India Data Centre Capacity : भारत में डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर का दायरा बेहद तेजी से फैल रहा है। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, साल 2020 के बाद से देश की डेटा सेंटर क्षमता में 4 गुना से भी अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। जहां 2020 में भारत की कुल डेटा सेंटर कैपेसिटी महज 375 मेगावाट (MW) थी, वहीं यह अब बढ़कर करीब 1,575 मेगावाट तक पहुंच गई है। देश में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते इस्तेमाल और नई तकनीकों को अपनाने के लिए इस इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार बेहद जरूरी माना जा रहा है।
देश की डेटा सेंटर क्षमता में 4 गुना से भी अधिक की बढ़ोतरी
इंडिया-AI मिशन से मिला कंप्यूटिंग पावर को बढ़ावा
डेटा सेंटर कैपेसिटी में यह शानदार उछाल 'इंडिया-AI (IndiaAI) मिशन' के तहत कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के लगातार विस्तार का नतीजा है। इस मिशन का मुख्य उद्देश्य देश के रिसर्चर्स, स्टार्टअप्स और इनोवेटर्स को हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग की सुविधा आसानी से उपलब्ध कराना है। मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक जून 2026 तक शेयर्ड कंप्यूट कैपेसिटी को बढ़ाकर 45,000 से अधिक ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट्स (GPUs) तक पहुंचा दिया गया है। इसके साथ ही अगस्त 2026 तक सब्सिडी वाले इस AI कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का लाभ 237 प्रोजेक्ट्स उठा चुके हैं, जिसमें कुल मिलाकर 93.18 लाख GPU आवर्स (घंटे) का इस्तेमाल किया गया है। किफायती दरों पर हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग मिलने से भारतीय स्टार्टअप्स और रिसर्चर्स के लिए AI मॉडल तैयार करना, उनका परीक्षण करना और ट्रेनिंग देना काफी आसान और सस्ता हो गया है।
मेट्रो शहरों से निकलकर नए राज्यों तक पहुंचा नेटवर्क
न्यूज एजेंसी एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक फिलहाल भारत का डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर मुख्य रूप से बड़े टेक और कमर्शियल हब्स तक सीमित रहा है। इनमें मुंबई, नवी मुंबई, चेन्नई, हैदराबाद, बेंगलुरु, दिल्ली-एनसीआर और गुजरात मुख्य रूप से शामिल हैं। हालांकि, अब इस इंडस्ट्री का दायरा नए क्षेत्रों में भी तेजी से फैल रहा है। मंत्रालय का कहना है कि डेटा सेंटर उद्योग अब नए निवेश गंतव्यों के रूप में उभर रहे राज्यों में विस्तार कर रहा है। आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और पश्चिम बंगाल जैसे राज्य अब नए डेटा सेंटर निवेश के लिए प्रमुख केंद्र बनकर सामने आ रहे हैं।
स्वदेशी AI मॉडल्स और डेटासेट पर खास जोर
सिर्फ इंफ्रास्ट्रक्चर ही नहीं, बल्कि भारत सरकार देश के अपने स्वदेशी AI मॉडल्स विकसित करने पर भी ध्यान दे रही है। इस पहल के तहत मिले 506 आवेदनों में से 20 स्वदेशी फाउंडेशन मॉडल प्रस्तावों को चुना गया है। इनमें 12 लार्ज मल्टीमॉडल मॉडल्स (LMMs) और 8 स्मॉल लैंग्वेज मॉडल्स (SLMs) शामिल हैं। इसका उद्देश्य ऐसे AI मॉडल्स बनाना है जो भारत की स्थानीय भाषाओं, सांस्कृतिक जरूरतों और परिस्थितियों के बिल्कुल अनुकूल हों। इसके अलावा, देश के AI इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए 'AI कोश' (AI Kosh) की शुरुआत की गई है। जुलाई 2026 तक इस प्लेटफॉर्म पर 14,000 से अधिक डेटासेट और 331 AI मॉडल्स होस्ट किए जा चुके हैं, जिनका इस्तेमाल डेवलपर्स और रिसर्चर्स अपने प्रोजेक्ट्स के लिए कर सकते हैं।
आत्मनिर्भर और वैश्विक AI लीडर बनने की राह
केंद्र सरकार ने घरेलू AI क्षमताओं को विकसित करने, इनोवेशन को बढ़ावा देने और आर्थिक विकास की गति तेज करने के लिए करीब 10,372 करोड़ रुपये के बजट के साथ 'इंडिया-AI मिशन' को मंजूरी दी थी। कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के इस तेजी से होते विस्तार और स्वदेशी AI तकनीकों के विकास का अंतिम लक्ष्य भारत को प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना और वैश्विक स्तर पर एक प्रतिस्पर्धी टेक इकोसिस्टम के रूप में स्थापित करना है।
