ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच छिड़ी जंग ने कच्चे तेल के दाम में आग लगा दी है। पिछले दो दिन में कच्चा तेल (ब्रेंट क्रूड) 65 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 80 डॉलर के करीब पहुंच गया है। हालांकि, अभी और तेजी की आशंका है। परामर्श कंपनी वुड मैकेंजी ने सोमवार को कहा कि पश्चिम एशिया में सैन्य संघर्ष छिड़ने के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य से टैंकर यातायात जल्द बहाल नहीं होने की स्थिति में कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से भी ऊपर जा सकती हैं। क्रूड की कीमतों में 10 डॉलर प्रति बैरल की बढ़ोतरी से भारत के आयात बिल में हर साल 13-14 अरब डॉलर का बोझ बढ़ा सकता है। एक अनुमान के मुताबिक, कच्चे तेल में प्रति 1 डॉलर की बढ़ोत्तरी भारत के वार्षिक आयात बिल में 2 अरब डॉलर (करीब ₹16,000 करोड़) का इजाफा हो सकता है। ऐसे में क्या भाारत में पेट्रोल और डीजल के दाम भी बढ़ेंगे। तनेजा
क्या पेट्रोल-डीजल होगा महंगा?
ऊर्जा नीति विशेषज्ञों का कहना है कि अभी फौरी तौर पर भारत में पेट्राल-डीजल की कीमत में बढ़ोतरी की संभावना नहीं है। हां, अगर ईरान युद्ध लंबा चला और कच्चे तेल की कीमत तेजी से बढ़ी तो कीमत में बढ़ोतरी हो सकती है। अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल 100 डॉलर के आसपास पहुंच जाता है तो भारत में पेट्रोल की कीमत 150 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच सकती है।
होर्मुज जलडमरूमध्य क्यों इतना महत्वपूर्ण?
होर्मुज जलडमरूमध्य जलमार्ग के बंद रहने से वैश्विक तेल आपूर्ति का 15 प्रतिशत और तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) आपूर्ति का करीब 20 प्रतिशत हिस्सा प्रभावित हो सकता है। अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान के सरकारी, सैन्य और परमाणु ठिकानों पर हमलों के बाद ईरान ने जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य से दूर रहने की चेतावनी दी। बीमा कंपनियों ने भी मालवाहक जहाजों की कवरेज वापस ले ली है जिससे टैंकर की आवाजाही प्रभावी रूप से रुक गई। हाल में हॉर्मुज के पास कम-से-कम तीन जहाजों पर हमले की खबरों के बाद ब्रेंट क्रूड आठ प्रतिशत से अधिक चढ़कर 78.72 डॉलर प्रति बैरल और अमेरिकी कच्चा तेल 7.6 प्रतिशत बढ़कर 72.20 डॉलर पर पहुंच गया है।
कीमतें 125 डॉलर प्रति बैरल तक गई थी
वुड मैकेंजी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष एलन गेल्डर ने कहा, "यदि ऊर्जा निर्यात का प्रवाह जल्दी बहाल नहीं हुआ तो कीमतों के ऊपर जाने का भारी जोखिम है।" उन्होंने रूस-यूक्रेन संघर्ष के शुरुआती दौर का हवाला देते हुए कहा कि आपूर्ति बाधित होने की आशंका से कीमतें 125 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चली गई थीं। मौजूदा हालात में भी 100 डॉलर प्रति बैरल से अधिक का स्तर संभव है। भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का लगभग 88 प्रतिशत आयात करता है। ऐसे में कीमतों में उछाल से आयात बिल बढ़ेगा और ईंधन महंगाई पर दबाव पड़ेगा। इस बीच, आठ पेट्रोलियम निर्यातक देशों के समूह ’ओपेक प्लस’ ने अप्रैल में अपना उत्पादन 2.06 लाख बैरल प्रतिदिन बढ़ाने का फैसला किया है। हालांकि, गेल्डर ने कहा कि यदि हॉर्मुज जलडमरूमध्य से आपूर्ति बहाल नहीं होती तो यह निर्णय अप्रासंगिक हो सकता है।
1970 के दशक जैसे हो सकते हैं हालात
वर्ष 2025 में करीब 8.1 करोड़ टन एलएनजी का निर्यात हॉर्मुज के जरिये हुआ था जो वैश्विक आपूर्ति का करीब 20 प्रतिशत है। वुड मैकेंजी में गैस एवं एलएनजी शोध प्रमुख मासिमो दी ओदोआर्दो ने कहा कि आपूर्ति बाधित होने से एशिया और यूरोप के बीच उपलब्ध खेप के लिए प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी। यूरोप का गैस भंडार मौसमी औसत से नीचे है। विश्लेषकों के अनुसार, यदि बाधा लंबी चली तो असर 1970 के दशक के पश्चिम एशिया के तेल प्रतिबंध जैसा हो सकता है। हालांकि, उन्होंने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था अब पहले की तुलना में तेल पर कम निर्भर है, लेकिन गंभीर आपूर्ति झटका कीमतों को तेजी से ऊपर ले जा सकता है।
