जब दुनिया में मचा तेल संकट, तब रूस-भारत की दोस्ती बनी सबसे बड़ी ताकत

मध्य पूर्व में जारी संकट के कारण मार्च 2026 में भारत का कुल कच्चा तेल आयात 15% गिर गया, लेकिन इसी दौरान रूस से होने वाली खरीद में 90% का भारी उछाल दर्ज किया गया।

साल 2026 की शुरुआत से ही मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) में ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव ने वैश्विक तेल बाजार में खलबली मचा दी है। युद्ध की आहट ने कच्चे तेल की सप्लाई चेन को बुरी तरह प्रभावित किया है, जिससे भारत जैसे देशों के लिए चिंता बढ़ गई थी। भारत अपनी जरूरत का 80 प्रतिशत से ज्यादा तेल आयात करता है, ऐसे में खाड़ी देशों में अस्थिरता का सीधा असर भारतीय अर्थव्यवस्था और आम आदमी की जेब पर पड़ता है। लेकिन रॉयटर्स की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, इस संकट के बीच रूस भारत के लिए सबसे बड़ा संकटमोचक बनकर उभरा है।

Russian LNG

मार्च के आंकड़ों ने चौंकाया

मार्च 2026 के आंकड़े बताते हैं कि जब दुनिया हॉर्मुज जलडमरूमध्य और लाल सागर में हो रहे हमलों से डरी हुई थी, तब भारत ने अपनी ऊर्जा रणनीति में बड़ा बदलाव किया। रिपोर्ट के अनुसार, मार्च महीने में भारत द्वारा रूस से मंगाए गए कच्चे तेल की मात्रा ने अब तक के सभी पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। जहाँ एक तरफ ईरान के साथ जारी युद्ध की स्थिति के कारण मिडिल ईस्ट से आने वाले तेल के आयात में गिरावट दर्ज की गई, वहीं रूसी तेल की सप्लाई में जबरदस्त उछाल आया। रूस अब भारत का सबसे बड़ा और भरोसेमंद तेल आपूर्तिकर्ता (Supplier) बन गया है।

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