Millet man : एक तरफ जब संयुक्त राष्ट्र संघ साल 2023 को मिलेट ईयर के रुप में मना रहा है। और खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मोटे अनाज के इस्तेमाल को बढ़ावा देने की बात कर रहे हैं। उसी वक्त एक ऐसी खबर आई, जो बेहद दुखद है। बीते हफ्ते भारत के मिलेट मैन पी.वी.सतीश का निधन हो गया । सतीश को देश में मिलेट्स (मोटा अनाज) को बढ़ावा देने वाले अग्रणी लोगों में से एक माना जाता है।
मिलेट मैन का 18 मार्च को हुआ निधन
क्या है मिलेट मिशन
मिलेट यानी मोटा अनाज, जिसमें बाजरा, रागी, जुआर, कांगनी आदि मोटे अनाज शामिल होते हैं। मोटे अनाज पूरी दुनिया में पैदा किए जाते हैं। इनकी खासियत यह है कि यह न केवल आसानी से उपलब्ध हैं, बल्कि यह खाने में भी पौष्टिक है। जिसमें फाइबर,मिनरल और जरुरी पोषक तत्व मौजूद हैं। इसी खासियत को देखते हुए भारत की अपील पर संयुक्त राष्ट्र ने 5 मार्च 2021 को वर्ष 2023 को 'इंटरनेशनल इयर ऑफ मिलेट' घोषित किया है।
कौन हैं पी वी सतीश
पेरियापटना वेंकटसुब्बैया सतीश ने दशकों पहले तेलंगाना में मोटे अनाज की खेती को बढ़ावा देने और इसके लाभों के बारे में जागरूकता पैदा करने की पहल की थी। सतीश ने जब मोटे अनाज के प्रति जागरुकता फैलाने की पहल की तब उसे गरीबों का भोजन माना जाता था। यह वह दौर था, जब इसकी खेती को सरकार से कोई खास समर्थन नहीं मिलता था।
ऐसे में उन्होंने खुद ही बीड़ा उठाया और 1980 के दशक की शुरुआत में अपने कुछ दोस्तों के साथ मिलकर डीडीएस एनजीओ (डेक्कन डेवलपमेंट सोसायटी) की स्थापना की।जो हैदराबाद से करीब120 किमी दूर जहीराबाद के पास पास्तापुर गांव में शुरू किया गया। उन्हीं के नेतृत्व में डीडीएस ने महिला संघों और मोटा अनाज की खेती व जैविक खेती को बढ़ावा दिया। सार्वजनिक वितरण प्रणाली में मोटा अनाजों को शामिल करने में पी.वी.सतीश का अहम रोल रहा है।
भारत में मिलेट का उत्पादन
भारत में 6 से 7 किस्म के मोटे अनाज उगाए जाते हैं। जिसमें बाजरा, रागी,कंगनी,बारगु,जुआर,कोदो आदि शामिल हैं। भारत में वर्ष 2020-21 में 1.20 करोड़ टन मोटे अनाजों का उत्पादन किया था। और दुनिया के मिलेट उत्पादन में भारत की करीब 40 फीसदी की हिस्सेदारी है।भारत दुनिया में मोटे अनाज का 5वां सबसे बड़ा निर्यातक है।
