क्या भारत में शादी का सर्टिफिकेट बनवाना जरूरी है? जानें कोर्ट मैरिज और मैरिज रजिस्ट्रेशन का अंतर

भारत में शादी के बाद मैरिज सर्टिफिकेट बनवाना जरूरी है या नहीं, इसे लेकर कई कपल के मन में सवाल रहते हैं। क्या मंदिर में शादी करने के बाद भी रजिस्ट्रेशन कराना पड़ता है? जानिए कानून क्या कहता है और सर्टिफिकेट क्यों जरूरी है।

भारत में शादी करने वाले कई कपल के मन में सवाल होता है कि क्या शादी के बाद कोर्ट से मैरिज सर्टिफिकेट बनवाना जरूरी है? क्या मंदिर में शादी करने या परिवार की मौजूदगी में सात फेरे लेने के बाद भी रजिस्ट्रेशन कराना पड़ता है? इसका जवाब शादी के प्रकार और संबंधित राज्य के नियमों पर निर्भर करता है। सुप्रीम कोर्ट ने भी शादी के रजिस्ट्रेशन को जरूरी बनाने पर जोर दिया है। इसलिए कपल के लिए अपने राज्य के नियम जानना जरूरी है।

Marriage Certificate

क्या शादी का रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी है?

भारत में शादी का रजिस्ट्रेशन कराने के नियम हर जगह एक जैसे नहीं हैं। हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 8 के तहत शादी के रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था है। वहीं, स्पेशल मैरिज एक्ट, 1954 के तहत सिविल मैरिज यानी कोर्ट मैरिज की प्रक्रिया होती है। कई राज्यों में शादी का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है। इसलिए यह मान लेना सही नहीं है कि धार्मिक रीति-रिवाज से शादी करने के बाद रजिस्ट्रेशन की जरूरत नहीं पड़ेगी। कपल को अपने राज्य के कानून और प्रक्रिया की जानकारी लेनी चाहिए।

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