India Gem and Jewellery Exports : भारत के रत्न एवं आभूषण (जेम्स एंड ज्वेलरी) उद्योग के लिए जून 2026 काफी शानदार रहा। दुनिया के कई बड़े बाजारों में भारतीय आभूषणों की मांग बढ़ने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोने की कीमतों में गिरावट आने से देश के जेम्स एंड ज्वेलरी निर्यात में जोरदार उछाल दर्ज किया गया है। जेम एंड ज्वेलरी एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (GJEPC) के मुताबिक, जून 2026 में भारत का कुल रत्न एवं आभूषण निर्यात पिछले साल के इसी महीने की तुलना में 26.51% बढ़कर 2.21 अरब अमेरिकी डॉलर पहुंच गया। यह बढ़ोतरी इस उद्योग के लिए सकारात्मक संकेत मानी जा रही है।
जेम्स एंड ज्वेलरी के भारतीय निर्यातकों को मिला बड़ा फायदा
सोने के गहने, हीरे और प्लेटिनम ज्वेलरी की रही सबसे ज्यादा मांग
GJEPC के अनुसार जून महीने में सबसे अधिक मांग सोने के आभूषण, कट एवं पॉलिश किए गए हीरे, प्लेटिनम ज्वेलरी और लैब-ग्रोन डायमंड की रही। अमेरिका, यूरोप और मध्य-पूर्व जैसे प्रमुख बाजारों से बेहतर ऑर्डर मिलने के कारण भारतीय निर्यातकों को अच्छा कारोबार मिला। बढ़ती मांग की वजह से कई कंपनियों के निर्यात में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला।
सोने की कीमत घटने से बढ़ी प्रतिस्पर्धा
एएनआई के मुताबिक जेम एंड ज्वेलरी एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल ने बताया कि जून में अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में मई के मुकाबले 10.28% की गिरावट आई। इससे भारतीय कंपनियों के लिए कच्चा माल सस्ता हो गया और उत्पादन लागत कम हुई। कम लागत के कारण भारतीय निर्यातक विदेशी ग्राहकों को पहले से अधिक प्रतिस्पर्धी कीमतों पर आभूषण उपलब्ध करा सके। यही वजह रही कि विदेशी बाजारों से ऑर्डर बढ़े और निर्यात में तेज उछाल देखने को मिला।
कुवैत और शारजाह की प्रदर्शनियों का भी मिला फायदा
GJEPC के मुताबिक भारतीय निर्यातकों ने कुवैत और शारजाह में आयोजित अंतरराष्ट्रीय ज्वेलरी प्रदर्शनियों में सक्रिय भागीदारी की। इन आयोजनों में भारतीय आभूषणों को अच्छी प्रतिक्रिया मिली और कई नए कारोबारी संपर्क बने। इससे भी जून महीने के निर्यात को मजबूती मिली। हालांकि काउंसिल ने यह भी कहा कि RBI द्वारा नामित एजेंसियों के जरिए होने वाले सोने के आयात पर जीएसटी से जुड़े तकनीकी नियमों के कारण निर्यातकों को अभी भी पर्याप्त मात्रा में सोना उपलब्ध कराने में कुछ दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
GJEPC चेयरमैन ने जताया भरोसा
GJEPC के चेयरमैन किरिट भंसाली ने कहा कि जून में निर्यात में आई मजबूत बढ़ोतरी यह दिखाती है कि भारतीय जेम्स एंड ज्वेलरी उद्योग वैश्विक चुनौतियों के बावजूद मजबूती से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि अप्रैल-जून तिमाही के दौरान कुल निर्यात लगभग स्थिर रहा, लेकिन जून की रिकवरी आने वाले महीनों के लिए काफी उत्साहजनक है। उन्होंने उम्मीद जताई कि प्रमुख बाजारों से लगातार मिल रही मांग, नए देशों में बाजार का विस्तार और भारत-ब्रिटेन के बीच हुए CETA व्यापार समझौते जैसे कदम भविष्य में निर्यात को और गति देंगे।
सोने के आभूषणों के निर्यात में सबसे बड़ी छलांग
उत्पाद श्रेणियों की बात करें तो जून में सोने के आभूषणों का निर्यात 54.50% बढ़कर 1.09 अरब डॉलर पहुंच गया। वहीं स्टडेड गोल्ड ज्वेलरी के निर्यात में 85.35% की शानदार बढ़ोतरी दर्ज की गई। कट और पॉलिश किए गए हीरों का निर्यात 8.71%, प्लेटिनम ज्वेलरी का निर्यात 34.77% और पॉलिश किए गए लैब-ग्रोन डायमंड का निर्यात 52.25% बढ़ा। हालांकि इस दौरान चांदी के आभूषण और रंगीन रत्नों के निर्यात में कुछ गिरावट दर्ज की गई।
अप्रैल-जून तिमाही में भी बना रहा मजबूती का संकेत
वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही यानी अप्रैल से जून 2026 के दौरान भारत का कुल जेम्स एंड ज्वेलरी निर्यात 6.61 अरब अमेरिकी डॉलर रहा। डॉलर के हिसाब से इसमें 0.04 फीसदी की मामूली बढ़ोतरी हुई, जबकि रुपये के हिसाब से यह वृद्धि 10.76% रही। GJEPC का कहना है कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और कीमती धातुओं की ऊंची कीमतों के बावजूद उद्योग का स्थिर प्रदर्शन इसकी मजबूती और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को दर्शाता है।
आने वाले महीनों में और बढ़ सकती है रफ्तार
उद्योग से जुड़े एक्सपर्ट्स का मानना है कि यदि वैश्विक बाजारों में मांग बनी रहती है, सोने की कीमतें नियंत्रित रहती हैं और भारत को नए व्यापार समझौतों का लाभ मिलता है, तो आने वाले महीनों में जेम्स एंड ज्वेलरी निर्यात में और तेज वृद्धि देखने को मिल सकती है। इससे देश की विदेशी मुद्रा आय बढ़ेगी और इस उद्योग से जुड़े लाखों कारीगरों, छोटे कारोबारियों और निर्यातकों को भी सीधा फायदा मिलेगा।
