Front-Running Trading Case: देश की सबसे बड़ी और सरकारी बीमा कंपनी भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) ने अपने एक कर्मचारी को नौकरी से निकाल दिया है, जिस पर पिछले साल एक घटना सामने आने के बाद मार्केट रेगुलेटर सेबी (SEBI) ने बैन लगा दिया था। एलआईसी ने आरोपी कर्मचारी (योगेश गर्ग) को फ्रंट रनिंग में शामिल होने के नतीजे में निकाला है। फ्रंट-रनिंग का मामला तब बनता है जब कोई ब्रोकर या निवेशक किसी ऐसे ट्रेड में शामिल हो जो गोपनीय हो और उसके ट्रेड करने से उस एसेट (शेयर आदि) की कीमत प्रभावित हो, जिसके लिए ट्रेडिंग हो रही है। योगेश पर आरोप है वे अपने दिवंगत पिता के डीमैट खाते से फ्रंट-रनिंग ट्रेडिंग कर रहा था। इस बात का खुलासा होने पर एलआईसी ने योगेश को सर्विसेज से हटा दिया।
एलआईसी में सामने आया फ्रंट-रनिंग ट्रेडिंग मामला
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परिवार के अन्य सदस्यों के खाते से भी की ट्रेडिंग
योगेश ने जनवरी से मार्च 2022 तक अपने दिवंगत पिता सहित परिवार के अन्य सदस्यों के डीमैट खातों के जरिए भी ट्रेडिंग की। पिछले साल इस घटना के खुलासे के बाद सेबी ने मामले में शामिल एलआईसी के कर्मचारी पर प्रतिबंध लगा दिया था। बुधवार को, एलआईशी ने इस कर्मचारी को बर्खास्त करने की घोषणा की।
कैसे फायदा उठा रहा था योगेश
ईटी की रिपोर्ट के अनुसार योगेश ने एलआईसी के इक्विटी डीलिंग सेक्शन में काम किया और उसी दौरान उस पर एलआईसी के फ्रंट-रनिंग ट्रेडों का आरोप है, जिन्हें योगेश ने परिवार के सदस्यों के खातों से किया। इस रणनीति का उपयोग करके योगेश ने 2.44 करोड़ रुपये का प्रॉफिट कमाया।
किसी भी प्रकार की फ्रंट रनिंग को रोकने के लिए, एलआईसी ने संकेत दिया कि घटना के सार्वजनिक होने के बाद मजबूत कंट्रोलिंग सिस्टम और बेस्ट प्रेक्टिस को शामिल किया है।
