Palace on Wheels Maharaja Express Luxury Trains Fares : भारत की सबसे लक्जरी ट्रेनों ‘पैलेस ऑन व्हील्स’ और ‘महाराजा एक्सप्रेस’ में मुफ्त यात्रा को लेकर उठे सवाल पर सरकार ने लोकसभा में स्पष्ट जवाब दिया है। इन ट्रेनों का किराया प्रति व्यक्ति लाखों रुपये में होता है, जो अधिकतम करीब 22 लाख रुपये तक पहुंच सकता है। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक था कि क्या रेलवे अधिकारियों को इन महंगी ट्रेनों में अपने परिवार के साथ मुफ्त यात्रा की सुविधा मिलती है।
महाराजा एक्सप्रेस, पैलेस ऑन व्हील्स आलीशान ट्रेनों में मुफ्त यात्रा पर सरकार का जवाब (तस्वीर-X)
संसद में उठाया गया मुद्दा
तमिलनाडु के सांसद वी.एस. माथेस्वरन ने इस विषय को लोकसभा में उठाया। उन्होंने रेल मंत्री से यह जानकारी मांगी कि साल 2012 से अब तक किन-किन रेलवे अधिकारियों को इन लक्जरी ट्रेनों में मुफ्त यात्रा की अनुमति दी गई है। साथ ही उन्होंने यह भी पूछा कि अधिकारियों को सरकारी खर्च पर अपने जीवनसाथी के साथ ऐसी विलासितापूर्ण यात्रा करने की अनुमति देने के पीछे क्या कारण हैं।
रेल मंत्री का जवाब
न्यूज एजेसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने अपने लिखित उत्तर में साफ किया कि रेलवे अधिकारियों को मुफ्त यात्रा की कोई विशेष या अतिरिक्त छूट नहीं दी जाती। उन्होंने कहा कि अधिकारी केवल “रेल सेवक (पास) नियम, 1986” के तहत ही यात्रा करने के पात्र होते हैं। यानी उन्हें जो भी यात्रा सुविधा मिलती है, वह तय नियमों के अनुसार ही होती है, उससे अलग कोई विशेष व्यवस्था नहीं है।
क्या कहते हैं नियम?
रेल सेवक (पास) नियम, 1986 के अनुसार रेलवे कर्मचारी और अधिकारी अपने परिवार के साथ कुछ श्रेणियों में मुफ्त या रियायती यात्रा कर सकते हैं। लेकिन यह सुविधा सामान्य ट्रेनों पर लागू होती है और इसके भी स्पष्ट नियम और सीमाएं तय हैं। इसका मतलब यह है कि किसी भी अधिकारी को सिर्फ पद के आधार पर महंगी लग्जरी ट्रेनों में मुफ्त यात्रा का अधिकार नहीं दिया गया है।
कितनी महंगी हैं ये ट्रेनें?
‘पैलेस ऑन व्हील्स’ और ‘महाराजा एक्सप्रेस’ भारत की सबसे शानदार ट्रेनों में गिनी जाती हैं। इन ट्रेनों में यात्रा करना किसी फाइव स्टार होटल से कम नहीं होता। इनका किराया टूर पैकेज और क्लास के हिसाब से तय होता है, जो करीब 4 लाख रुपये से शुरू होकर 22 लाख रुपये प्रति व्यक्ति तक जा सकता है। इसमें लग्जरी कमरे, बेहतरीन खाना, पर्यटन स्थलों का भ्रमण और उच्च स्तरीय सेवाएं शामिल होती हैं।
विवाद क्यों हुआ?
इतनी महंगी यात्रा के बीच यह सवाल उठना लाजिमी था कि क्या सरकारी अधिकारी अपने पद का फायदा उठाकर इन ट्रेनों में मुफ्त यात्रा कर रहे हैं। खासतौर पर तब, जब इसमें उनके जीवनसाथी को भी साथ ले जाने की बात सामने आई। इसी कारण सांसद ने पारदर्शिता की मांग करते हुए अधिकारियों के नाम और पदनाम तक सार्वजनिक करने की बात कही।
सरकार का रुख साफ
सरकार ने अपने जवाब में यह स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी रेलवे अधिकारी को नियमों से बाहर जाकर कोई विशेष लाभ नहीं दिया गया है। मुफ्त यात्रा केवल उन्हीं परिस्थितियों में संभव है, जो पहले से निर्धारित नियमों में शामिल हैं। इससे यह संकेत मिलता है कि लक्जरी ट्रेनों में मुफ्त यात्रा को लेकर जो आशंकाएं थीं, वे नियमों के दायरे में ही सीमित हैं।
इस पूरे मामले से यह साफ होता है कि भले ही ‘पैलेस ऑन व्हील्स’ और ‘महाराजा एक्सप्रेस’ जैसी ट्रेनों का किराया बहुत अधिक हो, लेकिन इनमें मुफ्त यात्रा की सुविधा किसी को भी विशेष रूप से नहीं दी गई है। रेलवे अधिकारियों को भी वही अधिकार प्राप्त हैं, जो नियमों में निर्धारित हैं। सरकार ने इस मुद्दे पर अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए पारदर्शिता बनाए रखने की कोशिश की है।
