मानसून की मार! 38.82 लाख हेक्टेयर कम हुई खरीफ की बुवाई, क्या बढ़ेगी खाद्य महंगाई?

मानसून की बेरुखी का असर जमीन पर दिखने लगा है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 13 जुलाई तक खरीफ की बुवाई 38.82 लाख हेक्टेयर कम रही। अगर यही ट्रेंड अंतिम नतीजा बनता है, तो महंगाई बढ़ना तय माना जा रहा है।

Monsoon Trend and Food Inflation : देश के कई हिस्सों में कमजोर मानसून का असर अब खेतों तक पहुंचता दिख रहा है। केंद्र सरकार ने 4 अगस्त को संसद में बताया कि कम मानसून की वजह से इस साल देश में खरीफ की बुवाई में कमी आई है। अगर यही ट्रेंड अंतिम नतीजों में बदलता है, जो यह फूड इन्फ्लेशन के लिहाज से मुश्किलें खड़ी कर सकता है।

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मानसून की कमी बनी मुसीबत

लोकसभा में पूछे गए एक सवाल के जवाब में कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय की तरफ से कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने बताया कि 13 जुलाई, 2026 तक पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 38.82 लाख हेक्टेयर कम क्षेत्र में खरीफ फसलों की बुवाई हुई है। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि फिलहाल बुवाई अभी जारी है। अंतिम तस्वीर आना बाकी है। लेकिन, यदि यह अंतर बना रहता है तो दाल, चावल और खाद्य तेल जैसी जरूरी चीजों की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। इसका सीधा असर आम लोगों की रसोई और महंगाई पर भी पड़ सकता है।

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