ITR फाइल कर दिया लेकिन वेरिफाई करना भूल गए? रद्द हो सकता है टैक्स रिटर्न

इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करना केवल आधा काम है। यदि आप समय सीमा के भीतर अपने रिटर्न को वेरिफाई नहीं करते हैं, तो आयकर विभाग इसे अमान्य (Invalid) घोषित कर सकता है। जानिए ई-वेरिफिकेशन के आसान तरीके और नियम।

आयकर विभाग (Income Tax Department) के नियमों के अनुसार, आयकर विवरण जमा करने की प्रक्रिया केवल ITR सबमिट करने से पूरी नहीं होती। अधिकांश करदाता रिटर्न सबमिट करने के बाद निश्चिंत हो जाते हैं, लेकिन सच्चाई यह है कि जब तक आप अपने रिटर्न का सत्यापन (Verification) नहीं करते, तब तक उसे कानूनी रूप से दाखिल नहीं माना जाता। यदि कोई टैक्सपेयर तय समय सीमा के भीतर अपने ITR को वेरिफाई करने में विफल रहता है, तो आयकर विभाग उस रिटर्न को 'अमान्य' (Invalid) या बेकार घोषित कर देता है। ऐसी स्थिति में यह मान लिया जाता है कि आपने कभी रिटर्न दाखिल ही नहीं किया था, जिसके कारण आपको देर से रिटर्न दाखिल करने पर मिलने वाली पेनल्टी, ब्याज और आईटीआर प्रक्रिया में अड़चनों का सामना करना पड़ सकता है।

ITR Deadline extension

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ITR फाइल करने के बाद भी बच जाता है काम

हालिया आयकर नियमों के तहत, ITR जमा करने के बाद उसे ई-वेरिफाई (e-Verify) करने के लिए करदाताओं को 30 दिनों का समय मिलता है। यदि इस 30 दिनों की निर्धारित अवधि में वेरिफिकेशन पूरा नहीं किया जाता, तो आपका दाखिल किया गया फॉर्म खारिज कर दिया जाता है। इसके परिणाम काफी गंभीर हो सकते हैं; यदि आप समय पर सत्यापन नहीं करते हैं तो आपको धारा 234F के तहत 5,000 रुपये तक का विलंब शुल्क (Late Fee) देना पड़ सकता है और यदि आपका कोई टैक्स रिफंड (Tax Refund) बकाया है, तो वह भी तब तक जारी नहीं किया जाएगा जब तक कि नया या कंडोनेशन के साथ वेरिफाई हुआ रिटर्न प्रोसेस न हो जाए। इसलिए, अंतिम समय की हड़बड़ी और जुर्माने से बचने के लिए रिटर्न दाखिल करने के तुरंत बाद ही ई-वेरिफिकेशन पूरा कर लेना सबसे समझदारी भरा विकल्प है।

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