Turmeric Price Drop : महाराष्ट्र के मराठवाड़ा क्षेत्र से हल्दी का निर्यात अचानक रूक गया है। इसका मुख्य कारण अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच शुरू हुआ युद्ध है। इससे घरेलू बाजार में हल्दी की कीमतों में भी गिरावट आई है। पिछले कुछ समय में हल्दी की कीमत 16,500 रुपये प्रति क्विंटल थी, लेकिन अब यह गिरकर 13,000 रुपये प्रति क्विंटल रह गई है। किलो के हिसाब से बात करें तो 165 रुपये किलो वाली हल्दी130 रुपये किलो में मिल रही है। यानी कीमत प्रति किलो 35 रुपये कम हो गई। मराठवाड़ा में हल्दी एक महत्वपूर्ण नकदी फसल है। खासतौर पर हिंगोली जिले में करीब 2 लाख हेक्टेयर जमीन पर हल्दी की खेती होती है। यहां उगाई जाने वाली 'वासमत' किस्म को 2024 में 'भौगोलिक पहचान' (GI) का दर्जा भी मिला है। GI दर्जा मिलने के बाद यह हल्दी और भी मूल्यवान मानी जाती है और निर्यात में इसका विशेष महत्व है।
मराठवाड़ा की हल्दी का निर्यात युद्ध के कारण ठप (तस्वीर-istock)
निर्यात पर युद्ध का असर
न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक शिवसेना के एमएलसी हेमंत पाटिल ने बताया कि मराठवाड़ा में उगाई जाने वाली हल्दी खाड़ी और अफ्रीकी देशों में भेजी जाती है। हल्दी को कंटेनरों में पैक कर तमिलनाडु और केरल के रास्ते बाहर देशों में भेजा जाता है। लेकिन पिछले महीने शुरू हुए युद्ध के कारण यह निर्यात पूरी तरह रुक गया है। हेमंत पाटिल हिंगोली में स्थित 'बालासाहेब ठाकरे हल्दी अनुसंधान और प्रशिक्षण केंद्र' के प्रमुख भी हैं।
प्रमुख हल्दी उत्पादक जिले
मराठवाड़ा के प्रमुख हल्दी उत्पादक जिले हिंगोली, नांदेड़, वर्धा, परभणी, यवतमाल और वाशिम हैं। इन जिलों में हल्दी की कुल पैदावार करीब 25 लाख टन होती है। अकेले हिंगोली जिले में ही दो लाख हेक्टेयर पर हल्दी की खेती होती है। पाटिल ने बताया कि यह क्षेत्र भारत में हल्दी की उच्च गुणवत्ता वाले उत्पादन के लिए जाना जाता है।
व्यापारियों की चिंता
हिंगोली के हल्दी व्यापारी प्रकाश सोनी ने कहा कि युद्ध के कारण न केवल निर्यात रुक गया है, बल्कि घरेलू बाजार में कीमतों पर भी नकारात्मक असर पड़ा है। उन्होंने बताया कि युद्ध शुरू होने से पहले हल्दी 16,500 रुपये प्रति क्विंटल बिक रही थी, लेकिन अब यह घटकर 13,000 रुपये प्रति क्विंटल रह गई है। अगर युद्ध जारी रहा, तो कीमतें और भी गिर सकती हैं।
भारत का हल्दी निर्यात
वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2024-25 में भारत ने कुल 34 करोड़ 15.4 लाख डॉलर मूल्य की हल्दी का निर्यात किया। इसमें अकेले महाराष्ट्र का योगदान 15 करोड़ 53.5 लाख डॉलर का रहा। भारत से हल्दी का निर्यात बांग्लादेश, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), अमेरिका, मलेशिया और मोरक्को जैसे देशों में किया गया।
मराठवाड़ा की हल्दी, खासकर हिंगोली जिले की 'वासमत' किस्म, न केवल भारत बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी महत्वपूर्ण है। लेकिन अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध के कारण निर्यात रुकने से किसानों और व्यापारियों को गंभीर नुकसान हो रहा है। इससे घरेलू बाजार में कीमतों में गिरावट आई है और आने वाले समय में स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो सकती है।
