ईरान-इजराइल वॉर का असर,भारत के चावल निर्यात पर संकट, 50% खरीदार युद्ध में फंसे, बासमती पर सबसे बड़ी मार

अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद से क्षेत्रीय अस्थिरता चरम पर है। सबसे बड़ा खतरा 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) के जरिए होने वाली शिपिंग पर मंडरा रहा है। यह एक प्रमुख समुद्री रास्ता है जिससे दुनिया का बड़ा तेल और माल परिवहन होता है।

पश्चिम एशिया में ईरान और इजराइल के बीच भड़की युद्ध की आग अब भारत के कृषि निर्यात पर भारी पड़ती दिख रही है। इस बढ़ते सैन्य तनाव ने भारतीय चावल निर्यातकों के लिए गंभीर संकट खड़ा कर दिया है। सबसे ज्यादा चिंता बासमती चावल के व्यापार को लेकर है, क्योंकि भारत के कुल बासमती निर्यात का लगभग 50% हिस्सा केवल 5 पश्चिमी एशियाई देशों सऊदी अरब, ईरान, इराक, यूएई और यमन को जाता है। युद्ध के कारण इन देशों को होने वाली शिपिंग में रुकावट और भुगतान में देरी की आशंका से भारतीय किसान और निर्यातक दोनों परेशान हैं।

basmati rice crisis

होर्मुज जलडमरूमध्य का खतरा और शिपिंग पर ब्रेक

अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद से क्षेत्रीय अस्थिरता चरम पर है। सबसे बड़ा खतरा 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) के जरिए होने वाली शिपिंग पर मंडरा रहा है। यह एक प्रमुख समुद्री रास्ता है जिससे दुनिया का बड़ा तेल और माल परिवहन होता है। युद्ध की स्थिति में इस रास्ते पर प्रतिबंध लगने या जहाजों को निशाना बनाए जाने का डर है। इसके चलते, शिपिंग कंपनियों ने अपने जहाज रोक दिए हैं, जिससे अनाज से लदे जहाज फंस गए हैं और आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं।

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