ईरान संकट की मार अब बिल्डिंग मैटेरियल्स पर भी, पेंट से लेकर टाइल्स तक, सब कुछ होगा महंगा!

अगर आप घर बनाने की सोच रहे हैं तो यह सही समय नहीं है। ईरान युद्ध के चलते कच्चे तेल में उछाल आया है और गैस की किल्लत हो गई है। इसका बुरा असर बिल्डिंग मेटेरियल्स पर हुआ है। विशेषज्ञों का कहना है कि जल्द ही कई जरूरी बिल्डिंग मेटेरियल्स के दाम बढ़ सकते हैं। इससे घर निर्माण की लागत बढ़ेगी।

अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी युद्ध, खासकर Strait of Hormuz के बंद होने से वैश्विक तेल और गैस सप्लाई पर असर पड़ा है। भारत भी इससे अछूता नहीं है। इंडियन बॉस्केट में क्रूड ऑयल की कीमत बढ़कर 142 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई है। वहीं, फरवरी में करीब 62 डॉलर प्रति बैरल थी। देश में LPG की किल्लत बनी हुई है। रुसोई गैस में 60 रुपये प्रति सिलेंडर की बढ़ोतरी हो चुकी है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि इस युद्ध से सिर्फ तेल और गैसा महंगा नहीं होगा, बल्कि घर बनाने की लागत भी बढ़ेगी। बिल्डिंग मैटेरियल्स जैसे पेंट, टाइल्स, सीमेंट, स्टील और कंक्रीट महंगे होंगे। आइए समझते हैं कि इस युद्ध से घर के निर्माण लागत कितनी बढ़ेगी?

Home Construction cost hike

घर निर्माण की लगात बढ़ेगी

टाइल्स के दाम बढ़ने की आशंका

पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान युद्ध और गैस संकट के कारण गुजरात के मोरबी में 430 सिरेमिक यूनिटें कम से कम तीन हफ्तों तक काम नहीं करेंगी, क्योंकि पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष की वजह से मैन्युफैक्चरिंग प्रक्रिया में ज़रूरी गैस की सप्लाई बाधित हो गई है। मोरबी सिरेमिक मैन्युफैक्चरिंग एसोसिएशन के अध्यक्ष मनोज अरवडिया ने बताया कि मोरबी, जिसे 'सिरेमिक सिटी' और दुनिया में सिरेमिक टाइल उत्पादन का दूसरा सबसे बड़ा केंद्र माना जाता है। मोरबी में कुल 670 फैक्टरियों में से लगभग 450 फैक्टरियां गैस की कमी के कारण पहले ही बंद हो चुकी हैं, और आने वाले दिनों में कई और फैक्टरियां बंद होने की कगार पर हैं। सिरेमिक इंडस्ट्री अपने कामकाज के लिए प्रोपेन या नैचुरल गैस पर बहुत ज्यादा निर्भर करती है, खासकर भट्टियों को जलाने और सुखाने की प्रक्रियाओं के लिए। जानकारों का कहना है कि इससे मार्केट में टाइल्स की सप्लाई में बड़ी कमी आ सकती है और कीमत में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।

End of Feed