Israel-Palestine war: इजरायल-फिलिस्तीन युद्ध जैसे-जैसे अपने पैर पसार रहा है, उसका असर अब कच्चे तेल की कीमतों पर दिखने की आशंका बढ़ गई है। इजराइल और हमास के बीच सैन्य झड़पों ने पूरे मिडिल ईस्ट में राजनीतिक अनिश्चितता को गहरा कर दिया है। इस कारण सोमवार को ब्रेंट क्रूड 3.19 डॉलर यानी 3.77% बढ़कर 87.77 डॉलर प्रति बैरल हो गया, जबकि WTI क्रूड 3.36 डॉलर यानी 4.06% बढ़कर 86.15 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया है। चिंता की बात यह है कि जैसे-जैसे इजरायल और हमास के बीच भीषण होगा, वैसे ही तेल की कीमतें बेलगाम हो सकती है। जिससे पूरी दुनिया में महंगाई बढ़ने की आशंका है।
पेट्रोल-डीजल महंगा होने का डर
मिडिल ईस्ट करता है एक तिहाई सप्लाई
ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट अनुसार इजराइल में हो रहीं घटनाएं तेल आपूर्ति के लिए तुरंत कोई खतरा पैदा नहीं करती हैं। लेकिन आशंका है कि अगर यह युद्ध जल्द नहीं खत्म होता है तो इस संघर्ष में अमेरिका और ईरान उलझ सकते हैं। जिसका सीधा असर तेल सप्लाई पर दिखेगा। इस समय मिडिल ईस्ट से पूरी दुनिया की एक तिहाई कच्चे तेल की सप्लाई होती है। वहीं रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसर मिडिल ईस्ट में जोखिम बढ़ने से तेल की कीमतें बढ़ने का अनुमान है।
महंगाई का डर
अगर कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती है, तो उसका सीधा सर महंगाई पर पड़ेगा। और पूरी दुनिया में सप्लाई चेन पर भी असर हो सकता है। इसके अलावा ऐसी आरोप लग रहे हैं कि इजरायल पर हुए हमले में ईरान का भी हाथ है। अगर ईरान का शामिल होना साबित होता है, तो फिर अमेरिका सहित दूसरे पश्चिमी देश ईरान पर प्रतिबंधों का ऐलान कर सकते हैं। इससे भी तेल की कीमतों में आग लगने का आशंका है।
मोदी सरकार के लिए चुनौती
भारत में अपनी जरूरतों का 84 फीसदी कच्चा तेल आयात करता है। और उसमें से मिडिल ईस्ट से करीब 44 फीसदी कच्चा तेल आयात कर रहा है। ऐसे में युद्ध बढ़ने से मोदी सरकार के लिए आपूर्ति के साथ-साथ महंगाई को कंट्रोल करने की भी चुनौती होगी। खास तौर से जब इस साल कई राज्यों में विधान सभा चुनाव हैं और अगले साल लोक सभा चुनाव हैं। भारत में मई 2022 के बाद पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कोई कमी नहीं आई थी।
