अगर आपको भी लग रहा है कि नया स्मार्टफोन खरीदना पहले से ज्यादा महंगा हो गया है, तो ऐसा सिर्फ आपको नहीं लग रहा। बल्कि, देश में बड़ी संख्या में लोग अब यही सोचने लगे हैं। यही वजह है कि अब भारतीय पहले की तरह हर साल या दो साल में फोन नहीं बदल रहे। लोग पुराने मोबाइल को ज्यादा समय तक चला रहे हैं और जरूरत पड़ने पर नया फोन खरीदने की बजाय रिफर्बिश्ड स्मार्टफोन को चुन रहे हैं। यही बदलाव अब भारत के स्मार्टफोन बाजार की नई तस्वीर बनता दिख रहा है।
स्मार्टफोन महंगे होने से घट रही खरीद
बढ़ गई फोन बदलने की अवधि
पहले भारत में लोग औसतन 18 से 24 महीने में अपना स्मार्टफोन बदल देते थे। लेकिन अब यह अवधि बढ़कर 36 महीने या उससे भी ज्यादा हो गई है। यानी नया फोन खरीदने की रफ्तार साफ तौर पर धीमी पड़ गई है। काउंटरपॉइंट रिसर्च के मुताबिक, 2026 में भारत में नए स्मार्टफोन की शिपमेंट करीब 11% घट सकती है, जबकि रिफर्बिश्ड स्मार्टफोन बाजार 12% की दर से बढ़ने का अनुमान है। इससे साफ है कि ग्राहक बाजार से गायब नहीं हुए हैं, बल्कि उनकी पसंद बदल रही है।
| क्या बदला? | स्थिति |
|---|---|
| फोन बदलने का समय | 18-24 महीने से बढ़कर 36 महीने या उससे ज्यादा |
| नए स्मार्टफोन की शिपमेंट | 2026 में 11% घटने का अनुमान |
| रिफर्बिश्ड स्मार्टफोन बाजार | 12% बढ़ने का अनुमान |
| रिफर्बिश्ड फोन खरीदने पर विचार | करीब 14% ग्राहक |
| सबसे ज्यादा मांग | रिफर्बिश्ड आईफोन 15 और आईफोन 16 |
| मुख्य वजह | महंगे नए स्मार्टफोन, बढ़ी कंपोनेंट लागत और बेहतर सर्टिफाइड रिफर्बिश्ड विकल्प |
फोन इतने महंगे क्यों हो गए?
स्मार्टफोन कंपनियों पर पिछले दो साल में मेमोरी चिप, डिस्प्ले, कैमरा सेंसर और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स की लागत बढ़ने का असर पड़ा है। खासकर मेमोरी चिप बनाने वाली कंपनियों ने पहले उत्पादन घटाया था। बाद में कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़े सर्वर और डेटा सेंटर में चिप की मांग तेजी से बढ़ गई। नतीजा यह हुआ कि मेमोरी चिप महंगी हो गई और उसका असर सीधे स्मार्टफोन की कीमतों पर पड़ा।
काउंटरपॉइंट के मुताबिक, इस साल 85% से ज्यादा स्मार्टफोन मॉडल महंगे हुए हैं और उनकी औसत कीमत करीब 15% बढ़ी है। वहीं कई नए मॉडल अपने पुराने संस्करणों की तुलना में 30 से 40% तक महंगे लॉन्च किए गए हैं। IDC के अनुसार, जनवरी-मार्च 2026 तिमाही में भारत में स्मार्टफोन की औसत बिक्री कीमत बढ़कर 302 डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई।
हर सात में से एक ग्राहक बदल रहा फैसला
रिसर्च के अनुसार, अब करीब 14% ग्राहक नया फोन खरीदने की बजाय रिफर्बिश्ड स्मार्टफोन खरीदने पर विचार कर रहे हैं। क्योंकि, कम कीमत में बेहतर फीचर, वारंटी और भरोसा। अब ग्राहक सिर्फ सेकेंड हैंड फोन नहीं खरीदना चाहते, बल्कि ऐसे सर्टिफाइड रिफर्बिश्ड फोन पसंद कर रहे हैं जिनमें क्वालिटी जांच, बैटरी हेल्थ रिपोर्ट, वारंटी और आफ्टर-सेल्स सपोर्ट भी मिलता है।
सबसे ज्यादा मांग आईफोन की
रिफर्बिश्ड बाजार में सबसे ज्यादा मांग प्रीमियम आईफोन की देखी जा रही है। खासकर आईफोन 15 और आईफोन 16 मॉडल कम कीमत में फ्लैगशिप अनुभव देने की वजह से तेजी से बिक रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जैसे-जैसे भारत में एप्पल के ग्राहकों की संख्या बढ़ेगी और लोग अपने पुराने आईफोन एक्सचेंज करेंगे, वैसे-वैसे रिफर्बिश्ड आईफोन की उपलब्धता भी बढ़ती जाएगी।
कंपनियां भी बदल रही हैं रणनीति
बाजार की बदलती मांग को देखते हुए बड़ी कंपनियां भी अब रिफर्बिश्ड कारोबार पर जोर दे रही हैं। सैमसंग ने भारत में अपना आधिकारिक सर्टिफाइड रिफर्बिश्ड स्मार्टफोन कार्यक्रम शुरू किया है। दूसरी कंपनियां भी एक्सचेंज और बायबैक योजनाओं का दायरा बढ़ा रही हैं ताकि पुराने फोन वापस लेकर उन्हें दोबारा बाजार में उतारा जा सके।
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