विचार करते हुए 8 से 10 रुपये के बीच दाम बढ़ाने के पक्ष में दिख रही है।
सूखे की मार और किसानों की आय बढ़ाने की पहल
न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक कैबिनेट की बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि राज्य में इस समय सूखे की स्थिति है, जिससे पशुपालकों और किसानों को भारी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। चारे और पशु आहार के दाम बढ़ने से दूध उत्पादन की लागत काफी बढ़ गई है। कैबिनेट के मंत्रियों का मानना है कि दूध की कीमतें बढ़ाने से मिलने वाला अतिरिक्त पैसा सीधे दुग्ध उत्पादक किसानों की जेब में जाएगा, जिससे इस संकट के समय में उनकी आमदनी बढ़ेगी और उन्हें राहत मिलेगी।
विधान परिषद चुनाव और आचार संहिता का प्रभाव
राज्य में इस समय विधान परिषद की 4 सीटों (दो स्नातक और दो शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों) के लिए चुनाव होने हैं। 23 अक्टूबर को मतदान कराया जाएगा, जबकि 27 अक्टूबर को मतों की गिनती होगी और परिणाम घोषित किए जाएंगे। चूंकि राज्य में इस समय आदर्श आचार संहिता लागू है, इसलिए सरकार ने आधिकारिक तौर पर इस फैसले की घोषणा करने के लिए कोई प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित नहीं की।
मुख्यमंत्री लेंगे अंतिम फैसला
बैठक के दौरान मंत्रिमंडल ने सर्वसम्मति से मूल्य वृद्धि के विचार का समर्थन किया और इस मामले पर अंतिम निर्णय लेने का अधिकार राज्य के मुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार को सौंपा है। आचार संहिता समाप्त होने यानी 27 अक्टूबर के बाद मुख्यमंत्री की हरी झंडी मिलते ही नई दरें राज्य भर में लागू की जा सकती हैं। कीमतों में होने वाली इस बढ़ोतरी से जहां एक तरफ राज्य के लाखों पशुपालक किसानों को आर्थिक सहारा मिलेगा, वहीं दूसरी तरफ आम उपभोक्ताओं के बजट पर इसका असर पड़ना तय है।
