Indias Services Sector PMI : भारत की अर्थव्यवस्था के लिए जून का महीना कुछ धीमी रफ्तार लेकर आया है। देश के सर्विस सेक्टर की गतिविधियां जून में 17 महीने के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गईं। HSBC India Services PMI जून में घटकर 57.4 रह गया, जो मई में 59.8 था। हालांकि 50 से ऊपर का आंकड़ा अभी भी सेक्टर में विस्तार (Expansion) का संकेत देता है, लेकिन लगातार गिरावट यह बताती है कि देश की आर्थिक गतिविधियों की रफ्तार पहले के मुकाबले धीमी पड़ रही है।
सेवा क्षेत्र में सुस्ती का माहौल
सर्विस सेक्टर की ग्रोथ में तेज गिरावट
एचएसबीसी के ताजा पीएमआई आंकड़ों के मुताबिक जून का 57.4 का स्तर जनवरी 2025 के बाद सबसे कमजोर प्रदर्शन है। जनवरी 2025 में यह सूचकांक 56.5 पर था। पिछले साल अगस्त 2025 में सर्विस सेक्टर पीएमआई 62.9 तक पहुंच गया था, लेकिन उसके बाद से इसमें धीरे-धीरे कमजोरी देखने को मिल रही है। मई 2026 में 59.8 के मजबूत आंकड़े के बाद उम्मीद थी कि सर्विस सेक्टर फिर से तेजी पकड़ेगा, लेकिन जून के आंकड़ों ने इन उम्मीदों को झटका दिया है।
मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर भी पड़ा धीमा
सिर्फ सर्विस सेक्टर ही नहीं, बल्कि मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की रफ्तार भी जून में कम हुई। मैन्युफैक्चरिंग PMI मई के 55.0 से घटकर जून में 54.2 पर आ गया, जो तीन महीने का निचला स्तर है। हालांकि मैन्युफैक्चरिंग में गिरावट केवल 0.8 अंक की रही, जबकि सर्विस सेक्टर में 2.4 अंक की तेज गिरावट दर्ज की गई। इससे साफ है कि जून में सबसे ज्यादा दबाव सर्विस सेक्टर पर रहा।
आखिर PMI होता क्या है?
परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (PMI) किसी सेक्टर की कारोबारी गतिविधियों का सबसे अहम संकेतक होता है। HSBC की तरफ से देश के शीर्ष मैन्युफैक्चरर और सर्विस सेक्टर की कंपनियों के टॉप मैनेजमेंट का सर्वे किया जाता है। इस सर्वे से पता चलता है कि मैन्युफैक्चरिंग या सर्विस सेक्टर में ग्रोथ है या नहीं है। 50 से ऊपर का आंकड़ा कारोबार में विस्तार दिखाता है। वहीं, 50 से नीचे का मतलब गतिविधियों में गिरावट होता है। जितना अधिक PMI होगा, उतनी मजबूत आर्थिक गतिविधि मानी जाती है।
इस लिहाज से 57.4 अभी भी सकारात्मक स्तर है, लेकिन इसमें आई तेज गिरावट मांग में कमजोरी का संकेत देती है।
मांग कमजोर होने का असर
रिपोर्ट के मुताबिक जून में मांग (Demand) की रफ्तार कमजोर रही, जिसका असर नई बुकिंग, उत्पादन और रोजगार पर पड़ा। कंपनियों ने नए कर्मचारियों की भर्ती भी पहले की तुलना में धीमी कर दी। रोजगार वृद्धि पिछले छह महीनों के सबसे कमजोर स्तर पर रही। सर्विस और मैन्युफैक्चरिंग दोनों सेक्टर की सुस्ती का असर पूरे निजी क्षेत्र पर भी दिखाई दिया। जून में भारत की प्राइवेट सेक्टर बिजनेस एक्टिविटी तीन महीने के निचले स्तर पर पहुंच गई। इससे संकेत मिलता है कि आर्थिक गतिविधियों की गति फिलहाल कुछ धीमी हो रही है।
आगे क्या रहेगा नजर रखने लायक?
अर्थशास्त्रियों की नजर अब आने वाले महीनों में मांग, उपभोक्ता खर्च, रोजगार और नए ऑर्डर पर रहेगी। यदि घरेलू मांग मजबूत होती है तो सर्विस सेक्टर दोबारा तेजी पकड़ सकता है। लेकिन यदि यही रुझान जारी रहा तो इसका असर रोजगार, निवेश और आर्थिक वृद्धि पर भी पड़ सकता है।
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