गणतंत्र दिवस के कारण सोमवार को शेयर बाजार बंद रहेंगे। इसलिए इस हफ्ते बाजार की शुरुआत मंगलवार से होगी। मार्केट एक्सपर्ट का कहना है कि मंगलवार को बाजार में बड़ी रिकवरी देखने को मिल सकती है। इसकी पीछे की वजह अमेरिका द्वारा भारत पर 25 प्रतिशत टैरिफ हटाने की खबरें होंगी। गौरतलब है कि अमेरिका ने भारत पर रूसी तेल खरीद को लेकर 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाए हुए है। अब वह उसे हटाने के संकेत दे रहा है। इससे बाजार में जोश भर सकता है। साथ ही कंपनियों के तीसरी तिमाही के नतीजे, अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दर पर फैसले और आगामी आम बजट 2026-27 से भी बाजार में जोश लौट सकता है। बाजार में बड़ी बिकवाली के बाद रिकवरी की उम्मीद लगाई जा रही है।
शेयर बाजार
स्वास्तिका इन्वेस्टमार्ट लिमिटेड के शोध प्रमुख संतोष मीणा ने कहा कि निवेशक वैश्विक शेयर बाजारों के रुझान और कच्चे तेल की चाल पर भी नजर रखेंगे। उन्होंने कहा कि सोमवार की छुट्टी के बाद मंगलवार से कारोबार शुरू होगा, जिसे 27 जनवरी को होने वाले भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) से सकारात्मक बढ़त मिल सकती है। हालांकि, ईरान और ग्रीनलैंड से जुड़ी भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं बड़ी बाधा बनी हुई हैं।
ये फैक्टर भी डालेंगे बाजार पर असर
विशेषज्ञों ने कहा कि इसके अलावा विदेशी निवेशकों की कारोबारी गतिविधि, रुपया-डॉलर का रुख और वैश्विक व्यापार से संबंधित घटनाक्रम भी बाजार में कारोबार को प्रभावित करेंगे। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण एक फरवरी को आम बजट पेश करेंगी। बजट पेश होने के दिन रविवार है, लेकिन इस दिन शेयर बाजार एनएसई और बीएसई खुले रहेंगे।
एक्सपर्ट का क्या है कहना?
रेलिगेयर ब्रोकिंग लिमिटेड के वरिष्ठ उपाध्यक्ष (शोध) अजीत मिश्रा ने कहा कि यह सप्ताह महत्वपूर्ण घरेलू और वैश्विक कारकों से भरा हुआ है। घरेलू मोर्चे पर बाजार औद्योगिक उत्पादन के आंकड़ों, आम बजट से जुड़े राजकोषीय संकेतकों और साप्ताहिक विदेशी मुद्रा भंडार पर नजर रखेंगे। कंपनियों के तिमाही नतीजों पर भी नजर रहेगी, जिसमें एक्सिस बैंक, एलएंडटी, मारुति सुजुकी, आईटीसी, एनटीपीसी और बजाज ऑटो जैसी दिग्गज कंपनियों के नतीजे आएंगे। उन्होंने आगे कहा कि वैश्विक स्तर पर ध्यान अमेरिका के प्रमुख व्यापक आर्थिक आंकड़ों, अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दर निर्णय और वैश्विक व्यापार नीतियों में हो रहे घटनाक्रमों पर रहेगा। रुपया शुक्रवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 92 के ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुंच गया।
विदेशी निवेशकों ने की जमकर बिकवाली
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के मुख्य निवेश रणनीतिकार वी के विजयकुमार ने कहा कि एफपीआई ने 23 जनवरी को समाप्त सप्ताह में अपनी बिकवाली न केवल जारी रखी, बल्कि इसकी तीव्रता भी बढ़ा दी। रुपये के निरंतर अवमूल्यन, भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर अनिश्चितता और अब तक के सामान्य तिमाही नतीजों के कारण बाजार की धारणा बहुत कमजोर रही है। ऑनलाइन कारोबारी मंच एनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी आर ने कहा कि बाजार अब बजट की ओर रुख कर रहा है। निवेशकों को उम्मीद है कि राजकोषीय घाटा सकल घरेलू उत्पाद के 4.2-4.3 प्रतिशत के आसपास रहेगा और बुनियादी ढांचे, रक्षा तथा रेलवे पर पूंजीगत व्यय पर जोर जारी रहेगा।
