Jio IPO : रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी की कंपनी Jio Platforms अब शेयर बाजार में बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है। कंपनी का करीब 400 करोड़ डॉलर यानी लगभग 37,800 करोड़ रुपये का मेगा IPO अक्टूबर के आखिर या नवंबर की शुरुआत में आ सकता है। माना जा रहा है कि Jio IPO नवरात्रि लॉन्च करने को प्राथमिकता दे सकती है। अगर उस दौरान लॉन्च नहीं हुआ, तो दिवाली के आसपास शेयर बिक्री शुरू किए जाने की संभावना है।
जियो आईपीओ की तैयारी पूरी
ET की रिपोर्ट के मुताबिक Jio IPO की संभावित टाइमलाइन को लेकर जल्द ही अंतिम फैसला लिया जा सकता है। इसके बाद कंपनी विदेशी निवेशकों के लिए करीब तीन हफ्ते और घरेलू निवेशकों के लिए करीब दो हफ्ते के रोड-शो करेगी। यानी IPO लॉन्च से पहले Jio दुनिया के बड़े निवेशकों के बीच अपनी कहानी और कारोबारी संभावनाएं रखने की तैयारी में है।
नवरात्रि से दिवाली तक IPO पर नजर
इस साल नवरात्रि की शुरुआत 11 अक्टूबर से होगी और दशहरा 20 अक्टूबर को है। वहीं, धनतेरस 6 नवंबर और दिवाली 8 नवंबर को पड़ेगी। ऐसे में अक्टूबर के आखिरी दिनों से लेकर नवंबर के पहले हफ्ते तक का समय Jio IPO के लिए अहम माना जा रहा है। Jio Platforms ने जून में IPO के ड्राफ्ट पेपर जमा किए थे। बाजार नियामक सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) ने 28 अगस्त को कंपनी को IPO लाने की मंजूरी दे दी। अब नजर इस बात पर है कि शेयर बिक्री की सटीक तारीख कब तय होती है।
भारत का सबसे बड़ा IPO बन सकता है Jio
मर्चेंट बैंकर्स के अनुमान के मुताबिक Jio IPO से करीब 37,800 करोड़ रुपये जुटाए जा सकते हैं। ऐसा हुआ तो यह भारत का सबसे बड़ा IPO बन जाएगा। यह NSE के करीब 31,000 करोड़ रुपये के प्रस्तावित IPO को भी पीछे छोड़ सकता है। अभी देश का सबसे बड़ा IPO Hyundai Motor India का है, जिसने 2024 में करीब 27,000 करोड़ रुपये जुटाए थे। DRHP के मुताबिक Jio Platforms करीब 27 करोड़ नए इक्विटी शेयर जारी कर सकती है। यह कंपनी की IPO के बाद की इक्विटी पूंजी का लगभग 2.9 फीसदी होगा। खास बात यह है कि इस IPO में OFS यानी मौजूदा निवेशकों की हिस्सेदारी बेचने वाला हिस्सा शामिल नहीं है।
दो दशक बाद रिलायंस ग्रुप का IPO
Reliance Group के लिए भी Jio IPO खास है। क्योंकि, करीब दो दशक बाद समूह की किसी बड़ी कंपनी का IPO आने वाला है। IPO से मिलने वाली रकम का बड़ा हिस्सा Reliance Jio Infocomm के कर्ज को कम करने में इस्तेमाल किया जा सकता है। कंपनी के दस्तावेजों के मुताबिक करीब 27,500 करोड़ रुपये तक के कर्ज को चुकाने की योजना है। बाकी रकम सामान्य कॉरपोरेट कामकाज के लिए इस्तेमाल की जाएगी।
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