केंद्र सरकार ने प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) के नियमों में दो अहम बदला किया है। पहला बदलाव चीन समेत पड़ोसी देशों से आने वाले निवेश से जुड़ा है और दूसरा बदलाव बीमा कारोबार में 100% तक एफडीआई की अनुमति देता है। 1 मई से जिन कंपनियों में चीन की हिस्सेदारी 10% तक है, वे 'ऑटोमैटिक रूट' के जरिए निवेश कर सकेंगी। यह बदलाव छह साल पुरानी उस नीति में किया गया है, जिसके तहत भारत के साथ जमीनी सीमा साझा करने वाले सभी देशों से आने वाले FDI के लिए सरकारी मंजूरी लेना अनिवार्य था। ये बदलाव वैश्विक निवेशकों, विशेष रूप से प्राइवेट इक्विटी फर्मों द्वारा जताई गई चिंताओं के बाद किए गए हैं।
प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI)
ऑटोमैटिक रूट के तहत अनुमति
FDI के आसान नियम चीन या भारत के पड़ोसी देशों में रजिस्टर्ड संस्थाओं पर लागू नहीं होंगे। वैश्विक निवेशकों की चिंताओं को देखते हुए केंद्रीय कैबिनेट ने उन कंपनियों को "महत्वपूर्ण लाभकारी स्वामित्व" के बिना भी ऑटोमैटिक रूट के तहत अनुमति देने का फैसला किया है। PMLA के नियमों के अनुसार, महत्वपूर्ण लाभकारी स्वामित्व की सीमा 10% तय की गई है। हालांकि, FDI के ये आसान नियम चीन, हांगकांग या भारत के साथ ज़मीनी सीमा साझा करने वाले अन्य देशों में रजिस्टर्ड संस्थाओं पर लागू नहीं होंगे। इस अधिसूचना में यह भी कहा गया है कि कोई भी बहुपक्षीय बैंक या फंड, जिसका भारत सदस्य है—जैसे कि ADB, NDB और AIIB—उसे किसी एक देश की संस्था नहीं माना जाएगा और न ही किसी देश को भारत में ऐसे बैंक या फंड के निवेश का लाभकारी स्वामी माना जाएगा।
इस तरह के निवेश को विदेशी माना जाएगा
इसके अलावा, सरकार ने कहा कि भारतीय कंपनियों द्वारा तेल क्षेत्रों में भागीदारी हित या अधिकार का हस्तांतरण, भारत के बाहर रहने वाले किसी व्यक्ति को किए जाने पर, उसे विदेशी निवेश माना जाएगा। एक अन्य अधिसूचना के माध्यम से, सरकार ने बीमा कंपनियों और बिचौलियों जैसे कि ब्रोकर, थर्ड-पार्टी एडमिनिस्ट्रेटर या कॉर्पोरेट एजेंट में 100% FDI की अनुमति दी। वहीं, भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) के मामले में ऑटोमैटिक रूट के ज़रिए निवेश की सीमा 20% तय की गई। इसमें यह भी स्पष्ट किया गया कि या तो चेयरमैन या फिर MD और CEO का भारतीय नागरिक होना अनिवार्य है।
