Iran crisis: होर्मुज रूट बंद होने से 100 डॉलर के पार जाएगा कच्चा तेल, क्या पेट्रोल-डीजल होगा महंगा?

Iran crisis: रूस-यूक्रेन संघर्ष के शुरुआती दिनों में आपूर्ति बाधित होने की आशंका से कच्चे तेल की कीमतें 125 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चली गई थीं। मौजूदा हालात में भी 100 डॉलर प्रति बैरल से अधिक का स्तर संभव है। भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का लगभग 88 प्रतिशत आयात करता है।

ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच छिड़ी जंग ने कच्चे तेल के दाम में आग लगा दी है। पिछले दो दिन में कच्चा तेल (ब्रेंट क्रूड) 65 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 80 डॉलर के करीब पहुंच गया है। हालांकि, अभी और तेजी की आशंका है। परामर्श कंपनी वुड मैकेंजी ने सोमवार को कहा कि पश्चिम एशिया में सैन्य संघर्ष छिड़ने के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य से टैंकर यातायात जल्द बहाल नहीं होने की स्थिति में कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से भी ऊपर जा सकती हैं। क्रूड की कीमतों में 10 डॉलर प्रति बैरल की बढ़ोतरी से भारत के आयात बिल में हर साल 13-14 अरब डॉलर का बोझ बढ़ा सकता है। एक अनुमान के मुताबिक, कच्चे तेल में प्रति 1 डॉलर की बढ़ोत्तरी भारत के वार्षिक आयात बिल में 2 अरब डॉलर (करीब ₹16,000 करोड़) का इजाफा हो सकता है। ऐसे में क्या भाारत में पेट्रोल और डीजल के दाम भी बढ़ेंगे। तनेजा

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क्या पेट्रोल-डीजल होगा महंगा?

ऊर्जा नीति विशेषज्ञों का कहना है कि अभी फौरी तौर पर भारत में पेट्राल-डीजल की कीमत में बढ़ोतरी की संभावना नहीं है। हां, अगर ईरान युद्ध लंबा चला और कच्चे तेल की कीमत तेजी से बढ़ी तो कीमत में बढ़ोतरी हो सकती है। अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल 100 डॉलर के आसपास पहुंच जाता है तो भारत में पेट्रोल की कीमत 150 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच सकती है।

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